- Home
- /
- दिल्ली-एनसीआर
- /
- पीएम मोदी और पोलैंड के...
पीएम मोदी और पोलैंड के प्रधानमंत्री डोनाल्ड टस्क की आज अहम बैठक

नई दिल्ली। भारत और पोलैंड के बीच द्विपक्षीय संबंधों को नई मजबूती देने की दिशा में गुरुवार, 22 अक्टूबर को महत्वपूर्ण वार्ता होने जा रही है। प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी और उनके पोलिश समकक्ष डोनाल्ड टस्क नई दिल्ली में उच्चस्तरीय द्विपक्षीय बातचीत करेंगे। इस बैठक में दोनों देशों के बीच व्यापार, निवेश, रक्षा, उभरती प्रौद्योगिकी, नवीकरणीय ऊर्जा और शिक्षा सहित कई महत्वपूर्ण क्षेत्रों में सहयोग बढ़ाने पर चर्चा होगी। इसके अलावा दोनों नेता क्षेत्रीय और वैश्विक घटनाक्रमों पर भी अपने विचार साझा करेंगे।
पोलैंड के प्रधानमंत्री डोनाल्ड टस्क 21 से 23 अक्टूबर तक भारत की तीन दिवसीय आधिकारिक यात्रा पर हैं। प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के निमंत्रण पर हो रही इस यात्रा को दोनों देशों के रणनीतिक संबंधों के लिहाज से महत्वपूर्ण माना जा रहा है। विदेश मंत्रालय के अनुसार, दोनों नेता अगस्त 2024 में स्थापित रणनीतिक साझेदारी के तहत अब तक हुई प्रगति की समीक्षा करेंगे और भविष्य में सहयोग बढ़ाने की संभावनाओं पर विचार करेंगे।
PM Modi to hold bilateral talks with Polish counterpart Donald Tusk today · Prime Minister Narendra Modi and his Polish counterpart, Donald Tusk, will hold bilateral talks on Thursday focused on strengthening bilateral cooperation across various sectors 🔗: https://t.co/l4AvZbZH9X
— IANS (@ians_india) October 22, 2026
हैदराबाद हाउस में होगी उच्चस्तरीय बातचीत
प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी और डोनाल्ड टस्क के बीच द्विपक्षीय वार्ता नई दिल्ली के हैदराबाद हाउस में निर्धारित है। पोलैंड सरकार के आधिकारिक कार्यक्रम के अनुसार, टस्क पहले विदेश मंत्री एस. जयशंकर से मुलाकात करेंगे। इसके बाद वे राजघाट जाकर महात्मा गांधी को श्रद्धांजलि अर्पित करेंगे।
सुबह 11:30 बजे प्रधानमंत्री मोदी द्वारा टस्क का स्वागत किए जाने का कार्यक्रम है। इसके बाद दोनों देशों के प्रतिनिधिमंडलों के बीच वार्ता होगी। बैठक के बाद दोनों प्रधानमंत्रियों के मीडिया को संबोधित करने का कार्यक्रम भी निर्धारित किया गया है।
इस बातचीत में आर्थिक संबंधों को मजबूत बनाने, निवेश के अवसर बढ़ाने और महत्वपूर्ण क्षेत्रों में साझेदारी को विस्तार देने पर विशेष जोर रहने की संभावना है।
रक्षा और सुरक्षा सहयोग पर रहेगा विशेष जोर
भारत और पोलैंड के बीच रक्षा क्षेत्र में सहयोग बढ़ाना इस यात्रा के प्रमुख उद्देश्यों में शामिल है। दोनों देश रक्षा उद्योग, सैन्य उपकरणों और तकनीकी सहयोग की संभावनाओं को आगे बढ़ाना चाहते हैं।
पोलैंड की रक्षा कंपनियां भारत के साथ औद्योगिक साझेदारी बढ़ाने में रुचि दिखा रही हैं। रक्षा उपकरणों के संयुक्त विकास और उत्पादन जैसे विषय भी दोनों देशों के आर्थिक एवं रणनीतिक संबंधों को मजबूती दे सकते हैं।
विशेषज्ञों के अनुसार, भारत की रक्षा विनिर्माण क्षमता और पोलैंड की यूरोपीय औद्योगिक विशेषज्ञता मिलकर सहयोग के नए अवसर पैदा कर सकती हैं। हालांकि, किसी नई रक्षा परियोजना या समझौते की घोषणा को लेकर बैठक के आधिकारिक परिणामों का इंतजार करना होगा।
व्यापार और निवेश बढ़ाने पर चर्चा
द्विपक्षीय वार्ता में भारत और पोलैंड के बीच व्यापारिक संबंधों को मजबूत करना भी प्रमुख मुद्दा रहेगा। दोनों देशों के बीच आर्थिक सहयोग बढ़ाने की पर्याप्त संभावनाएं हैं।
पोलैंड मध्य और पूर्वी यूरोप की महत्वपूर्ण अर्थव्यवस्थाओं में शामिल है। वहीं भारत दुनिया की प्रमुख उभरती अर्थव्यवस्थाओं में अपनी स्थिति मजबूत कर रहा है।
ऐसे में भारतीय कंपनियों के लिए पोलैंड यूरोपीय बाजार तक पहुंच बढ़ाने का महत्वपूर्ण माध्यम बन सकता है। दूसरी ओर पोलैंड की कंपनियों के लिए भारत का बड़ा उपभोक्ता बाजार और तेजी से विकसित होता औद्योगिक क्षेत्र निवेश के अवसर उपलब्ध कराता है।
