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सेना और वायुसेना के लिए 200 हल्के हेलीकॉप्टर खरीदने की तैयारी

Ratna Netam
26 Oct 2026 7:36 PM IST
सेना और वायुसेना के लिए 200 हल्के हेलीकॉप्टर खरीदने की तैयारी
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नई दिल्ली। भारतीय सेना और वायुसेना की हवाई क्षमताओं को मजबूत करने के लिए केंद्र सरकार हल्के हेलीकॉप्टरों की खरीद और स्वदेशी निर्माण पर जोर दे रही है। लगभग 200 हेलीकॉप्टरों की जरूरत वाला यह कार्यक्रम करीब 15,000 से 20,000 करोड़ रुपये का बताया गया है। इस परियोजना में भारतीय कंपनियों और विदेशी हेलीकॉप्टर निर्माताओं के बीच साझेदारी की अहम भूमिका रहने वाली है। संभावित प्रतिस्पर्धियों में टाटा एडवांस्ड सिस्टम्स और एयरबस हेलीकॉप्टर्स की साझेदारी तथा अडानी डिफेंस एंड एयरोस्पेस और इटली की लियोनार्डो की साझेदारी शामिल हैं।26 अक्टूबर 2026 को रक्षा मंत्री राजनाथ सिंह की अध्यक्षता में हुई रक्षा अधिग्रहण परिषद (DAC) की बैठक में सेना और वायुसेना के लिए लाइट मल्टी-रोल हेलीकॉप्टरों सहित कई सैन्य उपकरणों की खरीद के प्रस्तावों को जरूरत की स्वीकृति यानी Acceptance of Necessity (AoN) दी गई। हालांकि, मंत्रालय की सार्वजनिक जानकारी में इस विशेष 200 हेलीकॉप्टर कार्यक्रम की अंतिम अनुबंध राशि, चुने गए निर्माता और आपूर्ति की समयसीमा का विस्तृत ब्योरा नहीं दिया गया है।
200 हेलीकॉप्टरों में सेना और वायुसेना की हिस्सेदारी
प्रस्तावित कार्यक्रम के तहत भारतीय सेना के लिए 120 और भारतीय वायुसेना के लिए 80 हेलीकॉप्टरों की जरूरत बताई गई है। इनका उद्देश्य पुराने चेतक और चीता हेलीकॉप्टरों की जगह आधुनिक विमानन क्षमता उपलब्ध कराना है। इन पुराने हेलीकॉप्टरों का इस्तेमाल ऊंचाई वाले दुर्गम क्षेत्रों में सैनिकों और जरूरी सामान को पहुंचाने के लिए किया जाता रहा है।नए हेलीकॉप्टरों को ऊंचाई वाले इलाकों और कठिन मौसम में काम करने में सक्षम होना होगा। इनके संभावित कार्यों में टोह एवं निगरानी, सैनिकों और विशेष दलों को पहुंचाना, जमीनी अभियानों में सहायता, घायल सैनिकों को निकालना तथा खोज एवं बचाव अभियान शामिल हैं।
टाटा-एयरबस पेश कर सकती है H125 हेलीकॉप्टर
टाटा एडवांस्ड सिस्टम्स और एयरबस हेलीकॉप्टर्स की साझेदारी इस परियोजना के संभावित प्रतिस्पर्धियों में शामिल है। एयरबस का H125 एक हल्का, सिंगल-इंजन हेलीकॉप्टर है, जिसे ऊंचाई वाले क्षेत्रों में संचालन के लिए इस्तेमाल किया जाता है।एयरबस और टाटा कर्नाटक के वेमागल में हेलीकॉप्टरों की अंतिम असेंबली के लिए संयंत्र विकसित कर रहे हैं। इस स्थानीय विनिर्माण व्यवस्था का उद्देश्य भारत में हेलीकॉप्टर निर्माण और रखरखाव की क्षमता बढ़ाना है। हालांकि, सेना और वायुसेना के कार्यक्रम के लिए किसी खास मॉडल का अंतिम चयन अभी घोषित नहीं हुआ है।
अडानी-लियोनार्डो की साझेदारी भी दौड़ में
अडानी डिफेंस एंड एयरोस्पेस ने इटली की हेलीकॉप्टर निर्माता कंपनी लियोनार्डो के साथ भारत में हेलीकॉप्टर निर्माण का औद्योगिक ढांचा विकसित करने के लिए साझेदारी की है। इस साझेदारी के तहत उत्पादन, असेंबली और प्रशिक्षण से जुड़ी क्षमताएं विकसित करने की योजना है।इस परियोजना के संभावित विकल्पों में लियोनार्डो का AW169M जैसे बहुउद्देशीय हेलीकॉप्टर शामिल होने की चर्चा रही है। लेकिन यह स्पष्ट नहीं है कि कंपनी इस विशिष्ट सैन्य खरीद में कौन-सा मॉडल औपचारिक रूप से पेश करेगी और तकनीकी मूल्यांकन में किन मानकों को प्राथमिकता मिलेगी।
मेक इन इंडिया पर रहेगा जोर
भारत की रक्षा खरीद नीति में स्वदेशी निर्माण और तकनीक हस्तांतरण को बढ़ावा दिया जा रहा है। 26 अक्टूबर की DAC बैठक में लगभग 2.12 लाख करोड़ रुपये के विभिन्न रक्षा खरीद प्रस्तावों को प्रारंभिक मंजूरी दी गई। रक्षा मंत्रालय के अनुसार, इन प्रस्तावों के तहत करीब 82 प्रतिशत खरीद भारतीय उद्योग से किए जाने की योजना है।हल्के हेलीकॉप्टर कार्यक्रम में भी स्थानीय निर्माण, रखरखाव और आपूर्ति श्रृंखला विकसित करना महत्वपूर्ण होगा। इससे सेना की परिचालन जरूरतें पूरी करने के साथ भारत में एयरोस्पेस विनिर्माण क्षमता विकसित करने में मदद मिल सकती है।
अंतिम फैसला तकनीकी मूल्यांकन के बाद
इस परियोजना की अगली प्रक्रिया में तकनीकी आवश्यकताओं, हेलीकॉप्टरों की ऊंचाई पर प्रदर्शन क्षमता, सुरक्षा, कीमत और स्वदेशी निर्माण की शर्तों का मूल्यांकन किया जाएगा। इसके बाद ही प्रतिस्पर्धी कंपनियों में से किसी को अनुबंध दिए जाने की स्थिति स्पष्ट होगी।फिलहाल, 200 हेलीकॉप्टरों की जरूरत और संभावित कंपनियों की प्रतिस्पर्धा पर ध्यान केंद्रित है; अंतिम खरीद अनुबंध और निर्माता का चयन घोषित होना बाकी है।
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