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पीएम मोदी गुरुवार को ‘खेलो इंडिया डायलॉग’ में युवाओं से करेंगे संवाद

Kavita2
26 Aug 2026 3:10 PM IST
पीएम मोदी गुरुवार को ‘खेलो इंडिया डायलॉग’ में युवाओं से करेंगे संवाद
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नई दिल्ली। प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी गुरुवार को ‘खेलो इंडिया डायलॉग’ के दौरान देशभर के युवाओं से संवाद करेंगे। इस कार्यक्रम का उद्देश्य युवाओं को भारत की खेल यात्रा से सीधे जोड़ना, उनकी आकांक्षाओं और अपेक्षाओं को समझना तथा युवा नेतृत्व वाले मजबूत ‘विकसित भारत’ के निर्माण के लिए उनके सुझाव हासिल करना है। प्रधानमंत्री इस दौरान वर्चुअल माध्यम से युवाओं को संबोधित करेंगे।

प्रधानमंत्री कार्यालय की ओर से जारी जानकारी के अनुसार, ‘खेलो इंडिया डायलॉग’ में बातचीत का केंद्र भारत की खेल महत्वाकांक्षाओं और युवाओं की भूमिका पर रहेगा। कार्यक्रम के दौरान खेल, ओलंपिक की उम्मीदों, युवा नेतृत्व, विकसित भारत और ‘नशा मुक्त युवा’ समेत पांच प्रमुख विषयों पर चर्चा होगी।

खेलों में युवाओं की भागीदारी बढ़ाने पर जोर

कार्यक्रम का एक प्रमुख उद्देश्य देश के खेल इकोसिस्टम में युवाओं की भागीदारी बढ़ाना है। सरकार का मानना है कि भारत को खेलों में वैश्विक स्तर पर मजबूत स्थिति हासिल करने के लिए केवल कुछ चुनिंदा खिलाड़ियों पर निर्भर रहने के बजाय व्यापक स्तर पर प्रतिभाओं को सामने लाना होगा।

इसके लिए स्कूलों, कॉलेजों और स्थानीय स्तर पर खेल प्रतिभाओं की पहचान, उन्हें उचित प्रशिक्षण और बेहतर सुविधाएं उपलब्ध कराने पर जोर दिया जा रहा है। ‘खेलो इंडिया डायलॉग’ को इसी व्यापक सोच के तहत युवाओं के साथ सीधे संवाद का माध्यम बनाया गया है।

प्रधानमंत्री के संवाद में युवाओं से यह जानने की कोशिश भी होगी कि वे भारत के खेल क्षेत्र में किस तरह के बदलाव चाहते हैं और खिलाड़ियों को बेहतर अवसर देने के लिए क्या कदम उठाए जा सकते हैं।

2036 ओलंपिक के लिए प्रतिभा तैयार करने की रणनीति

भारत की दीर्घकालिक खेल योजनाओं में 2036 ओलंपिक को महत्वपूर्ण लक्ष्य के तौर पर देखा जा रहा है। इसके लिए प्रतिभाओं की पहचान कम उम्र में करने और उन्हें लंबे समय तक व्यवस्थित तरीके से तैयार करने पर जोर दिया जा रहा है।

‘खेलो इंडिया डायलॉग’ में भी इस दिशा में चर्चा होने की उम्मीद है। सरकार का लक्ष्य ऐसा खेल तंत्र विकसित करना है, जिसमें प्रतिभाशाली खिलाड़ियों को वैज्ञानिक प्रशिक्षण, आधुनिक कोचिंग और बेहतर खेल सुविधाएं मिल सकें।

टैलेंट की पहचान को अधिक वैज्ञानिक और पारदर्शी बनाने के साथ-साथ खिलाड़ियों के चयन की प्रक्रिया को भी बेहतर करने पर जोर दिया जाएगा। इसके अलावा खिलाड़ियों के दीर्घकालिक विकास के लिए ऐसी व्यवस्था विकसित करने की जरूरत पर भी चर्चा होगी, जिससे प्रतिभाएं शुरुआती स्तर से लेकर अंतरराष्ट्रीय मंच तक लगातार आगे बढ़ सकें।

कोचिंग और खेल इकोसिस्टम में सुधार

भारत में खेल प्रतिभाओं की कमी नहीं है, लेकिन कई बार बेहतर प्रशिक्षण और सुविधाओं के अभाव में प्रतिभाएं आगे नहीं बढ़ पातीं। ऐसे में कोचिंग व्यवस्था में सुधार को महत्वपूर्ण माना जा रहा है।

‘खेलो इंडिया डायलॉग’ के माध्यम से युवाओं के अनुभवों और सुझावों को समझने की कोशिश की जाएगी। खिलाड़ियों और युवा खेल प्रतिभाओं की जरूरतों के आधार पर प्रशिक्षण व्यवस्था को अधिक प्रभावी बनाने, आधुनिक तकनीक का इस्तेमाल बढ़ाने और प्रशिक्षकों की क्षमता को मजबूत करने पर विचार किया जा सकता है।

