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टर्बुलेंस से घायल हुए यात्री पायलट दूसरी बार नशे की जांच में फेल

Ratna Netam
11 Aug 2026 7:16 PM IST
टर्बुलेंस से घायल हुए यात्री पायलट दूसरी बार नशे की जांच में फेल
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नई दिल्ली : फुकेट से दिल्ली आ रही एयर इंडिया की फ्लाइट AI-2379 से जुड़ा मामला अब गंभीर मोड़ लेता दिखाई दे रहा है। उड़ान के दौरान विमान में तेज टर्बुलेंस के चलते यात्रियों और चालक दल के सदस्यों को चोटें आने के बाद की गई जांच में फ्लाइट के मुख्य पायलट के साइकोएक्टिव पदार्थ परीक्षण का परिणाम दूसरी बार भी पॉजिटिव बताया जा रहा है। हालांकि, मामले की अंतिम पुष्टि और जांच प्रक्रिया अभी जारी है। संबंधित अधिकारियों की रिपोर्ट आने के बाद ही पायलट के खिलाफ आगे की कार्रवाई को लेकर स्थिति स्पष्ट होगी।
जानकारी के मुताबिक एयर इंडिया की इस उड़ान में कुल 137 यात्री और आठ चालक दल के सदस्य सवार थे। उड़ान के दौरान विमान को अचानक तेज झटके लगे और इसकी ऊंचाई में करीब 300 फीट की कमी दर्ज की गई। टर्बुलेंस के कारण विमान के भीतर अफरा-तफरी की स्थिति बन गई और कई यात्री तथा चालक दल के सदस्य घायल हो गए। इस घटना में कम से कम 13 यात्रियों और चार क्रू मेंबर्स के घायल होने की जानकारी सामने आई है।
नागरिक उड्डयन मंत्री राम मोहन नायडू के मुताबिक, घायलों में चालक दल के दो सदस्यों को रीढ़ की हड्डी के निचले हिस्से और गर्दन में चोटें आई हैं। घटना की गंभीरता को देखते हुए इसे गंभीर श्रेणी की घटना के तौर पर लिया गया है। इसकी विस्तृत जांच विमान दुर्घटना जांच ब्यूरो यानी AAIB कर रहा है।
घटना के बाद तय नियमों के तहत विमान के दोनों पायलटों का साइकोएक्टिव पदार्थ परीक्षण कराया गया। बताया जा रहा है कि मुख्य पायलट शुरुआती जांच में संदिग्ध पाए गए थे। इसके बाद सैंपल को अंतिम पुष्टि के लिए निर्धारित प्रयोगशाला में भेजा गया। अब सामने आई जानकारी के मुताबिक, पुष्टि के लिए किए गए परीक्षण में भी पायलट के नमूने का परिणाम पॉजिटिव आया है।
साइकोएक्टिव पदार्थ उन रसायनों या पदार्थों को कहा जाता है जो मस्तिष्क और तंत्रिका तंत्र की गतिविधियों को प्रभावित कर सकते हैं। विमान संचालन में पायलटों की मानसिक और शारीरिक सतर्कता बेहद महत्वपूर्ण होती है। इसी वजह से नागरिक उड्डयन नियमों के तहत उड़ान चालक दल के सदस्यों की साइकोएक्टिव पदार्थों को लेकर जांच की व्यवस्था की गई है।
नागर विमानन मंत्रालय के मुताबिक, मानक संचालन प्रक्रियाओं के तहत घटना के बाद चालक दल के दोनों सदस्यों की अनिवार्य जांच की गई थी। जांच और परीक्षण की प्रक्रिया पूरी होने तक नागर विमानन महानिदेशालय यानी DGCA ने दोनों पायलटों को ड्यूटी से हटा दिया है। अधिकारियों के अनुसार, आगे की कार्रवाई जांच के निष्कर्षों और अंतिम रिपोर्ट के आधार पर की जाएगी।
मामले में एयर इंडिया ने भी अपनी स्थिति स्पष्ट की है। एयरलाइन का कहना है कि उसे जानकारी है कि निर्धारित नियमों के अनुसार घटना के बाद पायलटों का परीक्षण किया गया था। हालांकि, एयर इंडिया के अनुसार इन परीक्षणों के परिणाम अभी उसके साथ साझा नहीं किए गए हैं। इसलिए एयरलाइन किसी निष्कर्ष पर टिप्पणी करने की स्थिति में नहीं है।
एयर इंडिया ने यह भी कहा है कि वह किसी विशेष उड़ान या घटना तक सीमित नहीं है, बल्कि नागरिक उड्डयन नियमों के तहत अपने चालक दल के सदस्यों की नियमित ड्रग और साइकोएक्टिव पदार्थ जांच भी कराती है। एयरलाइन की ओर से कहा गया है कि सुरक्षा उसके संचालन का महत्वपूर्ण हिस्सा है और वह संबंधित नियमों का पालन करती है।
फिलहाल इस पूरे मामले में AAIB की जांच और DGCA की आगे की कार्रवाई महत्वपूर्ण मानी जा रही है। जांच एजेंसियां यह पता लगाने की कोशिश कर रही हैं कि उड़ान के दौरान हुई घटना के पीछे वास्तविक कारण क्या था और क्या पायलट के परीक्षण से जुड़े निष्कर्षों का घटना से कोई संबंध है। केवल डोप टेस्ट के परिणाम के आधार पर घटना का कारण तय नहीं किया जा सकता। इसके लिए जांच की अंतिम रिपोर्ट का इंतजार करना होगा।
फ्लाइट में टर्बुलेंस के दौरान 17 लोगों के घायल होने और इसके बाद पायलट की जांच का परिणाम सामने आने से विमान सुरक्षा को लेकर सवाल जरूर उठे हैं। हालांकि, जब तक आधिकारिक जांच पूरी नहीं हो जाती, तब तक किसी भी व्यक्ति की भूमिका या घटना के कारण को लेकर अंतिम निष्कर्ष निकालना उचित नहीं होगा। AAIB और DGCA की रिपोर्ट के बाद ही पूरे मामले की तस्वीर स्पष्ट हो सकेगी।
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