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Delhi दिल्ली छात्रों की सुरक्षा से जुड़ी चिंताओं को दूर करने और पुलिस की पहुंच को बेहतर बनाने के लिए, दिल्ली पुलिस ने सभी स्टेशन हाउस ऑफिसर (SHO) और असिस्टेंट कमिश्नर ऑफ़ पुलिस (ACP) को निर्देश दिया है कि वे कॉलेज के छात्रों, खासकर पेइंग गेस्ट (PG) सुविधाओं, किराए के मकानों और छात्रों के लिए बने अन्य आवासों में रहने वालों से नियमित रूप से बातचीत करें। यह कदम उपराज्यपाल (L-G) तरनजीत सिंह संधू के निर्देशों के बाद उठाया गया है। दिल्ली पुलिस के अधिकारियों के अनुसार, यह आदेश छात्रों के साथ सक्रिय जुड़ाव सुनिश्चित करने और उनकी सुरक्षा से जुड़े मुद्दों का तुरंत समाधान करने के लिए जारी किया गया है। जिन इलाकों में कॉलेज, यूनिवर्सिटी, PG और छात्रों के लिए अन्य आवास बड़ी संख्या में हैं, वहां के पुलिस अधिकारियों को विशेष रूप से तुरंत यह काम शुरू करने के लिए कहा गया है।
बातचीत के दौरान, SHO और ACP छात्रों की बातें सुनेंगे और उनकी सुरक्षा से जुड़ी चिंताओं की पहचान करेंगे। साथ ही, वे अपराध, उत्पीड़न, महिलाओं की सुरक्षा, आवास और सुरक्षा की भावना को प्रभावित करने वाले अन्य कारकों से जुड़े स्थानीय मुद्दों का भी आकलन करेंगे। अधिकारियों को निर्देश दिया गया है कि वे स्थानीय पुलिस के अधिकार क्षेत्र में आने वाले मामलों पर तुरंत सुधारात्मक और निवारक कदम उठाएं। जिन मामलों में नागरिक एजेंसियों या अन्य विभागों के हस्तक्षेप की आवश्यकता होगी, उनमें उन्हें संबंधित अधिकारियों के साथ समन्वय करने के लिए कहा गया है।
दिल्ली पुलिस के अधिकारियों ने कहा कि इस पहल का उद्देश्य छात्रों और स्थानीय पुलिस के बीच बातचीत का एक सीधा जरिया बनाना और यह सुनिश्चित करना है कि छात्र जरूरत पड़ने पर पुलिस की मदद लेने में आत्मविश्वास महसूस करें। आदेश के अनुसार, "यह काम उद्देश्यपूर्ण और तत्परता के साथ किया जाना चाहिए, जिसमें स्थानीय पुलिस और छात्र समुदाय के बीच सीधा संवाद स्थापित करने और पुलिस की मदद की उपलब्धता और पहुंच के प्रति अधिक विश्वास पैदा करने पर जोर दिया जाए।"
पुलिस को 20 सितंबर तक 'एक्शन टेकन रिपोर्ट' (ATR) सौंपने का भी निर्देश दिया गया है, जिसमें इस पहल के तहत की गई कार्रवाई का विवरण हो। उपराज्यपाल ने आगे निर्देश दिया है कि इस पहल का आधिकारिक सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म और अन्य उपयुक्त माध्यमों से उचित प्रचार-प्रसार किया जाए, ताकि कॉलेज के छात्रों और PG व किराए के मकानों में रहने वाले युवाओं तक पुलिस की पहुंच बढ़ाई जा सके। हालांकि, आदेश में इस बात पर जोर दिया गया है कि इस तरह के प्रचार-प्रसार में केवल दिखावे के बजाय जमीनी स्तर पर वास्तविक जुड़ाव और सार्थक फॉलो-अप दिखना चाहिए।
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