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CEC के खिलाफ विपक्ष का प्रतीकात्मक महाभियोग, राहुल गांधी ने साधा निशाना
Ratna Netam
31 Oct 2026 9:59 PM IST

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नई दिल्ली। मुख्य चुनाव आयुक्त (CEC) ज्ञानेश कुमार के खिलाफ विपक्षी INDIA गठबंधन ने शनिवार, 31 अक्टूबर 2026 को दिल्ली में प्रतीकात्मक जन महाभियोग की कार्यवाही आयोजित की। इस दौरान विपक्षी दलों ने एक प्रस्ताव पारित कर मुख्य चुनाव आयुक्त को पद से हटाने और उनके खिलाफ कानूनी कार्रवाई की मांग उठाई। कांग्रेस अध्यक्ष मल्लिकार्जुन खरगे ने प्रस्ताव पेश किया, जबकि लोकसभा में नेता प्रतिपक्ष राहुल गांधी ने अपने संबोधन में चुनाव आयोग की कार्यप्रणाली पर सवाल उठाए। उन्होंने कहा कि विपक्ष इस मुद्दे को लेकर पीछे हटने वाला नहीं है और संबंधित लोगों को जवाबदेह बनाएगा।यह कार्यक्रम कांग्रेस अध्यक्ष मल्लिकार्जुन खरगे के दिल्ली स्थित आवास 10 राजाजी मार्ग पर आयोजित किया गया। पूर्व लोकसभा अध्यक्ष मीरा कुमार ने प्रतीकात्मक कार्यवाही की अध्यक्षता की। इस आयोजन में INDIA गठबंधन के विभिन्न दलों के सांसदों, नेताओं और नागरिक समाज से जुड़े लोगों ने हिस्सा लिया। विपक्ष ने इसे मतदाता अधिकारों और लोकतांत्रिक संस्थाओं की निष्पक्षता से जुड़ा मुद्दा बताया।
महाभियोग की प्रतीकात्मक कार्यवाही में खरगे ने पढ़े आरोप
कार्यक्रम के दौरान मल्लिकार्जुन खरगे ने मुख्य चुनाव आयुक्त ज्ञानेश कुमार के खिलाफ प्रस्ताव पढ़ा। इसमें आरोप लगाया गया कि चुनाव आयोग ने विशेष गहन पुनरीक्षण (SIR) के माध्यम से मतदाता सूची में मनमाने बदलाव की अनुमति दी और चुनावी प्रक्रिया को प्रभावित करने का काम किया। विपक्ष का दावा है कि मतदाता सूची से वास्तविक मतदाताओं के नाम हटाए जा रहे हैं और कुछ नए नाम जोड़ने की प्रक्रिया में पारदर्शिता का अभाव है।खरगे ने कहा कि विपक्ष की लड़ाई किसी व्यक्ति विशेष के खिलाफ नहीं, बल्कि चुनाव आयोग की संवैधानिक गरिमा और निष्पक्षता बनाए रखने के लिए है। उन्होंने मांग की कि मुख्य चुनाव आयुक्त को पद से हटाया जाए, SIR प्रक्रिया पर रोक लगाई जाए और मुख्य चुनाव आयुक्त तथा अन्य चुनाव आयुक्तों की नियुक्ति से संबंधित 2023 के कानून में बदलाव किया जाए।प्रतीकात्मक कार्यवाही में पूर्व लोकसभा अध्यक्ष मीरा कुमार ने अध्यक्षता की। इस दौरान विपक्षी सांसदों और अन्य प्रतिभागियों ने चुनावी व्यवस्था तथा मतदाता अधिकारों से जुड़े मुद्दे उठाए। INDIA गठबंधन ने हाथ उठाकर प्रस्ताव पारित किया। विपक्ष ने आरोप लगाया कि चुनाव आयोग की मौजूदा कार्यप्रणाली लोकतांत्रिक व्यवस्था में जनता के भरोसे को प्रभावित कर रही है।
राहुल गांधी ने चुनाव आयोग पर साधा निशाना
कार्यक्रम में राहुल गांधी ने अपने संबोधन के दौरान चुनाव आयोग और केंद्र सरकार पर निशाना साधा। उन्होंने कहा कि विपक्ष इस मुद्दे को लेकर लगातार आवाज उठाता रहेगा। उनके संबोधन का संदेश था कि चुनावी प्रक्रिया में कथित गड़बड़ियों और मतदाताओं के अधिकारों से जुड़े सवालों को बिना जवाब मिले नहीं छोड़ा जाएगा।राहुल गांधी ने कहा कि विपक्ष की लड़ाई केवल किसी राजनीतिक दल की लड़ाई नहीं है, बल्कि देश के लोकतांत्रिक अधिकारों की रक्षा से जुड़ी है। उन्होंने मुख्य चुनाव आयुक्त के खिलाफ कार्रवाई की मांग का समर्थन करते हुए कहा कि यदि चुनावी प्रक्रिया में अनियमितताओं के आरोप सामने आते हैं तो उनकी जवाबदेही तय होनी चाहिए।उन्होंने अपने कड़े राजनीतिक संदेश में कहा, ''आपको भागने नहीं दूंगा।'' राहुल गांधी ने यह भी संकेत दिया कि INDIA गठबंधन इस मुद्दे को संसद से लेकर सड़क तक उठाता रहेगा। इससे पहले भी वह चुनाव आयोग की कार्यप्रणाली, मतदाता सूची के पुनरीक्षण और कथित वोट चोरी को लेकर केंद्र सरकार पर सवाल उठाते रहे हैं।
SIR को लेकर विपक्ष और चुनाव आयोग आमने-सामने
