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इंडिया मोबाइल कांग्रेस में PM मोदी का बड़ा ऐलान, अब भारत बनेगा टेक्नोलॉजी का निर्माता

नई दिल्ली। प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने गुरुवार, 8 अक्टूबर 2026 को इंडिया मोबाइल कांग्रेस के 10वें संस्करण को संबोधित करते हुए भारत के दूरसंचार और प्रौद्योगिकी क्षेत्र के भविष्य को लेकर बड़ा संदेश दिया। उन्होंने कहा कि भारत अब केवल विदेशी तकनीकों और उत्पादों का इस्तेमाल करने वाला देश नहीं रहेगा, बल्कि खुद नई तकनीक, डिजाइन, उत्पाद और बौद्धिक संपदा विकसित करने की दिशा में तेजी से आगे बढ़ रहा है। प्रधानमंत्री ने इसे उपभोक्ता से निर्माता बनने की यात्रा बताया। उन्होंने कहा कि सरकार दूरसंचार क्षेत्र में देश की क्षमताओं को मजबूत करने के लिए लगातार सुधार कर रही है और नवाचार को प्रोत्साहन दे रही है। प्रधानमंत्री ने 5जी, 6जी, आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस, सेमीकंडक्टर और साइबर सुरक्षा जैसे क्षेत्रों में भारत की संभावनाओं का भी उल्लेख किया।
उपभोक्ता से निर्माता बनने की दिशा में भारत
प्रधानमंत्री मोदी ने कहा कि पिछले कुछ वर्षों में भारत ने तकनीक का उपयोग करने वाले देश से तकनीक विकसित करने वाले देश की ओर अपनी यात्रा शुरू की है।
उन्होंने कहा कि अब भारत ऐसे लक्ष्य की ओर बढ़ रहा है, जहां किसी उत्पाद का निर्माण ही नहीं, बल्कि उसका डिजाइन, तकनीक और बौद्धिक संपदा अधिकार भी देश के भीतर विकसित किए जाएंगे।
प्रधानमंत्री के अनुसार, किसी भी देश के तकनीकी विकास के लिए केवल उत्पादों का निर्माण पर्याप्त नहीं है। उसके पास अपनी शोध क्षमता, डिजाइन तैयार करने की विशेषज्ञता और नई तकनीक विकसित करने की व्यवस्था भी होनी चाहिए।
उन्होंने भारतीय उद्योगों, स्टार्टअप और युवा उद्यमियों से इस दिशा में आगे बढ़ने का आह्वान किया।
दूरसंचार क्षेत्र में सुधारों पर दिया जोर
प्रधानमंत्री ने कहा कि सरकार भारत के दूरसंचार क्षेत्र को मजबूत बनाने के लिए लगातार नीतिगत सुधार कर रही है।
उनके अनुसार, देश में इंटरनेट कनेक्टिविटी बढ़ाने, डिजिटल सेवाओं का विस्तार करने और नई तकनीकों के विकास को प्रोत्साहित करने के लिए कई कदम उठाए गए हैं।
मोदी ने कहा कि दूरसंचार अब केवल बातचीत करने का माध्यम नहीं रह गया है। यह शिक्षा, स्वास्थ्य, उद्योग, व्यापार और सरकारी सेवाओं की उपलब्धता के लिए महत्वपूर्ण बुनियादी ढांचा बन चुका है।
उन्होंने इस बात पर जोर दिया कि भविष्य में डिजिटल कनेक्टिविटी की भूमिका और अधिक बढ़ेगी। इसलिए भारत को तकनीकी रूप से आत्मनिर्भर बनाने की दिशा में निरंतर प्रयास आवश्यक हैं।
मोबाइल अब केवल बातचीत का साधन नहीं
प्रधानमंत्री मोदी ने अपने संबोधन में मोबाइल फोन के बदलते उपयोग का भी उल्लेख किया।
