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PM मोदी ने किया प्रोजेक्ट राइनो का ऐलान

Ratna Netam
22 Sept 2026 5:29 PM IST
PM मोदी ने किया प्रोजेक्ट राइनो का ऐलान
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नई दिल्ली। विश्व गैंडा दिवस के मौके पर प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने मंगलवार को देश में **'प्रोजेक्ट राइनो'** शुरू किए जाने की घोषणा की। इस नई संरक्षण पहल का उद्देश्य ग्रेटर वन-हॉर्न्ड राइनोसिरस यानी भारतीय एक सींग वाले गैंडे की सुरक्षा को मजबूत करना है। इसके तहत उन राज्यों को वित्तीय और तकनीकी सहायता दी जाएगी, जहां गैंडों की आबादी पाई जाती है। योजना में गैंडों की सुरक्षा के साथ उनके आवास प्रबंधन, आनुवंशिक स्वास्थ्य और आबादी की स्थिति के वैज्ञानिक आकलन पर ध्यान दिया जाएगा।विश्व गैंडा दिवस हर साल 22 सितंबर को मनाया जाता है। इसका उद्देश्य दुनिया में पाई जाने वाली गैंडों की प्रजातियों के संरक्षण के प्रति जागरूकता बढ़ाना और अवैध शिकार तथा आवास के नुकसान जैसी चुनौतियों की ओर ध्यान आकर्षित करना है।
पीएम मोदी ने सोशल मीडिया पर दी जानकारी
प्रधानमंत्री मोदी ने सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म X पर 'प्रोजेक्ट राइनो' की घोषणा करते हुए कहा कि देश में प्रजातियों के संरक्षण की दिशा में आगे बढ़ते हुए यह नई पहल शुरू की गई है।प्रधानमंत्री के अनुसार योजना के तहत गैंडों वाले राज्यों को संरक्षण से संबंधित गतिविधियों के लिए आर्थिक और तकनीकी सहयोग दिया जाएगा। इसमें गैंडों की सुरक्षा, उनके प्राकृतिक आवासों का बेहतर प्रबंधन, आनुवंशिक विविधता तथा आबादी की स्थिति समझने के लिए वैज्ञानिक प्रयास शामिल होंगे।उन्होंने वन्यजीवों की सुरक्षा में लगे वन कर्मियों और संरक्षणवादियों के प्रयासों की भी सराहना की।
एक सींग वाले गैंडे पर रहेगा फोकस
ग्रेटर वन-हॉर्न्ड राइनोसिरस भारत की प्रमुख वन्यजीव प्रजातियों में शामिल है। देश में इसकी सबसे बड़ी आबादी असम में पाई जाती है। इसके अलावा पश्चिम बंगाल और उत्तर प्रदेश में भी एक सींग वाले गैंडे मौजूद हैं।भारत सरकार की जून 2026 की एक आधिकारिक पृष्ठभूमि रिपोर्ट के मुताबिक देश में एक सींग वाले गैंडों की संख्या 1980 के दशक के करीब 1,500 से बढ़कर सितंबर 2024 तक 4,000 से अधिक हो चुकी थी। सरकार ने इस बढ़ोतरी को वन विभागों, स्थानीय समुदायों और वैज्ञानिक संरक्षण प्रयासों से जोड़ा है।नई पहल का उद्देश्य इस प्रगति को आगे बढ़ाना और अलग-अलग गैंडा आबादियों की दीर्घकालिक सुरक्षा को मजबूत करना है।
राज्यों को मिलेगी वित्तीय और तकनीकी मदद
'प्रोजेक्ट राइनो' की महत्वपूर्ण विशेषताओं में राज्यों को केंद्र से वित्तीय और तकनीकी सहायता देना शामिल है। इससे गैंडा क्षेत्रों में निगरानी, आवास सुधार, वैज्ञानिक अध्ययन और सुरक्षा व्यवस्था को मजबूत करने में मदद मिलने की उम्मीद है।गैंडों के संरक्षण में केवल अवैध शिकार को रोकना पर्याप्त नहीं होता। उनके लिए घास के मैदान, आर्द्रभूमि और पर्याप्त जल स्रोतों वाले सुरक्षित प्राकृतिक आवास की भी आवश्यकता होती है।बाढ़, जलवायु परिवर्तन, आक्रामक वनस्पतियां और मानव-वन्यजीव संघर्ष जैसे कारक भी संरक्षण के लिए चुनौती बन सकते हैं। इसलिए नई परियोजना में आवास प्रबंधन को प्रमुख स्थान दिया गया है।
जेनेटिक स्वास्थ्य पर भी रहेगा ध्यान
प्रोजेक्ट राइनो के तहत आनुवंशिक पहलुओं पर भी काम किया जाएगा। किसी वन्यजीव प्रजाति की संख्या बढ़ने के साथ उसकी आनुवंशिक विविधता बनाए रखना दीर्घकालिक संरक्षण के लिए महत्वपूर्ण होता है।अलग-अलग संरक्षित क्षेत्रों में छोटी और अलग-थलग आबादी होने से आनुवंशिक विविधता प्रभावित हो सकती है। ऐसे में वैज्ञानिक निगरानी और जरूरत के अनुसार स्थानांतरण जैसी रणनीतियां संरक्षण में भूमिका निभा सकती हैं।भारत की 2019 की **National Conservation Strategy for the Indian One-Horned Rhinoceros** में भी आबादी के विस्तार, आनुवंशिक सुरक्षा, आवासों के बीच संपर्क, स्थानांतरण और जलवायु के अनुरूप प्रबंधन को महत्वपूर्ण लक्ष्य बनाया गया था।
