- Home
- /
- दिल्ली-एनसीआर
- /
- चुनाव आयोग पर जारी...
दिल्ली-एनसीआर
चुनाव आयोग पर जारी विवाद के बीच पवन खेड़ा का बड़ा बयान
Ratna Netam
13 Oct 2026 7:57 PM IST

x
नई दिल्ली। मुख्य चुनाव आयुक्त ज्ञानेश कुमार और भारत निर्वाचन आयोग (ECI) के खिलाफ चल रहे विरोध-प्रदर्शनों को लेकर देश की राजनीति में आरोप-प्रत्यारोप तेज हो गए हैं। कांग्रेस सांसद और पार्टी प्रवक्ता पवन खेड़ा ने मंगलवार, 13 अक्टूबर 2026 को केंद्रीय मंत्री पीयूष गोयल के बयान पर पलटवार किया। उन्होंने चुनाव आयोग की कार्यप्रणाली पर सवाल उठाते हुए कहा कि देश में शायद ही पहले कभी किसी मुख्य चुनाव आयुक्त को इस स्तर पर विरोध का सामना करना पड़ा हो। खेड़ा ने इन प्रदर्शनों को चुनावी व्यवस्था पर उठ रहे सवालों से जोड़ते हुए संबंधित अधिकारियों की जवाबदेही की मांग की।नई दिल्ली में समाचार एजेंसी एएनआई से बातचीत के दौरान पवन खेड़ा ने कहा कि मुख्य चुनाव आयुक्त के खिलाफ लगातार हो रहे विरोध-प्रदर्शनों को गंभीरता से लिया जाना चाहिए। उन्होंने सवाल किया कि क्या देश के इतिहास में कभी किसी मुख्य चुनाव आयुक्त को इतने बड़े पैमाने पर सार्वजनिक विरोध का सामना करना पड़ा है।
पीयूष गोयल के बयान पर पवन खेड़ा का पलटवार
कांग्रेस नेता की प्रतिक्रिया केंद्रीय मंत्री पीयूष गोयल की ओर से कांग्रेस और राहुल गांधी पर की गई आलोचना के बाद सामने आई।पीयूष गोयल ने मंगलवार को चुनाव आयोग के खिलाफ कांग्रेस के विरोध-प्रदर्शन पर सवाल उठाए थे। उन्होंने राहुल गांधी और कांग्रेस नेतृत्व पर चुनाव आयोग जैसी संवैधानिक संस्था की विश्वसनीयता को नुकसान पहुंचाने का आरोप लगाया।गोयल ने कांग्रेस के पिछले कार्यकाल का उल्लेख करते हुए कहा कि पार्टी को चुनाव आयोग से जुड़े अपने पुराने फैसलों और नियुक्तियों के रिकॉर्ड पर भी विचार करना चाहिए। उन्होंने कांग्रेस के मौजूदा आरोपों को निराधार बताया।
मुख्य चुनाव आयुक्त को लेकर कांग्रेस ने उठाए सवाल
पवन खेड़ा ने मुख्य चुनाव आयुक्त ज्ञानेश कुमार की भूमिका और उनके खिलाफ हो रहे विरोध-प्रदर्शनों को लेकर केंद्र सरकार से सवाल किए।उन्होंने कहा कि चुनाव आयोग की निष्पक्षता पर उठ रहे सवालों का जवाब दिया जाना चाहिए। कांग्रेस नेता ने विरोध-प्रदर्शनों की व्यापकता का उल्लेख करते हुए मौजूदा स्थिति को असाधारण बताया।खेड़ा का तर्क है कि जब राजनीतिक दल और आम नागरिक किसी संवैधानिक संस्था के फैसलों को लेकर सवाल उठाते हैं, तो उन चिंताओं पर गंभीरता से विचार किया जाना चाहिए।हालांकि विरोध-प्रदर्शनों का होना अपने आप में किसी चुनाव अधिकारी के खिलाफ लगाए गए आरोपों को प्रमाणित नहीं करता।