खेलों में वैज्ञानिक दृष्टिकोण को बढ़ावा देने का उद्देश्य खिलाड़ियों के प्रदर्शन को बेहतर करना भी है। फिटनेस, पोषण, चोट से बचाव और रिकवरी जैसे पहलुओं को आधुनिक खेल प्रशिक्षण का महत्वपूर्ण हिस्सा माना जाता है।

सभी के लिए खेल का अवसर

कार्यक्रम में खेलों में अधिक से अधिक लोगों की भागीदारी सुनिश्चित करने का मुद्दा भी महत्वपूर्ण रहेगा। सरकार की कोशिश है कि खेल केवल पेशेवर खिलाड़ियों तक सीमित न रहें, बल्कि बच्चों और युवाओं के दैनिक जीवन का हिस्सा बनें।

ग्रामीण और छोटे शहरों में मौजूद प्रतिभाओं को भी समान अवसर देने की आवश्यकता पर जोर दिया जा रहा है। प्रतिभा पहचान की प्रक्रिया यदि व्यापक स्तर पर होती है तो देश के अलग-अलग हिस्सों से खिलाड़ियों को राष्ट्रीय और अंतरराष्ट्रीय स्तर पर पहुंचने का अवसर मिल सकता है।

युवा नेतृत्व और विकसित भारत

‘खेलो इंडिया डायलॉग’ का संबंध केवल खेलों से नहीं, बल्कि युवाओं की व्यापक भूमिका से भी जोड़ा गया है। प्रधानमंत्री का संवाद युवा नेतृत्व और ‘विकसित भारत’ के लक्ष्य पर भी केंद्रित रहेगा।

भारत की युवा आबादी को देश की आर्थिक, सामाजिक और तकनीकी प्रगति का महत्वपूर्ण आधार माना जाता है। ऐसे में युवाओं के विचारों और सुझावों को नीति निर्माण से जोड़ने पर जोर दिया जा रहा है।

कार्यक्रम के जरिए युवाओं को यह अवसर मिलेगा कि वे देश की खेल महत्वाकांक्षाओं के बारे में अपनी राय रखें और खेल व्यवस्था में सुधार को लेकर अपने सुझाव सामने रखें।

‘नशा मुक्त युवा’ पर भी चर्चा

प्रधानमंत्री के संवाद का एक महत्वपूर्ण विषय ‘नशा मुक्त युवा’ भी होगा। युवाओं को नशे से दूर रखने और स्वस्थ जीवनशैली की ओर प्रेरित करने का संदेश खेलों के माध्यम से भी दिया जा सकता है।

खेल गतिविधियों को युवाओं के लिए स्वस्थ और सकारात्मक विकल्प के रूप में बढ़ावा देने की दिशा में यह पहल महत्वपूर्ण मानी जा रही है। नियमित खेल और शारीरिक गतिविधियां युवाओं के शारीरिक स्वास्थ्य के साथ-साथ मानसिक मजबूती में भी योगदान दे सकती हैं।

युवाओं की आवाज को मिलेगा मंच

प्रधानमंत्री कार्यालय के अनुसार, कार्यक्रम का उद्देश्य युवाओं को देश की खेल यात्रा से जोड़ना और उनकी उम्मीदों को समझना है। इसके साथ ही यह सुनिश्चित करना भी है कि भारत के खेल इकोसिस्टम और युवाओं से जुड़े विषयों पर होने वाली चर्चा में युवाओं के विचारों को प्रमुख स्थान मिले।

युवाओं से संवाद के माध्यम से सरकार को जमीनी स्तर पर मौजूद चुनौतियों और अपेक्षाओं को समझने का अवसर मिलेगा। वहीं, युवाओं को भी देश की खेल नीति और भविष्य की योजनाओं से सीधे जुड़ने का मंच मिलेगा।

खेलों में बड़े लक्ष्य की ओर भारत

भारत पिछले कुछ वर्षों में खेलों के क्षेत्र में अपनी उपस्थिति मजबूत करने की कोशिश कर रहा है। अंतरराष्ट्रीय प्रतियोगिताओं में भारतीय खिलाड़ियों का प्रदर्शन बेहतर हुआ है और कई खेलों में नई प्रतिभाएं सामने आई हैं।

अब चुनौती इस प्रदर्शन को लगातार आगे बढ़ाने और बड़ी संख्या में खिलाड़ियों को विश्वस्तरीय स्तर तक पहुंचाने की है। 2036 ओलंपिक की तैयारियों के संदर्भ में प्रतिभा पहचान, प्रशिक्षण, कोचिंग और खेल विज्ञान को मजबूत करना महत्वपूर्ण होगा।

गुरुवार को होने वाला ‘खेलो इंडिया डायलॉग’ इसी व्यापक लक्ष्य के तहत युवाओं से सीधे संवाद का माध्यम बनेगा। प्रधानमंत्री के संबोधन में खेलों के साथ-साथ युवा नेतृत्व, स्वस्थ जीवनशैली और विकसित भारत के निर्माण में युवाओं की भूमिका पर भी जोर रहेगा।

इस कार्यक्रम से उम्मीद की जा रही है कि युवाओं के विचारों और सुझावों को भारत की भविष्य की खेल रणनीति से जोड़ने की दिशा में एक और कदम आगे बढ़ेगा।

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