आबादी की होगी वैज्ञानिक निगरानी
गैंडों की सही संख्या और उनकी आबादी में हो रहे बदलाव को समझना संरक्षण नीति के लिए जरूरी है। प्रोजेक्ट राइनो के तहत आबादी की स्थिति का वैज्ञानिक आकलन भी महत्वपूर्ण हिस्सा होगा।इससे यह समझने में मदद मिल सकती है कि किस क्षेत्र में गैंडों की संख्या बढ़ रही है, कहां आबादी पर दबाव है और किन क्षेत्रों में आवास विस्तार या दूसरे संरक्षण उपायों की आवश्यकता है।वैज्ञानिक डेटा के आधार पर वन विभाग लंबी अवधि की रणनीति तैयार कर सकते हैं।
काजीरंगा संरक्षण का प्रमुख केंद्र
असम का काजीरंगा राष्ट्रीय उद्यान एक सींग वाले गैंडों के सबसे महत्वपूर्ण आवासों में शामिल है। सरकारी आंकड़ों के मुताबिक 2022 की गणना में काजीरंगा में **2,613 ग्रेटर वन-हॉर्न्ड राइनो** दर्ज किए गए थे। आधिकारिक रिपोर्ट में असम को वैश्विक एक सींग वाले गैंडे की आबादी का प्रमुख केंद्र बताया गया है।काजीरंगा में गैंडों की सुरक्षा के लिए पेट्रोलिंग, निगरानी, वन्यजीव अपराध नियंत्रण और स्थानीय समुदायों की भागीदारी जैसे कई उपाय वर्षों से अपनाए जाते रहे हैं।हालांकि मानसून के दौरान आने वाली बाढ़ यहां वन्यजीव प्रबंधन के लिए एक बड़ी चुनौती रहती है। ऐसे समय में गैंडे और अन्य वन्यजीव ऊंचे क्षेत्रों की ओर जाते हैं, जिससे उनकी सुरक्षा के लिए विशेष व्यवस्था की जरूरत पड़ती है।
पहले से लागू हैं कई संरक्षण योजनाएं
भारत में गैंडों के संरक्षण का काम नई परियोजना से पहले भी कई कार्यक्रमों के तहत किया जाता रहा है। केंद्र सरकार ने 2019 में भारतीय एक सींग वाले गैंडे के लिए राष्ट्रीय संरक्षण रणनीति तैयार की थी।इसके अलावा **Indian Rhino Vision 2020** के तहत गैंडों की आबादी का विस्तार और उन्हें उपयुक्त आवासों में स्थानांतरित करने जैसे प्रयास किए गए। इसका उद्देश्य किसी एक क्षेत्र में आबादी के अत्यधिक केंद्रीकरण से जुड़े जोखिम को कम करना भी था।अब प्रोजेक्ट राइनो इन प्रयासों को एक समर्पित परियोजना के रूप में आगे बढ़ाने की दिशा में नया कदम है।
वन कर्मियों की भूमिका को पीएम ने सराहा
प्रधानमंत्री ने घोषणा के दौरान वन कर्मियों और संरक्षणवादियों के योगदान का विशेष उल्लेख किया। गैंडों की सुरक्षा में फील्ड स्तर पर काम करने वाले कर्मचारियों की महत्वपूर्ण भूमिका होती है।घने जंगलों और कठिन भौगोलिक परिस्थितियों में गश्त, अवैध शिकार की निगरानी, घायल वन्यजीवों की सहायता और मानव-वन्यजीव संघर्ष की स्थिति से निपटने जैसे काम वन कर्मियों द्वारा किए जाते हैं।इसके साथ स्थानीय समुदायों की भागीदारी भी वन्यजीव संरक्षण में महत्वपूर्ण मानी जाती है।
अवैध शिकार अब भी बड़ी चुनौती
गैंडों के संरक्षण में अवैध शिकार ऐतिहासिक रूप से बड़ी चुनौती रहा है। गैंडे के सींग की अवैध अंतरराष्ट्रीय मांग के कारण इस प्रजाति को शिकारियों से खतरा रहा है।भारत में वन्यजीव अपराध से निपटने के लिए वन्यजीव संरक्षण कानून, संरक्षित क्षेत्रों का नेटवर्क और Wildlife Crime Control Bureau जैसी व्यवस्थाएं मौजूद हैं। भारत CITES का भी सदस्य है, जो संकटग्रस्त वन्यजीवों और उनसे जुड़े उत्पादों के अंतरराष्ट्रीय व्यापार को नियंत्रित करता है।
संरक्षण को मिलेगी नई दिशा
भारत में एक सींग वाले गैंडों की आबादी में पिछले दशकों के दौरान उल्लेखनीय सुधार दर्ज किया गया है। अब 'प्रोजेक्ट राइनो' के जरिए केंद्र सरकार इस संरक्षण मॉडल को अधिक व्यवस्थित वित्तीय, तकनीकी और वैज्ञानिक सहायता देने की दिशा में आगे बढ़ा रही है।योजना में सुरक्षा से लेकर आवास प्रबंधन, आनुवंशिक स्वास्थ्य और आबादी की निगरानी तक कई पहलुओं को शामिल किया गया है। इसके प्रभाव का आकलन आने वाले वर्षों में राज्यों में इसके क्रियान्वयन और गैंडों की आबादी तथा आवास की स्थिति में होने वाले बदलाव से किया जा सकेगा।
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