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पीयूष गोयल का बड़ा बयान, बोले- भारतीय सड़कों पर अशांति नहीं फैलाते

नई दिल्ली/बर्लिन। केंद्रीय वाणिज्य एवं उद्योग मंत्री पीयूष गोयल ने जर्मनी की राजधानी बर्लिन में भारतीय समुदाय को संबोधित करते हुए भारतीयों के शांतिप्रिय स्वभाव और सामाजिक जिम्मेदारी की सराहना की। उन्होंने कहा कि भारतीय नागरिक और विदेशों में रहने वाला भारतीय समुदाय आमतौर पर कानून का सम्मान करता है और समाज में शांति बनाए रखने में विश्वास रखता है। गोयल ने कहा कि भारतीय लोग सड़कों पर उतरकर समाज के लिए परेशानी पैदा करने या तोड़फोड़ जैसी गतिविधियों में शामिल होने के लिए नहीं जाने जाते। उनका यह बयान ऐसे समय सामने आया है, जब फ्रांस, इटली और यूरोप के अन्य हिस्सों में विभिन्न मुद्दों को लेकर विरोध-प्रदर्शन हो रहे हैं। भारत में चुनाव आयोग के खिलाफ चल रहे प्रदर्शनों के संदर्भ में भी उनके बयान की राजनीतिक व्याख्या की जा रही है।
बर्लिन में भारतीय समुदाय को किया संबोधित
पीयूष गोयल ने बर्लिन में भारतीय समुदाय से बातचीत के दौरान विदेशों में भारतीयों की प्रतिष्ठा का उल्लेख किया।
उन्होंने कहा कि भारतीयों को दुनिया के विभिन्न देशों में सम्मान मिलता है और उनका गर्मजोशी से स्वागत किया जाता है।
गोयल के अनुसार, इसके पीछे भारतीय समुदाय की कार्यशैली, पारिवारिक मूल्यों और शांतिप्रिय व्यवहार की महत्वपूर्ण भूमिका है।
उन्होंने कहा कि भारतीय जहां भी रहते हैं, वहां अपनी मेहनत और जिम्मेदार आचरण से पहचान बनाते हैं।
मंत्री ने विदेशों में रहने वाले भारतीयों को संबोधित करते हुए कहा कि स्थानीय समाज में उनके प्रति सम्मान और विश्वास दिखाई देता है।
भारतीयों को बताया शांतिप्रिय समुदाय
अपने संबोधन में गोयल ने कहा कि भारतीय और भारतीय समुदाय शांतिप्रिय हैं।
उन्होंने कहा कि विदेशों में रहने वाले भारतीयों को लेकर यह धारणा है कि वे तोड़फोड़ जैसी गतिविधियों में शामिल नहीं होते।
मंत्री ने कहा कि भारतीयों का व्यवहार दूसरे देशों में उनकी सकारात्मक पहचान बनाने में मदद करता है।
उन्होंने यूरोप के विभिन्न हिस्सों में हो रहे प्रदर्शनों का उल्लेख करते हुए भारतीय समुदाय के व्यवहार की तुलना वहां की परिस्थितियों से की।
हालांकि यह मंत्री की ओर से व्यक्त किया गया सामान्य आकलन था। किसी भी समुदाय के सभी लोगों के व्यवहार को एक जैसा नहीं माना जा सकता।
परिवार और सामाजिक मूल्यों का भी किया उल्लेख
पीयूष गोयल ने भारतीय समुदाय की पारिवारिक परंपराओं को भी उनकी पहचान का महत्वपूर्ण हिस्सा बताया।
उन्होंने कहा कि भारतीय अपने परिवारों के साथ रहते हैं और उनकी अच्छी देखभाल करते हैं।
मंत्री के मुताबिक, विदेशों में भारतीय समुदाय को मिलने वाले सम्मान के पीछे उनका सामाजिक व्यवहार और पारिवारिक जिम्मेदारियां भी महत्वपूर्ण हैं।
हालांकि उन्होंने यह भी स्वीकार किया कि हर समुदाय में कुछ अपवाद हो सकते हैं, जिन पर पूरी तरह नियंत्रण रखना संभव नहीं होता।
इस टिप्पणी के जरिए उन्होंने स्पष्ट किया कि उनका बयान भारतीय समुदाय की सामान्य छवि के संदर्भ में था।
फ्रांस और इटली में जारी विरोध-प्रदर्शनों के बीच बयान
गोयल की टिप्पणी ऐसे समय सामने आई है, जब फ्रांस और इटली सहित यूरोप के कई देशों में विरोध-प्रदर्शन हो रहे हैं।
फ्रांस में बढ़ती महंगाई, वेतन और सार्वजनिक सेवाओं से जुड़े मुद्दों को लेकर लोगों ने प्रदर्शन किए हैं।
24 अक्टूबर को फ्रांस में बड़ी संख्या में प्रदर्शनकारी सड़कों पर उतरे। कुछ स्थानों पर प्रदर्शनकारियों और सुरक्षा बलों के बीच झड़पें भी हुईं।
इटली के विभिन्न शहरों में भी आर्थिक और राजनीतिक मुद्दों को लेकर प्रदर्शन हुए।