इस यात्रा में पोलैंड के वित्त एवं अर्थव्यवस्था मंत्री आंद्रेज डोमान्स्की के साथ एक बड़ा कारोबारी प्रतिनिधिमंडल भी शामिल है। इससे स्पष्ट है कि दोनों देश आर्थिक संबंधों को प्राथमिकता दे रहे हैं।
आईटी और अंतरिक्ष क्षेत्र में साझेदारी की संभावनाएं
पोलैंड के प्रधानमंत्री अपनी भारत यात्रा के दौरान बेंगलुरु भी जाएंगे। वहां वे सूचना प्रौद्योगिकी और अंतरिक्ष क्षेत्र से जुड़ी कंपनियों तथा कारोबारी प्रतिनिधियों के साथ बातचीत करेंगे।
बेंगलुरु भारत के प्रमुख तकनीकी और नवाचार केंद्रों में शामिल है। ऐसे में यह दौरा दोनों देशों के बीच डिजिटल तकनीक, अनुसंधान और उभरते उद्योगों में सहयोग बढ़ाने के अवसर प्रदान कर सकता है।
नई दिल्ली में 22 अक्टूबर और बेंगलुरु में 23 अक्टूबर को भारत-पोलैंड व्यापार मंच का आयोजन निर्धारित है। इन कार्यक्रमों में दोनों देशों के उद्योग प्रतिनिधि निवेश और व्यावसायिक साझेदारी की संभावनाओं पर चर्चा करेंगे।
रूस-यूक्रेन युद्ध और वैश्विक मुद्दों पर भी बातचीत
प्रधानमंत्री मोदी और डोनाल्ड टस्क की वार्ता केवल द्विपक्षीय संबंधों तक सीमित नहीं रहेगी। दोनों नेता क्षेत्रीय और अंतरराष्ट्रीय घटनाक्रमों पर भी विचार साझा करेंगे।
पोलैंड की भौगोलिक स्थिति और यूरोपीय सुरक्षा व्यवस्था को देखते हुए रूस-यूक्रेन युद्ध उसके लिए महत्वपूर्ण मुद्दा है। इसके अतिरिक्त पश्चिम एशिया की स्थिति, वैश्विक सुरक्षा और अंतरराष्ट्रीय आर्थिक चुनौतियों पर भी बातचीत होने की संभावना है।
पोलैंड सरकार की ओर से जारी जानकारी में यूक्रेन युद्ध और पश्चिम एशिया के संघर्ष को संभावित चर्चा के विषयों में शामिल किया गया है।
भारत और पोलैंड दोनों वैश्विक स्थिरता, आर्थिक विकास और अंतरराष्ट्रीय सहयोग बढ़ाने में महत्वपूर्ण भूमिका निभा सकते हैं।
2024 में रणनीतिक साझेदारी तक पहुंचे थे संबंध
भारत और पोलैंड के संबंधों में अगस्त 2024 एक महत्वपूर्ण पड़ाव था। उस समय प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने पोलैंड की आधिकारिक यात्रा की थी। इस दौरान दोनों देशों ने अपने द्विपक्षीय संबंधों को रणनीतिक साझेदारी के स्तर तक बढ़ाने का निर्णय लिया था।
अब डोनाल्ड टस्क की भारत यात्रा उसी रणनीतिक साझेदारी को आगे बढ़ाने की दिशा में महत्वपूर्ण मानी जा रही है।
डोनाल्ड टस्क इससे पहले वर्ष 2010 में पोलैंड के प्रधानमंत्री के रूप में भारत आ चुके हैं। इसके अलावा उन्होंने 2017 में यूरोपीय परिषद के अध्यक्ष के रूप में भारत-यूरोपीय संघ शिखर सम्मेलन में हिस्सा लिया था।
भारत और यूरोपीय संघ के संबंधों को भी मिलेगा बढ़ावा
पोलैंड यूरोपीय संघ का महत्वपूर्ण सदस्य देश है। ऐसे में प्रधानमंत्री डोनाल्ड टस्क की भारत यात्रा को भारत और यूरोपीय संघ के व्यापक संबंधों के संदर्भ में भी देखा जा रहा है।
व्यापार, निवेश, स्वच्छ ऊर्जा, तकनीक और सुरक्षा जैसे क्षेत्रों में भारत तथा यूरोपीय देशों के बीच सहयोग लगातार महत्वपूर्ण होता जा रहा है।
विदेश मंत्रालय ने भी कहा है कि टस्क की यात्रा भारत-पोलैंड रणनीतिक साझेदारी को मजबूत करने के साथ भारत-यूरोपीय संघ के संबंधों को और गहरा करने का अवसर प्रदान करेगी।
दोनों देशों के संबंधों को नई दिशा देने की उम्मीद
प्रधानमंत्री मोदी और डोनाल्ड टस्क की बैठक से भारत तथा पोलैंड के बीच राजनीतिक, आर्थिक और रणनीतिक सहयोग को नई गति मिलने की उम्मीद है।
विशेष रूप से रक्षा उद्योग, उभरती तकनीक, नवीकरणीय ऊर्जा, शिक्षा, संस्कृति और दोनों देशों के नागरिकों के बीच संपर्क बढ़ाने पर ध्यान केंद्रित किया जाएगा।
अब सभी की निगाहें दोनों प्रधानमंत्रियों की वार्ता और उसके बाद होने वाली संभावित घोषणाओं पर हैं। बैठक में होने वाली चर्चा और उससे निकलने वाले फैसले आने वाले वर्षों में भारत-पोलैंड संबंधों की दिशा तय करने में महत्वपूर्ण भूमिका निभा सकते हैं।





