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सड़क हादसों में कमी की योजना , ट्रैफिक नियम तोड़ने वालों को भुगतना करना होगा

New Delhi.नई दिल्ली। सुधार के साथ सहायता के अपने मंत्र के तहत केंद्र सरकार सड़क सुरक्षा के लिए राज्यों को 3,000 करोड़ रुपये देगी। वित्त मंत्रालय ने 2025-26 के दौरान पूंजीगत व्यय के लिए राज्यों को दी जाने वाली विशेष सहायता के लिए विस्तृत दिशा-निर्देश जारी किए हैं। इसके तहत सड़क सुरक्षा के लिए केंद्रीय सहायता पाने के लिए राज्यों को इलेक्ट्रॉनिक प्रवर्तन को अपनाना और बढ़ावा देना होगा। उन्हें सबसे पहले अपने राजमार्गों में उच्च जोखिम और उच्च घनत्व वाले गलियारों की पहचान करनी होगी, उनके बारे में सड़क परिवहन और राजमार्ग मंत्रालय को सूचित करना होगा। दुर्घटनाओं को कम करना होगा फिर उन जगहों पर इलेक्ट्रॉनिक निगरानी के उपाय करने होंगे, उन्हें ट्रैफिक कंट्रोल रूम से जोड़ना होगा और ट्रैफिक नियमों का उल्लंघन करने वालों को पकड़ना होगा और ई-चालान जारी करने होंगे। राज्यों को ई-चालान के निपटान की दक्षता का भी प्रदर्शन करना होगा। केंद्र सरकार को तीन महीने की अवधि के भीतर राज्यों के राजमार्गों और शहरों की प्रमुख सड़कों पर दुर्घटनाओं में कम से कम 50 प्रतिशत की कमी लानी है। यह वीडियो भी देखेंवित्त मंत्रालय की ओर से जारी सर्कुलर के अनुसार, राज्यों को 15 जून तक यह बताना है कि उन्हें चिह्नित क्षेत्रों में कितने इलेक्ट्रॉनिक उपकरण लगाने हैं। केंद्र सरकार चरणबद्ध तरीके से इस योजना के तहत धनराशि जारी करेगी।
इसका मतलब है कि जैसे-जैसे वे सुधार की दिशा में आगे बढ़ेंगे, उन्हें केंद्रीय सहायता की राशि जारी की जाएगी।तीन समूहों में बांटे गए 80 फीसदी सड़क दुर्घटनाएं ऐसी होती हैं, जिनमें यातायात नियमों का उल्लंघन होता है। वर्तमान में यातायात प्रवर्तन की अपनी सीमाएं हैं। यह मानव संसाधन के साथ-साथ यातायात कर्मियों पर निर्भरता के कारण भी है। ऐसे में तकनीक आधारित यातायात प्रवर्तन समय की मांग है।इलेक्ट्रॉनिक निगरानी और प्रवर्तन से वास्तविक समय में डेटा और साक्ष्य उपलब्ध होते हैं। इससे उल्लंघन के मामलों में आसानी से जुर्माना लगाया जा सकता है। केंद्रीय सहायता के लिए सरकार ने राज्यों को तीन समूहों में बांटा है। पहले समूह में शामिल उत्तर प्रदेश, मध्य प्रदेश, राजस्थान, महाराष्ट्र, तमिलनाडु, कर्नाटक, गुजरात और आंध्र प्रदेश को 350 करोड़ रुपये मिलेंगे।बिहार, झारखंड, दिल्ली, केरल, ओडिशा, बंगाल, पंजाब, छत्तीसगढ़, तेलंगाना, अरुणाचल प्रदेश, हरियाणा, असम और उत्तराखंड को 150 करोड़ रुपये दिए जाएंगे, जबकि हिमाचल प्रदेश, जम्मू और कश्मीर, त्रिपुरा, गोवा, मेघालय, मणिपुर, नागालैंड, सिक्किम, पुडुचेरी और मिजोरम को 50 करोड़ रुपये मिलेंगे।