उन्होंने कहा कि पहले मोबाइल फोन मुख्य रूप से बातचीत और संदेश भेजने के लिए इस्तेमाल किया जाता था। लेकिन अब मोबाइल के माध्यम से पढ़ाई, कारोबार, बैंकिंग, मनोरंजन और सरकारी सेवाओं तक पहुंच संभव हो गई है।
प्रधानमंत्री के अनुसार, तेज इंटरनेट ने गेमिंग, डिजिटल सामग्री निर्माण और ऑनलाइन उद्यमिता के लिए नए अवसर पैदा किए हैं।
उन्होंने कहा कि 5जी के विस्तार के बाद इंटरनेट की गति में महत्वपूर्ण सुधार हुआ है। इससे डिजिटल सेवाओं के इस्तेमाल और नई तकनीकों को अपनाने की संभावनाएं बढ़ी हैं।
प्रधानमंत्री ने डिजिटल सुविधाओं से नागरिकों के समय और खर्च की बचत होने का भी उल्लेख किया।
5जी और 6जी तकनीक पर विशेष ध्यान
इंडिया मोबाइल कांग्रेस 2026 में 5जी और 6जी तकनीक प्रमुख चर्चा के विषय हैं।
कार्यक्रम में अगली पीढ़ी के संचार नेटवर्क, आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस आधारित प्रणालियों और आधुनिक डिजिटल बुनियादी ढांचे से संबंधित तकनीकों का प्रदर्शन किया जा रहा है।
भारत में 5जी सेवाओं के विस्तार के साथ अब 6जी तकनीक से जुड़े अनुसंधान और विकास पर भी ध्यान दिया जा रहा है।
प्रधानमंत्री ने कहा कि भारत को नई तकनीकों के विकास में सक्रिय भूमिका निभानी चाहिए।
उन्होंने भारतीय कंपनियों और अनुसंधान संस्थानों को केवल तकनीक अपनाने के बजाय उसे विकसित करने पर जोर देने के लिए प्रेरित किया।
सेमीकंडक्टर और इलेक्ट्रॉनिक्स निर्माण को बढ़ावा
प्रधानमंत्री मोदी ने भारत के सेमीकंडक्टर और इलेक्ट्रॉनिक्स निर्माण क्षेत्र में हो रही प्रगति का भी उल्लेख किया।
उन्होंने कहा कि इलेक्ट्रॉनिक्स और आधुनिक तकनीकी उत्पादों के निर्माण में देश की क्षमताओं को मजबूत किया जा रहा है।
सेमीकंडक्टर आधुनिक डिजिटल उपकरणों का महत्वपूर्ण हिस्सा हैं। इनका इस्तेमाल मोबाइल फोन, कंप्यूटर, संचार उपकरणों और अन्य इलेक्ट्रॉनिक प्रणालियों में होता है।
भारत सरकार इस क्षेत्र में घरेलू उत्पादन और अनुसंधान को प्रोत्साहित करने के लिए विभिन्न योजनाओं पर काम कर रही है।
प्रधानमंत्री ने कहा कि भविष्य में भारत को केवल इलेक्ट्रॉनिक उपकरणों की असेंबली तक सीमित नहीं रहना चाहिए, बल्कि उनके डिजाइन और मूल तकनीक के विकास में भी आगे बढ़ना होगा।
साइबर सुरक्षा पर वैश्विक सहयोग की जरूरत
प्रधानमंत्री ने डिजिटल तकनीकों के विस्तार के साथ साइबर सुरक्षा की बढ़ती आवश्यकता पर भी ध्यान आकर्षित किया।
उन्होंने कहा कि डिजिटल सेवाओं का उपयोग बढ़ने से डेटा की सुरक्षा और ऑनलाइन प्रणालियों पर भरोसा बनाए रखना जरूरी है।
मोदी ने साइबर सुरक्षा के लिए मजबूत वैश्विक व्यवस्था विकसित करने की आवश्यकता बताई।
उनके अनुसार, तकनीकी विकास के साथ ऐसी प्रणालियां भी जरूरी हैं, जो नागरिकों और संस्थानों की डिजिटल जानकारी सुरक्षित रख सकें।
इंडिया मोबाइल कांग्रेस में साइबर सुरक्षा, क्वांटम संचार और सुरक्षित डिजिटल नेटवर्क से संबंधित विषयों पर भी चर्चा की जा रही है।
