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संसद मार्च बवाल: पुलिस खंगाल रही फंडिंग और साजिश का कनेक्शन

Saba Naaz
21 July 2026 7:17 PM IST
संसद मार्च बवाल: पुलिस खंगाल रही फंडिंग और साजिश का कनेक्शन
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नई दिल्ली। संसद कूच के दौरान हुए उपद्रव मामले की जांच अब व्यापक स्तर पर शुरू हो गई है। दिल्ली पुलिस और जांच एजेंसियां यह पता लगाने में जुटी हैं कि प्रदर्शन के दौरान हुई हिंसा के पीछे कोई सुनियोजित साजिश, संगठित नेटवर्क या बाहरी फंडिंग तो नहीं थी। पुलिस इस पूरे मामले में कानून-व्यवस्था भंग करने के साथ-साथ देश विरोधी गतिविधियों के एंगल से भी जांच कर रही है।

जांच एजेंसियों का कहना है कि प्रदर्शन में बड़ी संख्या में छात्र और अन्य लोग अपनी मांगों को लेकर शामिल हुए थे, लेकिन भीड़ में कुछ ऐसे तत्व भी मौजूद थे जिन्होंने माहौल खराब करने की कोशिश की। पुलिस को आशंका है कि कुछ लोगों ने जानबूझकर प्रदर्शन को हिंसक रूप देने का प्रयास किया।

इस मामले की जांच के लिए दिल्ली पुलिस की स्पेशल सेल, क्राइम ब्रांच की चार विशेष टीमें और नई दिल्ली जिला पुलिस अलग-अलग स्तर पर काम कर रही हैं। जांच एजेंसियों ने अब तक कई वीडियो, सीसीटीवी फुटेज, मोबाइल रिकॉर्डिंग और इंटरनेट मीडिया पर वायरल सामग्री को अपने कब्जे में लिया है। इन डिजिटल साक्ष्यों के आधार पर संदिग्धों की पहचान की जा रही है।

पुलिस अधिकारियों के अनुसार, कुछ वीडियो में कथित तौर पर देश विरोधी नारे सुनाई देने का दावा किया जा रहा है। इनमें "इसे नेपाल बना देंगे" और "इसे बांग्लादेश बना देंगे" जैसे नारे शामिल बताए जा रहे हैं। पुलिस इन वीडियो की प्रमाणिकता जांचने के लिए फारेंसिक विशेषज्ञों की मदद ले रही है। जांच के बाद यह स्पष्ट किया जाएगा कि नारे किसने लगाए और इसके पीछे क्या उद्देश्य था।

सूत्रों के मुताबिक, अब तक 200 से अधिक वीडियो और इंटरनेट मीडिया पर मौजूद क्लिप्स का विश्लेषण किया जा चुका है। इन वीडियो के आधार पर कई संदिग्धों की पहचान की गई है। पुलिस अब इन लोगों के मोबाइल फोन, इंटरनेट मीडिया गतिविधियों और आपसी संपर्कों की जानकारी जुटा रही है। संदिग्धों से जल्द पूछताछ की तैयारी भी की जा रही है।

जांच में यह भी सामने आया है कि उपद्रव के दौरान कुछ समूह काफी सक्रिय थे। पुलिस के मुताबिक, कुछ लोगों ने बैरिकेड तोड़ने, पुलिसकर्मियों पर पथराव करने, सरकारी वाहनों में तोड़फोड़ करने और सार्वजनिक संपत्ति को नुकसान पहुंचाने में अहम भूमिका निभाई। घटनास्थल से मिले पत्थर, डंडे, टूटी टाइलें, बैरिकेड के हिस्से और अन्य सामान को जब्त कर फारेंसिक जांच के लिए भेजा गया है।

पुलिस अब इस बात की भी जांच कर रही है कि हिंसा अचानक भड़की या इसके पीछे पहले से कोई योजना बनाई गई थी। इसके लिए प्रदर्शन से जुड़े लोगों के संपर्क, इंटरनेट मीडिया समूहों, संभावित आर्थिक मदद और अलग-अलग राज्यों से आए लोगों की भूमिका की जांच की जा रही है।

जांच एजेंसियां यह पता लगाने की कोशिश कर रही हैं कि क्या किसी संगठन या नेटवर्क ने प्रदर्शन को प्रभावित करने का प्रयास किया था। यदि जांच में किसी संगठित साजिश या बाहरी समर्थन के प्रमाण मिलते हैं तो आरोपितों के खिलाफ गंभीर धाराओं में कार्रवाई की जा सकती है।

इस पूरे मामले में घायल पुलिसकर्मियों के बयान भी महत्वपूर्ण साक्ष्य माने जा रहे हैं। पुलिस अधिकारियों का कहना है कि मौके पर मौजूद जवानों के बयान, डिजिटल सबूत, सीसीटीवी फुटेज और फारेंसिक रिपोर्ट के आधार पर प्रत्येक आरोपी की भूमिका तय की जाएगी।

दिल्ली पुलिस का कहना है कि जांच पूरी तरह निष्पक्ष तरीके से की जा रही है। जिन लोगों की संलिप्तता सामने आएगी, उनके खिलाफ कानून के अनुसार सख्त कार्रवाई की जाएगी। फिलहाल पुलिस का पूरा ध्यान उपद्रव के पीछे की वास्तविक वजह, शामिल लोगों की पहचान और किसी संभावित साजिश का पर्दाफाश करने पर केंद्रित है।

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