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- BRICS मेन्यू विवाद पर...

नई दिल्ली। 18वें BRICS समिट के दौरान आयोजित गाला डिनर के मेन्यू को लेकर उठे विवाद ने अब राजनीतिक रंग ले लिया है। ऑल इंडिया मजलिस-ए-इत्तेहादुल मुस्लिमीन (AIMIM) प्रमुख और हैदराबाद से सांसद असदुद्दीन ओवैसी ने शाकाहारी भोजन को लेकर उठे विवाद पर प्रतिक्रिया देते हुए भारत की विविधता का मुद्दा उठाया है। उन्होंने कहा कि भारत की पहचान केवल उसकी संस्कृति और भाषाओं से नहीं, बल्कि अलग-अलग समुदायों की खान-पान की परंपराओं से भी बनती है।
BRICS समिट के दौरान गाला डिनर में परोसे गए भोजन को लेकर सोशल मीडिया और राजनीतिक हलकों में चर्चा शुरू हुई थी। इसी विवाद पर अपनी प्रतिक्रिया देते हुए ओवैसी ने कहा कि भारत एक विविधताओं वाला देश है, जहां अलग-अलग समुदायों की भोजन संबंधी पसंद और परंपराएं अलग हैं। उनके मुताबिक, किसी भी बड़े अंतरराष्ट्रीय आयोजन में भारत की इस विविधता को ध्यान में रखना जरूरी है।
ओवैसी ने कहा कि भारत की विविधता में अलग-अलग संस्कृतियां, धर्म, भाषाएं और खान-पान की आदतें शामिल हैं। उन्होंने अपने बयान में यह भी कहा कि देश में अल्पसंख्यक समुदायों के भीतर भी भोजन की पसंद एक जैसी नहीं है। उन्होंने दावा किया कि लगभग 20 प्रतिशत अल्पसंख्यक शाकाहारी हैं। उनके बयान का उद्देश्य यह रेखांकित करना था कि भोजन को लेकर किसी एक समुदाय या वर्ग की पसंद को पूरे देश का प्रतिनिधित्व मानना उचित नहीं होगा।
उन्होंने कहा, "इस देश में लगभग 20% अल्पसंख्यक शाकाहारी हैं... भारत की विविधता में अलग-अलग संस्कृतियां, धर्म, भाषाएं और खान-पान की आदतें शामिल हैं।" ओवैसी ने आगे कहा कि उन्हें यह जानकारी नहीं है कि समिट में शामिल कितने लोगों को मेन्यू पसंद आया या नहीं आया। उन्होंने एक राजनयिक के हवाले से भी भारत की विविधता को सांस्कृतिक के साथ-साथ धार्मिक और भाषाई विविधता से जोड़कर देखने की बात कही।
BRICS समिट के गाला डिनर के मेन्यू को लेकर चर्चा ऐसे समय में सामने आई है, जब 18वें BRICS समिट के नतीजों को लेकर सरकार और विपक्ष के बीच राजनीतिक बयानबाजी जारी है। विपक्षी दलों ने अलग-अलग मुद्दों को लेकर सरकार पर सवाल उठाए हैं, जबकि भारतीय जनता पार्टी और केंद्र सरकार की ओर से समिट के दौरान भारत की भूमिका और हासिल किए गए परिणामों को महत्वपूर्ण बताया जा रहा है।
मेन्यू को लेकर उठा विवाद इस राजनीतिक खींचतान में एक नया मुद्दा बन गया है। हालांकि, मूल रूप से यह मामला भोजन और मेहमानों की पसंद से जुड़ा था, लेकिन राजनीतिक दलों के बयानों के बाद इस पर व्यापक चर्चा शुरू हो गई। सोशल मीडिया पर भी लोगों ने गाला डिनर के मेन्यू और उसमें शामिल व्यंजनों को लेकर अपनी-अपनी राय व्यक्त की।
भारत में खान-पान को लेकर क्षेत्रीय और सामुदायिक विविधता काफी व्यापक है। देश के अलग-अलग राज्यों में स्थानीय परिस्थितियों, परंपराओं और संस्कृति के आधार पर भोजन की आदतें अलग-अलग हैं। कहीं शाकाहारी भोजन प्रमुख है तो कहीं मांसाहारी भोजन सामान्य खान-पान का हिस्सा है। इसके अलावा बड़ी संख्या में ऐसे लोग भी हैं, जिनकी भोजन संबंधी पसंद व्यक्तिगत या पारिवारिक परंपराओं से तय होती है।
ओवैसी ने इसी विविधता को अपने बयान का आधार बनाया। उनका कहना है कि भारत को एकरूपता के बजाय विविधता के नजरिए से देखा जाना चाहिए। उनके मुताबिक, धार्मिक और सांस्कृतिक पहचान के साथ खान-पान भी लोगों की सामाजिक और क्षेत्रीय पहचान का हिस्सा है।
इस विवाद ने यह सवाल भी खड़ा किया है कि अंतरराष्ट्रीय स्तर के आयोजनों में मेहमानों के लिए भोजन का चयन किस तरह किया जाना चाहिए। ऐसे आयोजनों में अलग-अलग देशों और समुदायों से आने वाले लोगों की भोजन संबंधी आवश्यकताएं अलग हो सकती हैं। ऐसे में मेन्यू तैयार करते समय विभिन्न विकल्प उपलब्ध कराने की परंपरा कई अंतरराष्ट्रीय आयोजनों में देखने को मिलती है।
हालांकि, BRICS समिट का मुख्य उद्देश्य सदस्य देशों के बीच आर्थिक, राजनीतिक और रणनीतिक सहयोग को बढ़ावा देना था। समिट के दौरान वैश्विक अर्थव्यवस्था, विकास, बहुपक्षीय सहयोग और अंतरराष्ट्रीय मुद्दों पर चर्चा हुई। इसके बावजूद गाला डिनर का मेन्यू राजनीतिक बहस का हिस्सा बन गया है।
विपक्षी दलों और BJP के बीच पहले से चल रही राजनीतिक बहस में इस मुद्दे के जुड़ने से सोशल मीडिया पर भी चर्चा तेज हुई है। एक तरफ जहां कुछ लोगों ने इसे भारत की खान-पान संबंधी विविधता से जोड़कर देखा, वहीं दूसरी ओर कुछ लोगों ने इसे अनावश्यक राजनीतिक विवाद करार दिया।
ओवैसी के बयान ने इस बहस को एक नया आयाम दिया है। उन्होंने भोजन को केवल व्यक्तिगत पसंद का विषय न मानकर भारत की व्यापक सामाजिक और सांस्कृतिक विविधता का हिस्सा बताया। उनका कहना है कि देश की वास्तविक पहचान उसकी विविधता में है और इस विविधता में भोजन की परंपराओं को भी शामिल किया जाना चाहिए।
फिलहाल BRICS समिट के मेन्यू को लेकर उठा विवाद राजनीतिक बहस का हिस्सा बन गया है। समिट के व्यापक एजेंडे और अंतरराष्ट्रीय स्तर पर भारत की भूमिका के बीच गाला डिनर के भोजन को लेकर चर्चा भले ही एक छोटा मुद्दा हो, लेकिन ओवैसी के बयान के बाद इसने भारत की सांस्कृतिक, धार्मिक और खान-पान संबंधी विविधता पर एक नई बहस जरूर छेड़ दी है।