हालांकि कई प्रदर्शन शांतिपूर्ण रहे और हिंसा की घटनाएं कुछ स्थानों तक सीमित थीं।
गोयल ने अपने संबोधन में यूरोप के कुछ हिस्सों में देखी जा रही अशांति का उल्लेख किया, लेकिन किसी एक विरोध-प्रदर्शन को सीधे निशाना नहीं बनाया।
भारत में चुनाव आयोग के खिलाफ प्रदर्शन का भी संदर्भ
केंद्रीय मंत्री का यह बयान भारत में चुनाव आयोग के खिलाफ जारी विरोध-प्रदर्शनों के बीच भी चर्चा का विषय बना है।
मतदाता सूचियों और चुनावी प्रक्रियाओं से संबंधित मुद्दों को लेकर राजनीतिक विरोध सामने आया है।
ऐसे समय में सड़कों पर प्रदर्शन करने को लेकर गोयल की टिप्पणी को व्यापक राजनीतिक संदर्भ में देखा जा रहा है।
हालांकि उपलब्ध बयान में उन्होंने भारत में चुनाव आयोग के खिलाफ प्रदर्शन करने वाले किसी संगठन या राजनीतिक दल का सीधे उल्लेख नहीं किया।
यह भी महत्वपूर्ण है कि शांतिपूर्ण विरोध-प्रदर्शन लोकतांत्रिक व्यवस्था में नागरिकों की अभिव्यक्ति का मान्य माध्यम है। शांतिपूर्ण प्रदर्शन और हिंसक तोड़फोड़ अलग-अलग गतिविधियां हैं।
जर्मनी में भारतीय पेशेवरों की मांग पर जोर
गोयल ने भारतीय समुदाय से बातचीत के दौरान जर्मनी में भारतीय पेशेवरों के लिए उपलब्ध अवसरों का भी उल्लेख किया।
उन्होंने कहा कि भारतीय कर्मचारियों को उनकी मेहनत, कार्य के प्रति समर्पण और पेशेवर व्यवहार के कारण महत्व दिया जाता है।
जर्मनी में विभिन्न क्षेत्रों में कुशल कर्मचारियों की जरूरत है और भारतीय पेशेवर इन आवश्यकताओं को पूरा करने में योगदान दे सकते हैं।
मंत्री ने भारतीय समुदाय के सदस्यों से नए आने वाले भारतीय विद्यार्थियों की सहायता करने का भी आग्रह किया।
उन्होंने विशेष रूप से आर्थिक रूप से कमजोर पृष्ठभूमि से आने वाले छात्रों को सहयोग देने की आवश्यकता बताई।
भारत-जर्मनी व्यापार संबंधों पर भी चर्चा
पीयूष गोयल की जर्मनी यात्रा का प्रमुख उद्देश्य दोनों देशों के बीच व्यापार, निवेश और औद्योगिक सहयोग को बढ़ावा देना था।
22 से 24 अक्टूबर के बीच हुई इस यात्रा में उन्होंने जर्मनी के सरकारी प्रतिनिधियों और उद्योग जगत के प्रमुख लोगों के साथ बातचीत की।
उन्होंने भारत-जर्मनी व्यापार में विस्तार की संभावनाओं पर जोर दिया।
यात्रा के दौरान विनिर्माण, तकनीक, निवेश और औद्योगिक साझेदारी जैसे विषयों पर भी चर्चा हुई।
गोयल ने कहा कि भारत और जर्मनी के बीच आर्थिक संबंधों को और मजबूत बनाने के व्यापक अवसर मौजूद हैं।
विदेशों में भारतीय समुदाय की महत्वपूर्ण भूमिका
भारतीय समुदाय जर्मनी सहित दुनिया के अनेक देशों में शिक्षा, स्वास्थ्य, सूचना प्रौद्योगिकी, इंजीनियरिंग और व्यापार जैसे क्षेत्रों में कार्यरत है।
विदेशों में रहने वाले भारतीय दोनों देशों के बीच सांस्कृतिक और आर्थिक संबंधों को मजबूत करने में भी भूमिका निभाते हैं।
गोयल ने भारतीय समुदाय से भारत के आर्थिक विकास में योगदान देने और अंतरराष्ट्रीय स्तर पर नए व्यावसायिक अवसरों को बढ़ावा देने की अपील की।
उन्होंने कहा कि विदेशों में भारतीयों की सकारात्मक पहचान भारत के लिए भी महत्वपूर्ण है।
बयान को लेकर राजनीतिक चर्चा की संभावना
पीयूष गोयल के इस बयान में भारतीय समुदाय की प्रशंसा के साथ यूरोप के कुछ हिस्सों में हो रहे प्रदर्शनों का संदर्भ भी शामिल था।
उनकी टिप्पणी का मुख्य जोर विदेशों में भारतीयों की सामाजिक प्रतिष्ठा और शांतिप्रिय छवि पर रहा।
हालांकि भारत और यूरोप में जारी राजनीतिक प्रदर्शनों के बीच इस बयान की अलग-अलग व्याख्याएं की जा सकती हैं।
गोयल ने भारतीय समुदाय को सम्मानित और शांतिप्रिय बताते हुए कहा कि विदेशों में उनकी अच्छी प्रतिष्ठा है। वहीं, लोकतांत्रिक व्यवस्था में शांतिपूर्ण विरोध करने के अधिकार और हिंसक गतिविधियों के बीच अंतर बनाए रखना भी महत्वपूर्ण है।