SIR को लेकर सड़कों पर उतरा विपक्ष
चुनाव आयोग के खिलाफ जारी विरोध-प्रदर्शनों का प्रमुख कारण मतदाता सूची का विशेष गहन पुनरीक्षण यानी SIR है।कांग्रेस और इंडिया गठबंधन के नेताओं का आरोप है कि इस प्रक्रिया के दौरान बड़ी संख्या में पात्र मतदाताओं के नाम सूची से हटाए गए हैं।विपक्ष ने मतदाता सूची में पारदर्शिता, हटाए गए नामों की समीक्षा और चुनाव आयोग की जवाबदेही सुनिश्चित करने की मांग की है।वहीं, चुनाव आयोग का कहना है कि पुनरीक्षण प्रक्रिया का उद्देश्य मतदाता सूची को अद्यतन करना और उसमें मौजूद गलत प्रविष्टियों को दूर करना है। आयोग और भाजपा ने जानबूझकर मतदाताओं को बाहर करने के आरोपों को खारिज किया है।
सुप्रीम कोर्ट तक मार्च कर चुके हैं विपक्षी नेता
सोमवार, 12 अक्टूबर को राहुल गांधी के नेतृत्व में इंडिया गठबंधन के नेताओं और समर्थकों ने दिल्ली में सुप्रीम कोर्ट की ओर मार्च निकाला था।इस दौरान विपक्षी नेताओं ने चुनाव आयोग के फैसलों के खिलाफ विरोध दर्ज कराया और मतदाता सूचियों के पुनरीक्षण की न्यायिक समीक्षा की मांग उठाई।राहुल गांधी, मल्लिकार्जुन खड़गे और अन्य विपक्षी नेताओं ने सुप्रीम कोर्ट में याचिका भी दाखिल की। हालांकि न्यायालय की रजिस्ट्री ने याचिका में 14 प्रक्रियागत कमियां बताई थीं।इनमें दस्तावेजों और अन्य औपचारिकताओं से संबंधित आपत्तियां शामिल थीं। कांग्रेस की ओर से इन कमियों को दूर करने की बात कही गई।
ज्ञानेश कुमार के इस्तीफे की मांग पर अड़ी कांग्रेस
कांग्रेस और इंडिया गठबंधन के कई नेता मुख्य चुनाव आयुक्त ज्ञानेश कुमार के इस्तीफे की मांग कर रहे हैं।पवन खेड़ा इससे पहले भी कह चुके हैं कि मुख्य चुनाव आयुक्त के इस्तीफे की मांग वापस नहीं ली जाएगी। उन्होंने विरोध-प्रदर्शन जारी रखने की बात कही थी।8 अक्टूबर को भी खेड़ा ने कहा था कि विपक्ष चुनाव आयोग की कार्यप्रणाली के खिलाफ अपनी आवाज उठाता रहेगा।
चुनाव आयोग की निष्पक्षता पर राजनीतिक बहस तेज
पवन खेड़ा और पीयूष गोयल के बीच बयानबाजी ने चुनाव आयोग की जवाबदेही और राजनीतिक दलों के विरोध के अधिकार को लेकर चल रही बहस को फिर सामने ला दिया है।एक तरफ कांग्रेस का कहना है कि मतदाता सूचियों में कथित अनियमितताओं की निष्पक्ष समीक्षा आवश्यक है। दूसरी ओर, भाजपा का आरोप है कि कांग्रेस चुनाव आयोग की विश्वसनीयता पर सवाल उठाकर राजनीतिक लाभ लेने का प्रयास कर रही है।फिलहाल मतदाता सूची के पुनरीक्षण से जुड़े विवाद, मुख्य चुनाव आयुक्त के खिलाफ विरोध-प्रदर्शनों और सुप्रीम कोर्ट में दाखिल याचिका पर राजनीतिक तथा कानूनी प्रक्रिया जारी है।
Next Story





