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नई दिल्ली। भारतीय जनता पार्टी से इस्तीफा देने के बाद पूर्व राष्ट्रीय प्रवक्ता शहजाद पूनावाला ने एक पॉडकास्ट में भाजपा, प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी, कांग्रेस नेता राहुल गांधी और पेपर लीक जैसे मुद्दों पर खुलकर अपनी बात रखी है। इसी बातचीत में उन्होंने कहा कि अब वह भाजपा छोड़ चुके हैं, इसलिए पार्टी उनका कुछ नहीं बिगाड़ सकती। उन्होंने प्रधानमंत्री मोदी को लेकर भी ऐसी टिप्पणी की, जो पहली नजर में बेहद तीखी लगती है। हालांकि उनके पूरे बयान को देखने पर साफ होता है कि उन्होंने 'बुरा तानाशाह' और इस्तीफे वाली बात व्यंग्यात्मक अंदाज में कही थी।
शहजाद पूनावाला ने वरिष्ठ पत्रकार बरखा दत्त के 'Inside Out' पॉडकास्ट में अपनी राजनीतिक यात्रा और भाजपा छोड़ने के फैसले पर बात की। इसी दौरान उन्होंने कहा कि अब भाजपा न तो उनका 'बाल बांका' कर सकती है और न ही पार्टी उन्हें पैसे दे रही है। इसके बावजूद उन्होंने भाजपा को दूसरी राजनीतिक पार्टियों की तुलना में बेहतर बताया।
भाजपा मेरा कुछ नहीं बिगाड़ सकती'
पूनावाला ने बातचीत में कहा कि वह भाजपा छोड़ चुके हैं और अब पार्टी उनका कुछ नहीं बिगाड़ सकती। उनका कहना था कि भाजपा से अलग होने के बाद भी वह ईमानदारी से वही बात कहेंगे जो उन्हें सही लगती है।
उन्होंने भाजपा की आलोचना करने के साथ-साथ उसका बचाव भी किया। पूनावाला ने दावा किया कि दूसरी पार्टियों की तुलना में भाजपा में जवाबदेही और राजनीतिक मर्यादा अब भी मौजूद है। इसके लिए उन्होंने अलग-अलग राज्यों में पेपर लीक और मंत्रियों की जवाबदेही का मुद्दा उठाया।
यही वजह है कि उनके बयान को भाजपा के खिलाफ पूरी तरह हमले के रूप में देखना सही नहीं होगा। वह पार्टी से अलग होने के बावजूद कई मुद्दों पर भाजपा का पक्ष लेते दिखाई दिए।
क्या सच में मोदी से इस्तीफा मांगा?
पॉडकास्ट में सबसे ज्यादा चर्चा प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी को लेकर पूनावाला की टिप्पणी की हो रही है। उन्होंने व्यंग्य करते हुए मोदी को 'बहुत बुरा तानाशाह' बताया और कहा कि वह उन्हें इस मामले में 100 में से शून्य नंबर देते हैं। इसी क्रम में उन्होंने मोदी से इस्तीफा देने की बात भी कही।
लेकिन यहां बयान का संदर्भ समझना बेहद जरूरी है। पूनावाला वास्तव में प्रधानमंत्री मोदी पर तानाशाही का आरोप लगाकर इस्तीफा नहीं मांग रहे थे। उनका बयान **व्यंग्यात्मक** था।
उन्होंने अपनी बात के समर्थन में पूर्व प्रधानमंत्री इंदिरा गांधी के शासनकाल की इमरजेंसी और अन्य पुराने राजनीतिक प्रसंगों का उल्लेख किया। उनका तर्क था कि अगर मोदी को 'तानाशाह' कहा जाता है तो उन्होंने वैसी कार्रवाइयां नहीं कीं, जिन्हें पूनावाला पूर्ववर्ती सरकारों से जोड़ रहे थे।
इसलिए सिर्फ 'PM मोदी से इस्तीफा मांगा' लिखने से बयान का अर्थ बदल सकता है। समाचार में यह बताना जरूरी है कि इस्तीफे वाली टिप्पणी व्यंग्य के तौर पर की गई थी।
पेपर लीक पर भाजपा को लेकर क्या कहा?
