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संसद परिसर में वेशभूषा को लेकर घिरे पप्पू यादव, हिंदू सेना ने उठाई आवाज

नई दिल्ली : लोकसभा सांसद पप्पू यादव के खिलाफ हिंदू सेना ने कार्रवाई की मांग की है। संगठन ने आरोप लगाया है कि संसद परिसर में संत का वेश धारण कर आने से सनातन संस्कृति और करोड़ों लोगों की धार्मिक भावनाओं को ठेस पहुंची है। इस मामले को लेकर हिंदू सेना के राष्ट्रीय अध्यक्ष विष्णु गुप्ता ने लोकसभा अध्यक्ष को पत्र लिखकर अपनी आपत्ति दर्ज कराई है और सांसद के खिलाफ उचित कार्रवाई की मांग की है।
हिंदू सेना का कहना है कि हाल ही में संसदीय सत्र के दौरान पप्पू यादव संसद परिसर में पुजारी के रूप में नजर आए थे। संगठन ने इस कदम को राजनीतिक स्टंट बताते हुए कहा कि इस तरह का प्रदर्शन संसद जैसे गरिमामय स्थान की मर्यादा के अनुरूप नहीं है। हिंदू सेना ने अपने पत्र में दावा किया कि सांसद के इस कदम से सनातन धर्म की आस्था और धार्मिक प्रतीकों का अपमान हुआ है।
संगठन की ओर से जारी बयान में कहा गया कि भगवा वस्त्र और संत का स्वरूप हिंदू धर्म में विशेष महत्व रखते हैं। इन्हें धार्मिक और आध्यात्मिक परंपराओं से जोड़ा जाता है। हिंदू सेना का आरोप है कि पप्पू यादव ने इन प्रतीकों का इस्तेमाल राजनीतिक संदेश देने के लिए किया, जिससे धार्मिक भावनाएं आहत हुईं।
हिंदू सेना के राष्ट्रीय अध्यक्ष विष्णु गुप्ता ने लोकसभा अध्यक्ष से आग्रह किया है कि संसद की गरिमा बनाए रखने के लिए इस मामले में हस्तक्षेप किया जाए। पत्र में सांसद के व्यवहार की जांच कर उचित कार्रवाई करने की मांग की गई है। हालांकि, इस मामले में अभी तक लोकसभा सचिवालय की ओर से किसी कार्रवाई की आधिकारिक जानकारी सामने नहीं आई है।
यह विवाद उस समय शुरू हुआ जब पप्पू यादव संसद परिसर में अलग वेशभूषा में पहुंचे थे। उनके इस रूप को लेकर सोशल मीडिया और राजनीतिक गलियारों में भी चर्चा शुरू हो गई। जहां कुछ लोगों ने इसे मुद्दों को उठाने का एक तरीका बताया, वहीं कुछ संगठनों ने इसे धार्मिक प्रतीकों के साथ जोड़कर आपत्ति जताई।
हिंदू सेना ने अपने पत्र में भगवान श्री राम और सनातन परंपराओं का भी उल्लेख किया है। संगठन का कहना है कि धार्मिक आस्था से जुड़े प्रतीकों को राजनीतिक विरोध या प्रदर्शन के लिए इस्तेमाल नहीं किया जाना चाहिए। उन्होंने कहा कि संसद देश का सर्वोच्च लोकतांत्रिक मंच है और वहां सांसदों से गरिमा बनाए रखने की अपेक्षा की जाती है।
दूसरी ओर, पप्पू यादव की ओर से इस मामले पर अभी कोई विस्तृत प्रतिक्रिया सामने नहीं आई है। उनके समर्थक पहले भी कहते रहे हैं कि वह अपने राजनीतिक संदेश और जनता से जुड़े मुद्दों को अलग-अलग तरीकों से उठाते रहे हैं।
राजनीतिक विश्लेषकों का मानना है कि संसद परिसर में किसी भी तरह की प्रतीकात्मक गतिविधि अक्सर चर्चा का विषय बन जाती है। खासकर धार्मिक वेशभूषा या प्रतीकों से जुड़े मामलों में राजनीतिक और सामाजिक प्रतिक्रियाएं तेज हो जाती हैं।
फिलहाल हिंदू सेना की शिकायत के बाद यह मामला फिर से सुर्खियों में आ गया है। अब नजर इस बात पर है कि लोकसभा अध्यक्ष कार्यालय इस शिकायत पर क्या कदम उठाता है। वहीं, राजनीतिक दलों और सामाजिक संगठनों की प्रतिक्रियाएं भी इस विवाद को आगे बढ़ा सकती हैं।