डिजिटल व्यवस्था से सरकारी सेवाओं में बदलाव
प्रधानमंत्री मोदी ने कहा कि डिजिटल तकनीक ने सरकारी सेवाओं की उपलब्धता और प्रशासनिक प्रक्रियाओं में महत्वपूर्ण बदलाव किए हैं।
उन्होंने प्रत्यक्ष लाभ अंतरण यानी डीबीटी का उदाहरण देते हुए कहा कि डिजिटल व्यवस्था से सरकारी योजनाओं की धनराशि सीधे लाभार्थियों तक पहुंचाई जा रही है।
प्रधानमंत्री ने दावा किया कि डीबीटी और डिजिटल पारदर्शिता के कारण करीब पांच लाख करोड़ रुपये की लीकेज रोकने में मदद मिली है।
उन्होंने कहा कि तकनीक का सबसे महत्वपूर्ण उद्देश्य आम नागरिकों का जीवन आसान बनाना होना चाहिए।
मोदी के अनुसार, डिजिटल सेवाओं ने कई कार्यों में लंबी यात्राओं, प्रतीक्षा और अतिरिक्त खर्च की आवश्यकता कम की है।
इंडिया मोबाइल कांग्रेस में 100 से अधिक देशों की भागीदारी
नई दिल्ली के यशोभूमि में आयोजित इंडिया मोबाइल कांग्रेस का 10वां संस्करण 7 से 10 अक्टूबर तक आयोजित किया जा रहा है।
इस वर्ष कार्यक्रम की थीम 'स्केल विदाउट बाउंड्रीज' रखी गई है।
इसका आयोजन दूरसंचार विभाग और सेल्युलर ऑपरेटर्स एसोसिएशन ऑफ इंडिया की ओर से संयुक्त रूप से किया जा रहा है।
कार्यक्रम में 100 से अधिक देशों से प्रतिभागियों के शामिल होने की उम्मीद है। इसके अलावा 500 से अधिक साझेदार और प्रदर्शक, 600 से अधिक स्टार्टअप तथा 900 से अधिक विशेषज्ञों की भागीदारी प्रस्तावित है।
आयोजन में 2,000 से अधिक तकनीकी उपयोगों का प्रदर्शन और 120 से अधिक सत्र निर्धारित किए गए हैं।
चार प्रमुख स्तंभों पर आधारित आयोजन
इंडिया मोबाइल कांग्रेस 2026 को चार प्रमुख स्तंभों के आधार पर आयोजित किया गया है।
इनमें सृष्टि, संवर्धन, सशक्त और सुरक्षा शामिल हैं।
सृष्टि के तहत भविष्य की तकनीकों और नवाचार पर ध्यान दिया जा रहा है। संवर्धन में तकनीक आधारित आर्थिक विकास, सशक्त में डिजिटल अवसरों के विस्तार और सुरक्षा में सुरक्षित तथा विश्वसनीय डिजिटल व्यवस्था को प्राथमिकता दी गई है।
इस बार आयोजन में स्मार्ट मोबिलिटी, औद्योगिक रोबोटिक्स और परिवहन तकनीक जैसे नए क्षेत्रों को भी शामिल किया गया है।
भारत में ही विकसित होगी भविष्य की तकनीक
प्रधानमंत्री मोदी ने अपने संबोधन में दोहराया कि भारत के लिए तकनीकी आत्मनिर्भरता महत्वपूर्ण लक्ष्य है।
उन्होंने कहा कि देश के युवाओं, वैज्ञानिकों, इंजीनियरों और उद्यमियों के पास नई तकनीक विकसित करने की क्षमता है।
सरकार का उद्देश्य ऐसे वातावरण को मजबूत बनाना है, जिसमें भारतीय कंपनियां अपने उत्पादों के साथ उनका डिजाइन और बौद्धिक संपदा भी स्वयं विकसित कर सकें।
प्रधानमंत्री का संदेश था कि आने वाले वर्षों में भारत को वैश्विक तकनीकी क्षेत्र में अपनी भूमिका बढ़ानी होगी।
उन्होंने कहा कि भारत की अगली तकनीकी यात्रा केवल उत्पादों का उपभोग करने तक सीमित नहीं होगी, बल्कि नए उत्पाद, डिजाइन और तकनीक विकसित करने की दिशा में आगे बढ़ेगी।