बातचीत के दौरान हाल के NEET पेपर लीक आंदोलन और भाजपा की प्रतिक्रिया का मुद्दा भी उठा। इस पर पूनावाला ने माना कि भाजपा जैसे बड़े संगठन में कई बार फैसले लेने या किसी मुद्दे पर प्रतिक्रिया देने में समय लग सकता है।
इसके साथ ही उन्होंने दूसरे राज्यों का उदाहरण देकर विपक्षी दलों पर सवाल उठाए। उन्होंने पंजाब, झारखंड और कर्नाटक जैसे राज्यों में शिक्षा और पेपर लीक से जुड़े मामलों का उल्लेख करते हुए वहां मंत्रियों की जवाबदेही पर सवाल किया।
पूनावाला की दलील थी कि अगर भाजपा से जुड़े किसी मामले में इस्तीफे की मांग होती है तो यही पैमाना दूसरी राजनीतिक पार्टियों की सरकारों पर भी लागू होना चाहिए।
जुलाई में पहली बार दिया था इस्तीफा
शहजाद पूनावाला लंबे समय तक भाजपा के प्रमुख टीवी चेहरों और राष्ट्रीय प्रवक्ताओं में शामिल रहे। उन्होंने जुलाई 2026 में पार्टी छोड़ने की पेशकश की थी। बाद में 17 अगस्त को उन्होंने एक बार फिर भाजपा अध्यक्ष नितिन नवीन को अपना इस्तीफा सौंपा और पार्टी के सभी पदों के साथ प्राथमिक सदस्यता छोड़ने की बात कही।
अगस्त में सामने आई रिपोर्टों के मुताबिक पूनावाला ने अपने फैसले के पीछे व्यक्तिगत और आर्थिक परिस्थितियों का हवाला दिया था। उन्होंने निजी क्षेत्र में काम करने की जरूरत भी बताई थी।
बाद में एक इंटरव्यू में उन्होंने आर्थिक दबाव को लेकर खुलकर बात की। पूनावाला ने कहा कि उन्हें अपना किराया और दूसरे खर्च पूरे करने होते हैं और राजनीतिक प्रवक्ता की भूमिका के लिए वेतन नहीं मिलता। उन्होंने यह भी कहा कि वह काफी समय से पार्टी छोड़ने के बारे में विचार कर रहे थे।
भाजपा से नाराज होकर छोड़ी पार्टी?
पूनावाला के इस्तीफे के बाद यह चर्चा भी शुरू हुई थी कि क्या उन्होंने किसी राजनीतिक विवाद या पार्टी नेतृत्व से नाराजगी के कारण भाजपा छोड़ी। हालांकि उन्होंने सार्वजनिक तौर पर अपने फैसले के पीछे मुख्य रूप से निजी और आर्थिक वजहों का जिक्र किया।
उन्होंने भाजपा से विदाई के दौरान पार्टी के प्रति सम्मान भी जताया था। रिपोर्टों के मुताबिक, पहले दिए गए इस्तीफे को स्वीकार नहीं किया गया था, जिसके बाद अगस्त में उन्होंने दोबारा इस्तीफा देकर उसे स्वीकार करने का अनुरोध किया।
इसलिए उनके मौजूदा बयानों को इस्तीफे के कारणों से जोड़कर कोई नया दावा करना उचित नहीं होगा, जब तक पूनावाला खुद ऐसा स्पष्ट रूप से न कहें।
राहुल गांधी पर भी रखी अपनी राय
पॉडकास्ट में पूनावाला से लोकसभा में विपक्ष के नेता राहुल गांधी को लेकर भी सवाल किया गया। पूनावाला ने माना कि 2009 से 2026 के बीच राहुल गांधी ने अपने अंदर कुछ बदलाव किए हैं। हालांकि उनके मुताबिक ये बदलाव उतने नहीं हैं जितने होने चाहिए थे।
उन्होंने राहुल गांधी की राजनीतिक शैली और निरंतरता को लेकर भी सवाल उठाए। पूनावाला ने कहा कि राहुल गांधी को कई बार ऐसा लगता है कि उन्हें सभी विषयों की जानकारी है।
यानी भाजपा छोड़ने के बाद भी पूनावाला कांग्रेस और राहुल गांधी पर अपने पुराने आलोचनात्मक रुख से पूरी तरह पीछे हटते नजर नहीं आए।
भाजपा छोड़ने के बाद बदलेगा राजनीतिक रास्ता?
शहजाद पूनावाला के इस्तीफे के बाद उनके अगले राजनीतिक कदम को लेकर लगातार अटकलें लगती रही हैं। कांग्रेस में जाने की संभावनाओं पर भी चर्चा हुई, लेकिन उन्होंने पहले ही ऐसे कयासों से दूरी बनाई है। अगस्त में सामने आए उनके इंटरव्यू में उन्होंने कांग्रेस में वापसी की संभावना को खारिज किया था।
फिलहाल उनका ताजा पॉडकास्ट इसलिए ज्यादा चर्चा में है क्योंकि इसमें उन्होंने भाजपा छोड़ने के बाद भी पार्टी के कई पहलुओं की तारीफ की, जबकि कुछ मामलों में उसकी कमियां भी गिनाईं।
सबसे अहम बात प्रधानमंत्री मोदी से 'इस्तीफा मांगने' वाली टिप्पणी को लेकर है। सोशल मीडिया या हेडलाइन में इसे सीधे मोदी के खिलाफ बगावत के तौर पर पेश करने से गलत अर्थ निकल सकता है। उपलब्ध रिपोर्ट के मुताबिक पूनावाला ने मोदी को 'बुरा तानाशाह' बताने और इस्तीफे वाली बात **व्यंग्य में** कही थी। उनका तर्क उल्टा यह था कि मोदी ने उन कदमों को नहीं उठाया जिन्हें वह पूर्ववर्ती सरकारों के कथित दमनकारी फैसलों के उदाहरण के तौर पर गिना रहे थे।
ऐसे में शहजाद पूनावाला भाजपा से अलग जरूर हो चुके हैं, लेकिन इस बातचीत से यह संकेत नहीं मिलता कि उन्होंने अपनी पूरी पुरानी राजनीतिक लाइन बदल दी है। पार्टी पर सवाल उठाने के साथ वह कई मुद्दों पर भाजपा और प्रधानमंत्री मोदी का बचाव भी करते दिखाई दिए।
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