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दिल्ली में विरोध प्रदर्शन पर सियासी घमासान

Ratna Netam
10 Oct 2026 10:03 PM IST
दिल्ली में विरोध प्रदर्शन पर सियासी घमासान
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नई दिल्ली। राष्ट्रीय राजधानी दिल्ली में विपक्षी दलों के विरोध प्रदर्शन को लेकर राजनीतिक बयानबाजी तेज हो गई है। राजस्थान के पूर्व मुख्यमंत्री और कांग्रेस के वरिष्ठ नेता अशोक गहलोत ने शनिवार को भारतीय जनता पार्टी के राष्ट्रीय अध्यक्ष नितिन नवीन की टिप्पणी की आलोचना की। उन्होंने नवीन की भाषा पर सवाल उठाते हुए भाजपा पर जनता, विपक्षी नेताओं और युवाओं को धमकाने का आरोप लगाया। गहलोत ने कहा कि लोकतांत्रिक व्यवस्था में जनता और विपक्ष की ओर से उठाए जा रहे सवालों का जवाब दिया जाना चाहिए। उन्होंने मतदाता सूची से कथित तौर पर 13.30 करोड़ वोट हटाए जाने का मुद्दा भी उठाया और इस संबंध में प्रतिक्रिया नहीं मिलने पर सवाल खड़े किए।अशोक गहलोत ने दिल्ली में चल रहे विपक्षी दलों के विरोध प्रदर्शन के संदर्भ में नितिन नवीन की टिप्पणी पर नाराजगी व्यक्त की। उन्होंने कहा कि राजनीतिक दलों के बीच मतभेद हो सकते हैं, लेकिन सार्वजनिक जीवन में इस्तेमाल की जाने वाली भाषा पर भी ध्यान दिया जाना चाहिए।गहलोत ने भाजपा नेतृत्व से सवाल करते हुए कहा कि जनता, विपक्षी नेताओं और युवाओं के प्रति इस तरह की भाषा का इस्तेमाल उचित नहीं है। उन्होंने नितिन नवीन की टिप्पणी की निंदा करते हुए कहा कि राजनीतिक सवालों का जवाब धमकी भरी भाषा से नहीं दिया जाना चाहिए।
नितिन नवीन की भाषा पर अशोक गहलोत ने उठाए सवाल
कांग्रेस नेता अशोक गहलोत ने कहा, "क्या नितिन नवीन की यह भाषा उचित है? क्या जनता, विपक्ष और युवाओं को धमकाना सही है? मैं नितिन नवीन से यह सवाल पूछना चाहता हूं। मैं इसकी निंदा करता हूं।"गहलोत के इस बयान में भाजपा अध्यक्ष की टिप्पणी को लेकर स्पष्ट असहमति दिखाई दी। उन्होंने कहा कि विपक्षी दलों की ओर से उठाए जा रहे मुद्दों पर राजनीतिक नेतृत्व को जवाब देना चाहिए।पूर्व मुख्यमंत्री ने अपनी प्रतिक्रिया में जनता और युवाओं का विशेष रूप से उल्लेख किया। उन्होंने आरोप लगाया कि भाजपा की ओर से विपक्ष के साथ-साथ आम लोगों को भी धमकाने वाली भाषा का इस्तेमाल किया जा रहा है।हालांकि, उपलब्ध विवरण में नितिन नवीन की मूल टिप्पणी के पूरे शब्द शामिल नहीं हैं। इसलिए गहलोत की आलोचना को उनके राजनीतिक बयान के रूप में प्रस्तुत करना उचित है।
13.30 करोड़ वोट हटाए जाने के दावे पर मांगा जवाब
अशोक गहलोत ने मतदाता सूचियों से कथित तौर पर 13.30 करोड़ नाम हटाए जाने का मुद्दा भी उठाया। उन्होंने कहा कि इतनी बड़ी संख्या में मतदाताओं के नाम हटाए जाने को लेकर सवाल पूछे जा रहे हैं, लेकिन इनका संतोषजनक जवाब नहीं मिल रहा है।मतदाता सूचियों के विशेष गहन पुनरीक्षण (SIR) को लेकर देश में राजनीतिक विवाद जारी है। विपक्षी दलों का आरोप है कि इस प्रक्रिया में बड़ी संख्या में मतदाताओं के नाम हटाए गए हैं और इससे उनके मतदान के अधिकार प्रभावित हो सकते हैं।हालांकि, निर्वाचन आयोग ने पक्षपातपूर्ण तरीके से नाम हटाने के आरोपों को खारिज किया है। आयोग के अनुसार, संबंधित नाम अनुपस्थित, स्थायी रूप से स्थानांतरित, मृत और दोहरी प्रविष्टियों जैसी श्रेणियों में चिह्नित किए गए थे। आयोग ने पात्र मतदाताओं के नाम शामिल करने की प्रक्रिया भी बताई है।
विपक्ष के विरोध को लेकर भाजपा के आरोपों पर पलटवार
