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यासीन मलिक समेत सात आरोपियों पर मनी लॉन्ड्रिंग के आरोप तय करने का आदेश

नई दिल्ली। दिल्ली की एक विशेष अदालत ने प्रतिबंधित जम्मू-कश्मीर लिबरेशन फ्रंट यानी JKLF के जेल में बंद प्रमुख यासीन मलिक और छह अन्य आरोपियों के खिलाफ मनी लॉन्ड्रिंग के आरोप तय करने का आदेश दिया है। यह मामला कथित रूप से पाकिस्तान और अन्य विदेशी स्रोतों से हवाला के जरिए धन जुटाने और उसे जम्मू-कश्मीर में अलगाववादी गतिविधियों के लिए इस्तेमाल करने के आरोपों से जुड़ा है।
विशेष एनआईए जज प्रशांत शर्मा ने 9 सितंबर को पारित आदेश में कहा कि सभी सात आरोपियों के खिलाफ प्रथम दृष्टया पर्याप्त सामग्री मौजूद है, जिससे उनके खिलाफ धन शोधन निवारण अधिनियम यानी PMLA की धारा 3 के तहत अपराध का मजबूत संदेह बनता है। इस अपराध के लिए धारा 4 के तहत सजा का प्रावधान है। अदालत का यह आदेश 1 अक्टूबर को सार्वजनिक रूप से सामने आया।
मामले में यासीन मलिक के अलावा जहूर अहमद शाह वटाली, अब्दुल राशिद शेख, शबीर अहमद शाह, मसरत आलम, नवल किशोर कपूर और ट्राइसन फार्म्स एंड कंस्ट्रक्शंस प्राइवेट लिमिटेड को आरोपी बनाया गया है। अदालत ने कहा कि उपलब्ध दस्तावेजों और जांच सामग्री के आधार पर इन सभी के खिलाफ आरोप तय किए जाने का आधार बनता है।
प्रवर्तन निदेशालय का आरोप है कि पाकिस्तान और अन्य विदेशी स्रोतों से धन हवाला चैनलों तथा विभिन्न माध्यमों के जरिए भारत पहुंचाया गया। एजेंसी के मुताबिक यह रकम जम्मू-कश्मीर में अलगाववादी और कथित विध्वंसक गतिविधियों के लिए इस्तेमाल की गई। इन आरोपों की सत्यता अब मुकदमे की प्रक्रिया के दौरान साक्ष्यों के आधार पर परखी जाएगी।
ED के अनुसार इस मामले से जुड़ी कथित आपराधिक गतिविधियों से करीब 8.94 करोड़ रुपये की अपराध से अर्जित आय पैदा हुई। एजेंसी का आरोप है कि इस रकम को अलग-अलग माध्यमों से प्राप्त किया गया, स्थानांतरित किया गया, छिपाया गया और विभिन्न आरोपियों द्वारा इस्तेमाल किया गया।
जांच एजेंसी ने यह भी आरोप लगाया है कि दिल्ली स्थित पाकिस्तान उच्चायोग से जुड़े माध्यमों और नकद कुरियर के जरिए कुछ रकम हुर्रियत नेतृत्व तक पहुंचाई गई। ED के मुताबिक यासीन मलिक समेत कुछ आरोपियों को वटाली के माध्यम से विदेशी फंड मिले। एजेंसी ने 2015-16 के दौरान हुए कथित लेनदेन का भी जिक्र किया है।
ED की जांच में कुछ दस्तावेजों और ईमेल रिकॉर्ड का भी सहारा लिया गया है। एजेंसी का दावा है कि इन रिकॉर्ड से यह संकेत मिलता है कि विदेशों से धन जुटाने और उसे जम्मू-कश्मीर में अलगाववादी गतिविधियों के समर्थन में इस्तेमाल करने के लिए एक नेटवर्क सक्रिय था। अदालत ने आरोप तय करने के चरण पर इन सामग्रियों को पर्याप्त मानते हुए ट्रायल आगे बढ़ाने का आदेश दिया है।
