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New Delhi नई दिल्ली : प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने केंद्र सरकार के विभिन्न मंत्रालयों और विभागों के बीच समन्वय को और मजबूत करने पर जोर दिया है। उन्होंने अधिकारियों से कहा कि वे अलग-अलग काम करने के बजाय ‘पूरी सरकार’ के दृष्टिकोण को अपनाएं, ताकि नीतियों और योजनाओं का प्रभाव अधिक व्यापक और प्रभावी हो सके।
यह निर्देश मंगलवार को नई दिल्ली स्थित सेवा तीर्थ में आयोजित एक उच्चस्तरीय समीक्षा बैठक के दौरान दिया गया। इस बैठक में केंद्र सरकार के विभिन्न विभागों के लगभग 80 सचिव शामिल हुए। बैठक का उद्देश्य सरकार के सुधार एजेंडे, योजनाओं के क्रियान्वयन और भविष्य की रणनीतियों की समीक्षा करना था।
प्रधानमंत्री ने बैठक के दौरान स्पष्ट किया कि सभी सरकारी परियोजनाएं समय पर पूरी होनी चाहिए और उनका लाभ सीधे और प्रभावी तरीके से जनता तक पहुंचना चाहिए। उन्होंने कहा कि योजनाओं का असली उद्देश्य तभी पूरा होगा जब उनका परिणाम जमीनी स्तर पर दिखाई देगा।
सूत्रों के अनुसार, इस महत्वपूर्ण बैठक का संचालन केंद्रीय कैबिनेट सचिव टी.वी. सोमनाथन ने किया। बैठक में विभिन्न विभागों के सचिवों ने अपने-अपने मंत्रालयों की प्रगति, चल रही पहलों, सुधार के उपायों और आगामी योजनाओं को लेकर विस्तृत प्रस्तुतियां दीं।
प्रधानमंत्री मोदी ने इस अवसर पर प्रशासनिक सुधारों और नीतिगत क्रियान्वयन को और अधिक प्रभावी बनाने पर भी जोर दिया। उन्होंने कहा कि सरकार की प्राथमिकता यह होनी चाहिए कि योजनाओं का लाभ अंतिम व्यक्ति तक बिना किसी देरी और बाधा के पहुंचे।
बैठक में यह भी चर्चा हुई कि विभिन्न मंत्रालयों के बीच बेहतर समन्वय से न केवल कार्य की गति बढ़ेगी, बल्कि संसाधनों का अधिक प्रभावी उपयोग भी संभव होगा। प्रधानमंत्री ने अधिकारियों से कहा कि एकीकृत दृष्टिकोण अपनाने से शासन प्रणाली और अधिक पारदर्शी और परिणामोन्मुखी बनेगी।
अधिकारियों को निर्देश दिया गया कि वे अपने-अपने विभागों में नवाचार और सुधार की दिशा में लगातार काम करें और तकनीक के उपयोग को बढ़ावा दें, ताकि सरकारी योजनाओं का कार्यान्वयन अधिक सरल और तेज हो सके।
इस बैठक को केंद्र सरकार के प्रशासनिक ढांचे में सुधार और नीति क्रियान्वयन को गति देने की दिशा में एक महत्वपूर्ण कदम माना जा रहा है। विशेषज्ञों का मानना है कि इस तरह की समीक्षा बैठकों से नीतियों के प्रभावी क्रियान्वयन में मदद मिलती है और शासन व्यवस्था अधिक सशक्त बनती है।
कुल मिलाकर, प्रधानमंत्री मोदी का यह संदेश स्पष्ट है कि सरकार को अलग-अलग इकाइयों के रूप में नहीं, बल्कि एक संयुक्त प्रणाली के रूप में काम करना चाहिए, जिससे देश के विकास कार्यों को नई गति मिल सके।