अशोक गहलोत ने भाजपा अध्यक्ष नितिन नवीन की उस टिप्पणी का भी विरोध किया, जिसमें उन्होंने विपक्षी दलों पर देश को अस्थिर करने की कोशिशों का आरोप लगाया था।नितिन नवीन ने दिल्ली के विरोध प्रदर्शनों को लेकर बाहरी ताकतों की भूमिका का आरोप लगाया था। वहीं, गहलोत ने सवाल उठाया कि सरकार के खिलाफ विरोध प्रदर्शन करना देश को अस्थिर करने की साजिश कैसे हो सकता है।गहलोत ने कहा कि लोकतंत्र में विपक्ष को सरकार और संवैधानिक संस्थाओं से सवाल पूछने का अधिकार है। उन्होंने भाजपा को उसके विपक्ष में रहने के दौर की याद दिलाते हुए कहा कि उस समय पार्टी स्वयं सड़कों पर उतरकर प्रदर्शन करती थी।
राहुल गांधी और विपक्षी नेताओं का किया समर्थन
पूर्व मुख्यमंत्री ने कांग्रेस नेता राहुल गांधी और अन्य विपक्षी नेताओं के विरोध प्रदर्शन का समर्थन किया। उन्होंने आरोप लगाया कि संसद में विपक्ष की आवाज को पर्याप्त अवसर नहीं दिया जा रहा है और जब विपक्षी नेता सड़क पर अपनी बात रखने का प्रयास करते हैं, तो उन्हें रोका जाता है।गहलोत ने दिल्ली में सुरक्षा प्रतिबंधों और प्रदर्शनकारियों के खिलाफ पुलिस कार्रवाई पर भी सवाल उठाए। उन्होंने कहा कि जनता के मुद्दों पर जवाब देने के बजाय विपक्ष के विरोध को गलत तरीके से प्रस्तुत किया जा रहा है।
दिल्ली में विरोध प्रदर्शन के दौरान सुरक्षा व्यवस्था कड़ी
शनिवार को दिल्ली में मुख्य चुनाव आयुक्त ज्ञानेश कुमार के खिलाफ आयोजित विरोध प्रदर्शन के दौरान पुलिस ने सुरक्षा के व्यापक इंतजाम किए। राजधानी के कई हिस्सों में बैरिकेडिंग की गई और प्रदर्शनकारियों को हिरासत में लिया गया।प्रदर्शनकारी मतदाता सूची पुनरीक्षण प्रक्रिया को लेकर सवाल उठा रहे थे और मुख्य चुनाव आयुक्त के इस्तीफे की मांग कर रहे थे। पुलिस ने सार्वजनिक सुरक्षा और कानून-व्यवस्था बनाए रखने को कार्रवाई का आधार बताया।
लोकतांत्रिक अधिकारों को लेकर उठाए सवाल
अशोक गहलोत ने कहा कि जनता, विपक्ष और युवाओं की ओर से उठाए जाने वाले सवालों का जवाब दिया जाना चाहिए। उन्होंने नितिन नवीन की टिप्पणी की आलोचना करते हुए इसे अनुचित बताया।भारतीय संविधान नागरिकों को अभिव्यक्ति की स्वतंत्रता और शांतिपूर्ण विरोध का अधिकार देता है। हालांकि, इन अधिकारों पर कानून के तहत उचित प्रतिबंध लगाए जा सकते हैं। किसी प्रदर्शन के दौरान पुलिस कार्रवाई की वैधता संबंधित परिस्थितियों और कानूनी प्रावधानों पर निर्भर करती है।गहलोत ने अपने बयान में आरोप लगाया कि भाजपा विपक्ष के सवालों का जवाब देने के बजाय उसके विरोध प्रदर्शनों को बदनाम करने का प्रयास कर रही है।
भाजपा और कांग्रेस के बीच बढ़ी राजनीतिक बयानबाजी
दिल्ली में विरोध प्रदर्शन और मतदाता सूची पुनरीक्षण को लेकर भाजपा तथा कांग्रेस के बीच राजनीतिक मतभेद सामने आए हैं। भाजपा नेतृत्व विपक्ष के विरोध प्रदर्शनों की आलोचना कर रहा है, जबकि कांग्रेस निर्वाचन आयोग की कार्यप्रणाली और मतदाताओं के अधिकारों को लेकर सवाल उठा रही है।अशोक गहलोत ने शनिवार को भाजपा अध्यक्ष नितिन नवीन की भाषा पर आपत्ति जताते हुए कहा कि राजनीतिक असहमति के बीच जनता और विपक्षी नेताओं के प्रति सम्मानजनक व्यवहार होना चाहिए।उन्होंने कथित तौर पर 13.30 करोड़ मतदाताओं के नाम हटाए जाने के मुद्दे पर भी जवाब मांगा। गहलोत ने कहा कि लोकतंत्र में सवाल पूछना और शांतिपूर्ण विरोध करना विपक्ष का अधिकार है।शनिवार को दिए गए उनके बयान ने दिल्ली में जारी विरोध प्रदर्शनों के बीच भाजपा और कांग्रेस के राजनीतिक मतभेदों को फिर सामने ला दिया है। गहलोत ने नितिन नवीन की टिप्पणी की निंदा करते हुए जनता, युवाओं और विपक्षी नेताओं को कथित तौर पर धमकाने के आरोपों पर भाजपा से जवाब मांगा।
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