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रावण दहन के बाद पीएम मोदी का संदेश आत्मनिर्भर भारत का संकल्प दोहराया
Ratna Netam
20 Oct 2026 7:49 PM IST

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नई दिल्ली। प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने मंगलवार को राष्ट्रीय राजधानी दिल्ली के आईपी एक्सटेंशन स्थित डीडीए उत्सव ग्राउंड में आयोजित विजयादशमी समारोह में हिस्सा लिया। इस अवसर पर उन्होंने रावण दहन की पारंपरिक रस्म में भाग लिया और देशवासियों को विजयादशमी की शुभकामनाएं दीं। प्रधानमंत्री ने अपने संबोधन में भगवान श्रीराम के आदर्शों, रामराज्य की अवधारणा और आत्मनिर्भर भारत के संकल्प पर विशेष जोर दिया। उन्होंने कहा कि रामराज्य ऐसी शासन व्यवस्था का प्रतीक है, जहां किसी के साथ भेदभाव नहीं होता और सभी नागरिकों को समान अवसर प्राप्त होते हैं।प्रधानमंत्री मोदी ने कहा कि विजयादशमी केवल एक धार्मिक त्योहार नहीं, बल्कि सत्य, न्याय और अच्छाई की विजय का संदेश देने वाला पर्व है। यह त्योहार हमें अन्याय, अत्याचार और बुराई के खिलाफ खड़े होने की प्रेरणा देता है। उन्होंने लोगों से भगवान श्रीराम के जीवन से प्रेरणा लेकर राष्ट्र निर्माण में योगदान देने का आह्वान किया।
रामराज्य में सभी को समान अवसर मिलने चाहिए
प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने अपने संबोधन में रामराज्य की अवधारणा को विस्तार से समझाया। उन्होंने कहा कि रामराज्य का अर्थ ऐसी व्यवस्था से है, जिसमें न्याय सर्वोपरि हो और समाज के प्रत्येक वर्ग को समान अधिकार तथा अवसर मिलें।उन्होंने कहा कि किसी भी शासन व्यवस्था का वास्तविक उद्देश्य केवल सत्ता का संचालन करना नहीं, बल्कि जनता का कल्याण सुनिश्चित करना होना चाहिए।प्रधानमंत्री ने गरीबों, वंचितों और जरूरतमंदों की सेवा को सर्वोच्च प्राथमिकता देने की बात कही। उन्होंने कहा कि भगवान श्रीराम का जीवन समाज में समानता, न्याय, कर्तव्य और सेवा की भावना को मजबूत करने की प्रेरणा देता है।
संकट कितना भी बड़ा हो, अपने सामर्थ्य पर भरोसा रखें
प्रधानमंत्री मोदी ने भगवान श्रीराम के जीवन से प्रेरणा लेने का आह्वान करते हुए कहा कि जीवन में कितनी भी बड़ी चुनौती सामने आए, हमें दूसरों के भरोसे नहीं बैठना चाहिए।उन्होंने कहा कि प्रत्येक व्यक्ति को अपनी क्षमताओं को पहचानना चाहिए और उपलब्ध संसाधनों पर विश्वास करते हुए समस्याओं का समाधान तलाशना चाहिएप्रधानमंत्री ने भगवान राम के लंका अभियान का उदाहरण देते हुए कहा कि समुद्र जैसी बड़ी बाधा भी उनके संकल्प को कमजोर नहीं कर सकी। उन्होंने सामूहिक शक्ति और जनभागीदारी के माध्यम से कठिन लक्ष्य को संभव बनाया।मोदी ने कहा कि यही संदेश आज के भारत के लिए भी महत्वपूर्ण है। यदि देशवासी संकल्प, परिश्रम और एकजुटता के साथ आगे बढ़ेंगे, तो बड़ी से बड़ी चुनौती का समाधान निकाला जा सकता है।
विकसित भारत और आत्मनिर्भर भारत का संकल्प
प्रधानमंत्री ने कहा कि देश ने अपने सामने विकसित भारत और आत्मनिर्भर भारत का लक्ष्य रखा है। इन लक्ष्यों को हासिल करने के लिए प्रत्येक नागरिक की भागीदारी आवश्यक है।उन्होंने कहा कि भारत को अपनी क्षमताओं, संसाधनों और सामूहिक शक्ति पर विश्वास करते हुए आगे बढ़ना होगा।प्रधानमंत्री के अनुसार, आत्मनिर्भरता का अर्थ केवल आर्थिक विकास तक सीमित नहीं है, बल्कि हर क्षेत्र में अपनी क्षमता बढ़ाना और चुनौतियों का सामना करने के लिए तैयार रहना भी है।
देशवासियों को दी विजयादशमी की शुभकामनाएं
इससे पहले प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने सोशल मीडिया मंच एक्स पर देशवासियों को विजयादशमी की शुभकामनाएं दी थीं।उन्होंने कामना की कि विजय का यह पर्व सभी के संकल्पों को नई शक्ति प्रदान करे और प्रत्येक व्यक्ति के जीवन में सुख, समृद्धि तथा सफलता लेकर आए।प्रधानमंत्री ने विजयादशमी को आस्था, उल्लास और सकारात्मक ऊर्जा का पर्व बताया। उन्होंने कहा कि यह त्योहार समाज को सत्य और धर्म के मार्ग पर आगे बढ़ने की प्रेरणा देता है।
राष्ट्रपति द्रौपदी मुर्मू भी दशहरा समारोह में शामिल
दिल्ली के द्वारका सेक्टर-10 में आयोजित एक अन्य दशहरा समारोह में राष्ट्रपति द्रौपदी मुर्मू ने भाग लिया। इस कार्यक्रम में दिल्ली की मुख्यमंत्री रेखा गुप्ता भी उपस्थित रहीं।मुख्यमंत्री रेखा गुप्ता ने अपने संबोधन में लोगों से भगवान श्रीराम के आदर्शों को जीवन में अपनाने की अपील की।उन्होंने कहा कि समाज से भ्रष्टाचार, नशाखोरी, अपराध, भेदभाव और महिलाओं के खिलाफ अत्याचार जैसी बुराइयों को समाप्त करने के लिए सामूहिक प्रयास जरूरी हैं।द्वारका में आयोजित कार्यक्रम के दौरान राष्ट्रपति द्रौपदी मुर्मू ने रावण दहन की परंपरा में भी भाग लिया।
बुराई पर अच्छाई की जीत का पर्व
विजयादशमी का त्योहार देशभर में उत्साह और श्रद्धा के साथ मनाया गया। दिल्ली सहित विभिन्न शहरों में रामलीला और रावण दहन के कार्यक्रम आयोजित किए गए।प्रधानमंत्री मोदी ने अपने संबोधन के माध्यम से संदेश दिया कि भगवान श्रीराम के आदर्श केवल धार्मिक आस्था तक सीमित नहीं हैं, बल्कि सामाजिक न्याय, समानता, कर्तव्य और जनकल्याण के लिए भी प्रेरणादायक हैं।उन्होंने देशवासियों से विकसित और आत्मनिर्भर भारत के निर्माण में अपनी सक्रिय भूमिका निभाने का आह्वान किया।
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