- Home
- /
- दिल्ली-एनसीआर
- /
- Petrol-डीज़ल की कीमतों...
Petrol-डीज़ल की कीमतों में फिर बढ़ोतरी, दो हफ्ते में चौथी बार महंगा हुआ ईंधन

Delhi दिल्ली: देश में पेट्रोल और डीज़ल की कीमतों में सोमवार को एक बार फिर बढ़ोतरी दर्ज की गई है। सरकारी तेल विपणन कंपनियों ने ईंधन की कीमतों में 2.61 से 2.71 रुपये प्रति लीटर तक की वृद्धि की है। यह बढ़ोतरी दो हफ्ते से भी कम समय में चौथी बार की गई है, जिससे आम जनता पर महंगाई का दबाव और बढ़ गया है।
जानकारी के अनुसार, लगातार बढ़ रही अंतरराष्ट्रीय कच्चे तेल की कीमतों का असर अब घरेलू बाजार पर साफ दिखाई दे रहा है। तेल कंपनियों ने बताया कि वैश्विक बाजार में कच्चे तेल की कीमतों में तेजी, रिफाइनिंग मार्जिन में गिरावट और रुपये के कमजोर होने के कारण आयात लागत बढ़ गई है, जिसका सीधा असर खुदरा ईंधन कीमतों पर पड़ा है।
इंडस्ट्री सूत्रों के मुताबिक, ताजा बढ़ोतरी के बाद पेट्रोल की कीमत में 2.61 रुपये प्रति लीटर और डीज़ल की कीमत में 2.71 रुपये प्रति लीटर की वृद्धि हुई है। इस नए बदलाव के साथ 15 मई से अब तक ईंधन की कुल कीमतों में लगभग 7.5 रुपये प्रति लीटर का इजाफा हो चुका है।
गौरतलब है कि 15 मई को लंबे समय से स्थिर रखी गई कीमतों में बदलाव फिर से शुरू किया गया था। इसके बाद से लगातार ईंधन महंगा हो रहा है, जिससे परिवहन लागत और अन्य आवश्यक वस्तुओं की कीमतों पर भी असर पड़ने की आशंका बढ़ गई है। विशेषज्ञों का कहना है कि ईंधन कीमतों में बढ़ोतरी का सीधा असर महंगाई दर पर पड़ता है, क्योंकि ट्रांसपोर्टेशन कॉस्ट में वृद्धि हो जाती है।
राष्ट्रीय राजधानी दिल्ली में भी ईंधन की कीमतों में बढ़ोतरी दर्ज की गई है। दिल्ली में पेट्रोल की कीमत पहले 99.51 रुपये प्रति लीटर थी, जो अब बढ़कर 102.12 रुपये प्रति लीटर हो गई है। इसी तरह डीज़ल की कीमत 92.49 रुपये प्रति लीटर से बढ़कर 95.20 रुपये प्रति लीटर हो गई है।
लगातार हो रही इन बढ़ोतरी से वाहन चालकों और ट्रांसपोर्ट व्यवसाय से जुड़े लोगों पर आर्थिक बोझ बढ़ रहा है। परिवहन कंपनियों का कहना है कि यदि कीमतों में इसी तरह वृद्धि जारी रही तो माल ढुलाई दरों में भी बढ़ोतरी करनी पड़ सकती है, जिसका असर आम उपभोक्ताओं पर पड़ेगा।
विशेषज्ञों के अनुसार, अंतरराष्ट्रीय बाजार में कच्चे तेल की कीमतें स्थिर न होने और भू-राजनीतिक तनावों के कारण आने वाले समय में भी ईंधन कीमतों में अस्थिरता बनी रह सकती है। सरकार और तेल कंपनियां स्थिति पर नजर बनाए हुए हैं, लेकिन फिलहाल राहत की कोई संभावना नहीं दिख रही है।





