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राजनाथ-हेगसेथ बैठक में उठा पाकिस्तान का मुद्दा, सैन्य मदद पर भारत ने जताई चिंता
nidhi
29 Oct 2026 8:54 AM IST

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पाकिस्तान को सैन्य तकनीक देने पर भारत की आपत्ति
नई दिल्ली: रक्षा मंत्री राजनाथ सिंह ने पाकिस्तान को अमेरिकी सैन्य सहायता और संवेदनशील तकनीक दिए जाने पर भारत की गंभीर चिंता जताई है। फिलीपींस के सेबू में अमेरिकी समकक्ष पीट हेगसेथ के साथ बैठक में उन्होंने पाकिस्तान के एफ-16 लड़ाकू विमानों से जुड़े सहायता पैकेज का मुद्दा उठाया। बातचीत से परिचित सूत्रों के हवाले से प्रकाशित रिपोर्टों के अनुसार, राजनाथ ने आगाह किया कि पाकिस्तान को उपलब्ध कराई गई उन्नत तकनीक किसी तीसरे देश तक पहुंच सकती है। दोनों नेताओं ने भारत-अमेरिका रक्षा सहयोग की प्रगति, सैन्य तकनीक, समुद्री सुरक्षा और आतंकवाद के खिलाफ साझेदारी पर चर्चा की। रक्षा मंत्रालय ने बैठक की पुष्टि करते हुए बताया कि दोनों पक्षों ने दस वर्षीय रक्षा ढांचे के तहत आगे सहयोग बढ़ाने के अवसरों की समीक्षा की।
एफ-16 सहायता पैकेज पर भारत की आपत्ति
टाइम्स ऑफ इंडिया की रिपोर्ट के अनुसार, राजनाथ सिंह ने पाकिस्तान के एफ-16 कार्यक्रम से संबंधित उन्नत सहायता पैकेज पर भारत का विरोध दर्ज कराया। भारत की चिंता विमान के रखरखाव तक सीमित नहीं है। संवेदनशील सैन्य प्रणालियों और तकनीकी जानकारी की सुरक्षा भी इस आपत्ति का महत्वपूर्ण पहलू है। संचार तथा पहचान से जुड़ी सुरक्षित प्रणालियां, मिशन की योजना बनाने के उपकरण, स्पेयर पार्ट्स, सिम्युलेटर, प्रशिक्षण और लॉजिस्टिक्स सहायता का उल्लेख है। ऐसी सहायता विमान बेड़े के संचालन और रखरखाव से जुड़ी होती है। इसे नए लड़ाकू विमान देने की घोषणा के रूप में प्रस्तुत करना सही नहीं होगा।
तीसरे देश तक तकनीक पहुंचने की आशंका
भारत ने यह सवाल उठाया कि संवेदनशील तकनीक पाकिस्तान को सौंपे जाने के बाद उसके इस्तेमाल और पहुंच पर कितना नियंत्रण रह सकेगा। इकोनॉमिक टाइम्स के मुताबिक, रक्षा मंत्री ने हथियारों से संबंधित तकनीकी जानकारी के तीसरे देशों तक पहुंचने के जोखिम से अमेरिकी पक्ष को अवगत कराया। यह तकनीक के संभावित हस्तांतरण को लेकर जताई गई आशंका है। उपलब्ध विवरण में इस बैठक के दौरान किसी वास्तविक तकनीकी लीक का नया प्रमाण सार्वजनिक किए जाने की जानकारी नहीं है। इसलिए चिंता और किसी प्रमाणित घटना के बीच अंतर रखना जरूरी है। कुछ मीडिया रिपोर्टों ने तीसरे देश के संदर्भ को चीन या ईरान की ओर संकेत माना है। हालांकि इसे रक्षा मंत्री द्वारा इन देशों का नाम लेकर दिया गया पुष्ट बयान नहीं माना जा सकता। टाइम्स ऑफ इंडिया ने भी इन नामों का उल्लेख संभावित संकेत के रूप में किया है।
आतंकवाद पर स्पष्ट रुख की मांग
बैठक में आतंकवाद का मुद्दा भी प्रमुखता से उठा। प्रकाशित रिपोर्टों के अनुसार, राजनाथ सिंह ने अमेरिकी पक्ष को आतंकवाद पर दोहरे मापदंड से बचने की जरूरत बताई। उन्होंने पाकिस्तान को सैन्य सहायता दिए जाने से जुड़ी भारतीय चिंताओं के साथ क्षेत्रीय सुरक्षा का प्रश्न भी सामने रखा। रक्षा मंत्रालय की आधिकारिक विज्ञप्ति के अनुसार, राजनाथ ने आतंकवादी संगठनों को समर्थन, प्रशिक्षण या वित्तीय मदद देने वाले देशों के प्रति समझौता रहित और शून्य सहिष्णुता का दृष्टिकोण अपनाने पर जोर दिया। दोनों पक्षों ने आतंकवाद समाप्त करने की साझा प्रतिबद्धता दोहराई।
आधिकारिक बयान में हेगसेथ द्वारा सीमा पार आतंकवाद के खिलाफ भारत की लड़ाई में अमेरिकी एकजुटता और समर्थन दोहराने की जानकारी भी दी गई है। हालांकि पाकिस्तान के एफ-16 सहायता पैकेज को रोकने या बदलने की कोई घोषणा उपलब्ध बैठक विवरण में नहीं है।
रक्षा सहयोग बढ़ाने पर भी हुई चर्चा
पाकिस्तान संबंधी आपत्तियों के साथ दोनों देशों के बीच सहयोग आगे बढ़ाने पर बातचीत जारी रही। इकोनॉमिक टाइम्स की रिपोर्ट के मुताबिक, सैन्य तैयारियों, तकनीक साझा करने और रक्षा उद्योगों के बीच तालमेल बढ़ाने के रास्तों पर विचार किया गया। सैन्य स्तर पर आदान-प्रदान और समुद्री सुरक्षा सहयोग भी चर्चा में शामिल रहे। राजनाथ सिंह ने अपनी सार्वजनिक पोस्ट में दस वर्षीय रक्षा ढांचे की प्रगति की समीक्षा का उल्लेख किया। इसमें सैन्य तकनीक, सूचना साझा करने और सह-उत्पादन के क्षेत्रों में रणनीतिक तालमेल की बात कही गई। रक्षा आपूर्ति शृंखलाओं को मजबूत करना भी बैठक के व्यापक एजेंडे में रहा।
आधिकारिक बयान और सूत्रों की जानकारी में अंतर
इस घटनाक्रम में आधिकारिक पुष्टि और सूत्रों के हवाले से सामने आई जानकारी को अलग समझना महत्वपूर्ण है। रक्षा मंत्रालय ने बैठक, रक्षा साझेदारी की समीक्षा और आतंकवाद के विरुद्ध साझा रुख का विवरण जारी किया है। पाकिस्तान को तकनीक देने पर चेतावनी और एफ-16 पैकेज संबंधी आपत्ति का विस्तृत उल्लेख मीडिया रिपोर्टों में सूत्रों के आधार पर सामने आया है। बैठक से स्पष्ट है कि भारत ने सहयोग के एजेंडे के साथ अपनी सुरक्षा चिंताएं भी अमेरिकी नेतृत्व के सामने रखी हैं। अब इस मुद्दे पर किसी ठोस नीतिगत बदलाव का आकलन आगे आने वाले आधिकारिक निर्णयों से होगा। फिलहाल अमेरिका द्वारा पैकेज वापस लेने या भारत की आपत्ति पर उसे स्थगित करने की पुष्टि नहीं हुई है।
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