यह मनी लॉन्ड्रिंग मामला राष्ट्रीय जांच एजेंसी यानी NIA द्वारा 2017 में दर्ज एक बड़े आतंक वित्तपोषण मामले से जुड़ा है। NIA ने उस मामले में भारतीय दंड संहिता की आपराधिक साजिश और राज्य के खिलाफ युद्ध से जुड़ी धाराओं के साथ गैरकानूनी गतिविधियां रोकथाम अधिनियम यानी UAPA की कई धाराएं लगाई थीं।
इसी NIA मामले को आधार बनाकर ED ने 14 जून 2017 को मनी लॉन्ड्रिंग की जांच शुरू की थी। बाद में 2020 में मुख्य अभियोजन शिकायत दाखिल की गई, जबकि जनवरी 2023 में दायर पूरक शिकायत में यासीन मलिक को भी आरोपी बनाया गया।
ED का आरोप है कि यासीन मलिक ने 2015-16 में वटाली के जरिए करीब 30.75 लाख रुपये प्राप्त किए थे। एजेंसी ने NIA की पूरक चार्जशीट का भी उल्लेख किया, जिसमें 2013 के दौरान सऊदी अरब से कथित तौर पर 15.75 लाख रुपये मिलने का आरोप लगाया गया था। इन रकम को जांच एजेंसी ने कथित अपराध से अर्जित आय का हिस्सा माना है।
अदालत ने अपने आदेश में स्पष्ट किया कि आरोप तय करने के चरण पर यह देखना होता है कि आरोपी के खिलाफ ऐसा पर्याप्त आधार मौजूद है या नहीं, जिससे मुकदमा चलाया जा सके। इस स्तर पर अदालत अंतिम रूप से दोष तय नहीं करती। दोषसिद्धि या बरी होने का फैसला मुकदमे के दौरान पेश किए जाने वाले साक्ष्यों और बचाव पक्ष की दलीलों के बाद होगा।
बुधवार को औपचारिक रूप से आरोप तय किए जाने की प्रक्रिया के दौरान यासीन मलिक और कुछ अन्य आरोपियों को सुरक्षा कारणों से अदालत में पेश नहीं किया जा सका। इसके बाद अदालत ने ED को निर्देश दिया कि न्यायिक हिरासत में बंद आरोपियों के हस्ताक्षर आवश्यक दस्तावेजों पर लिए जाएं। मामले की अगली सुनवाई 30 अक्टूबर को निर्धारित की गई है।
यासीन मलिक फिलहाल जेल में बंद है। वह JKLF का प्रमुख चेहरा रहा है और उसके खिलाफ अलग-अलग मामलों में न्यायिक कार्यवाही चलती रही है। मौजूदा आदेश विशेष रूप से PMLA से जुड़े मनी लॉन्ड्रिंग मामले तक सीमित है।
अदालत ने इस मामले में सभी सात आरोपियों के खिलाफ मजबूत संदेह होने की बात कही है, लेकिन यह भी ध्यान रखना जरूरी है कि आरोप तय होना दोषसिद्धि नहीं है। अब अभियोजन पक्ष को मुकदमे के दौरान अपने आरोपों को साक्ष्यों के जरिए साबित करना होगा।
बचाव पक्ष को भी दस्तावेजों, गवाहों और जांच एजेंसियों के दावों को चुनौती देने का अवसर मिलेगा। इसी प्रक्रिया के बाद अदालत यह तय करेगी कि मनी लॉन्ड्रिंग का अपराध सिद्ध होता है या नहीं।
मामला राजनीतिक और सुरक्षा दोनों दृष्टि से महत्वपूर्ण माना जा रहा है क्योंकि इसमें कथित विदेशी फंडिंग, हवाला और जम्मू-कश्मीर में अलगाववादी गतिविधियों के बीच संबंध की जांच की जा रही है।
फिलहाल विशेष अदालत के 9 सितंबर के आदेश के बाद यासीन मलिक और अन्य छह आरोपियों के खिलाफ PMLA के तहत मुकदमे का रास्ता साफ हो गया है। अगली सुनवाई 30 अक्टूबर को होगी, जहां आगे की न्यायिक प्रक्रिया जारी रहेगी।





