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15 मई से पेट्रोल-डीज़ल के दामों में अचानक बढ़ोतरी, Chennai में कीमतें नई ऊंचाई पर

Delhi दिल्ली: देश में 15 मई की सुबह से पेट्रोल और डीज़ल की कीमतों में अचानक बढ़ोतरी दर्ज की गई है। बिना किसी पूर्व सूचना के हुई इस बढ़ोतरी से आम लोगों में चिंता का माहौल है। चेन्नई में पेट्रोल और डीज़ल दोनों के दामों में उल्लेखनीय वृद्धि देखी गई है, जिससे उपभोक्ताओं पर अतिरिक्त आर्थिक बोझ बढ़ गया है।
जानकारी के अनुसार, चेन्नई में एक लीटर पेट्रोल की कीमत में 2.83 रुपये की बढ़ोतरी की गई है, जिसके बाद इसकी कीमत 103.67 रुपये प्रति लीटर तक पहुंच गई है। इसी तरह डीज़ल की कीमत में 2.86 रुपये प्रति लीटर की बढ़ोतरी हुई है और अब यह 95.25 रुपये प्रति लीटर में बिक रहा है। यह बढ़ोतरी कई महीनों के बाद की गई सबसे बड़ी एकल वृद्धि मानी जा रही है।
तेल कीमतों में इस वृद्धि के पीछे अंतरराष्ट्रीय स्तर पर कच्चे तेल की कीमतों में तेजी, पश्चिम एशिया में जारी संघर्ष और होर्मुज जलडमरूमध्य से जुड़े हालात को प्रमुख कारण बताया जा रहा है। इन वैश्विक परिस्थितियों के कारण तेल कंपनियों पर दबाव बढ़ा है, जिसका असर सीधे घरेलू बाजार में देखने को मिल रहा है।
इस बीच आर्थिक क्षेत्र से जुड़े विशेषज्ञों और अधिकारियों ने पहले ही चेतावनी दी थी कि स्थिति बिगड़ सकती है। रिज़र्व बैंक के गवर्नर संजय मल्होत्रा ने हाल ही में कहा था कि वैश्विक कच्चे तेल की कीमतों में बढ़ोतरी से भारत की महंगाई, ईंधन आयात और अर्थव्यवस्था पर दबाव बढ़ सकता है। उन्होंने यह भी संकेत दिया था कि यदि पश्चिम एशिया में संकट जारी रहता है, तो भारत में पेट्रोल और डीज़ल की कीमतें बढ़ना तय है।
इसके अलावा प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने भी इस सप्ताह एक सार्वजनिक कार्यक्रम में लोगों से ईंधन की बचत करने और पेट्रोल-डीज़ल का सीमित उपयोग करने की अपील की थी। हालांकि उस समय आम जनता को उम्मीद थी कि चुनावी प्रक्रिया के बाद ही कीमतों में बदलाव होगा, लेकिन चुनाव के अंतिम चरण और परिणामों के बाद अचानक दाम बढ़ा दिए गए।
माना जा रहा था कि पश्चिम बंगाल में चुनाव के अंतिम चरण तक ईंधन की कीमतों में स्थिरता बनी रहेगी, लेकिन परिणामों के बाद बढ़ोतरी होने से लोग हैरान हैं। आम जनता का कहना है कि इस अचानक बदलाव का असर उनके दैनिक बजट पर पड़ेगा और आने वाले समय में अन्य आवश्यक वस्तुओं की कीमतों में भी वृद्धि हो सकती है।
विशेषज्ञों का मानना है कि अंतरराष्ट्रीय बाजार की स्थिति अगर इसी तरह बनी रहती है तो आने वाले दिनों में ईंधन की कीमतों में और बदलाव संभव है। इसका सीधा असर परिवहन, वस्तु-सेवा और महंगाई दर पर पड़ सकता है।
लगातार बढ़ती ईंधन कीमतों ने आम लोगों की चिंता बढ़ा दी है और अब सभी की नजरें सरकार और तेल कंपनियों की आगामी नीतियों पर टिकी हैं।