इस पूरे विवाद के केंद्र में विशेष गहन पुनरीक्षण यानी SIR प्रक्रिया है। चुनाव आयोग मतदाता सूची को अद्यतन और शुद्ध करने के उद्देश्य से इस प्रक्रिया को संचालित कर रहा है। वहीं विपक्षी दलों का आरोप है कि इस प्रक्रिया के दौरान कई स्थानों पर वास्तविक मतदाताओं के नाम हटाए जाने की आशंका है।INDIA गठबंधन का कहना है कि मतदाता सूची में किसी भी तरह की गड़बड़ी सीधे नागरिकों के मतदान के अधिकार को प्रभावित कर सकती है। विपक्ष ने विशेष रूप से गरीबों, महिलाओं, युवाओं और कमजोर वर्गों के मताधिकार को लेकर चिंता जताई है।विपक्षी नेताओं का आरोप है कि चुनाव आयोग को सभी राजनीतिक दलों के प्रति समान व्यवहार करना चाहिए और मतदाता सूची में होने वाले बदलावों की पूरी जानकारी सार्वजनिक करनी चाहिए। उनका कहना है कि चुनावी व्यवस्था में पारदर्शिता और निष्पक्षता बनाए रखना आयोग की संवैधानिक जिम्मेदारी है।हालांकि, विपक्ष के आरोपों को चुनाव आयोग की ओर से स्वीकार किए गए तथ्य के रूप में नहीं देखा जा सकता। चुनाव आयोग का रुख रहा है कि उसके फैसले संस्थागत प्रक्रिया के तहत लिए जाते हैं। SIR को लेकर राजनीतिक विवाद के बीच आयोग की निष्पक्षता और प्रक्रिया की पारदर्शिता पर बहस तेज हो गई है।
बीजेपी ने विपक्ष की कार्यवाही को बताया मेलोड्रामा
दूसरी तरफ भारतीय जनता पार्टी ने INDIA गठबंधन के इस आयोजन पर सवाल उठाए। बीजेपी नेताओं ने विपक्ष की प्रतीकात्मक महाभियोग कार्यवाही को राजनीतिक दिखावा और मेलोड्रामा करार दिया। सत्तारूढ़ दल का कहना है कि संवैधानिक पद पर बैठे व्यक्ति के खिलाफ इस तरह की प्रतीकात्मक कार्यवाही से कोई कानूनी परिणाम नहीं निकलता।बीजेपी ने राहुल गांधी के आरोपों पर भी सवाल उठाए और विपक्ष से अपने दावों के समर्थन में ठोस सबूत पेश करने को कहा। इससे पहले कांग्रेस नेता ने आरोप लगाया था कि केंद्रीय गृह मंत्री अमित शाह विपक्ष की रैली में शामिल होने के लिए दिल्ली आ रहे लोगों को रोकने का प्रयास कर रहे हैं। बीजेपी प्रवक्ता संबित पात्रा ने इन आरोपों को खारिज करते हुए राहुल गांधी से सबूत मांगे थे।बीजेपी नेताओं ने विपक्ष के राजनीतिक कार्यक्रमों और उनके समय को लेकर भी सवाल उठाए। पार्टी का कहना है कि विपक्ष को संवैधानिक संस्थाओं पर आरोप लगाने के बजाय तथ्यों और प्रमाणों के आधार पर अपनी बात रखनी चाहिए। इस तरह CEC के मुद्दे पर सत्ता पक्ष और विपक्ष के बीच राजनीतिक टकराव और गहरा गया है।
1 नवंबर को रामलीला मैदान में होगी विपक्ष की रैली
प्रतीकात्मक महाभियोग की कार्यवाही के बाद INDIA गठबंधन ने 1 नवंबर को दिल्ली के रामलीला मैदान में बड़ी रैली आयोजित करने की तैयारी की है। इस रैली का नाम 'वोट बचाओ, देश बचाओ' रखा गया है। इसके तहत विपक्षी दल मतदाता सूची में कथित अनियमितताओं और SIR प्रक्रिया के खिलाफ अपनी आवाज बुलंद करेंगे।राहुल गांधी ने राजनीतिक दलों के अलावा सामाजिक संगठनों, नागरिक समाज, पत्रकारों और आम नागरिकों से भी रैली में शामिल होने की अपील की है। प्रस्तावित कार्यक्रम के अनुसार, मार्च मिंटो रोड से शुरू होकर अजमेरी गेट होते हुए रामलीला मैदान पहुंचेगा।विपक्षी गठबंधन का दावा है कि इस आंदोलन के जरिए देशभर में मतदाताओं के अधिकारों से जुड़े सवालों को प्रमुखता से उठाया जाएगा। वहीं बीजेपी भी इस राजनीतिक घटनाक्रम के जवाब में अपनी रणनीति तैयार कर रही है। पार्टी की ओर से दिल्ली के हरि नगर में 1 नवंबर को जवाबी प्रदर्शन की योजना बनाई गई है।गौरतलब है कि CEC के खिलाफ पहले भी संसद में महाभियोग जैसा प्रस्ताव लाने की कोशिश की गई थी। विपक्ष की ओर से 12 मार्च को लोकसभा और राज्यसभा के सदस्यों के हस्ताक्षरों के साथ नोटिस दिया गया था, लेकिन 6 अप्रैल को लोकसभा अध्यक्ष ओम बिरला और राज्यसभा के सभापति सीपी राधाकृष्णन ने नोटिस खारिज कर दिए थे। ऐसे में 31 अक्टूबर का आयोजन कानूनी रूप से संसद में महाभियोग की कार्यवाही नहीं, बल्कि जनता के सामने विपक्ष की प्रतीकात्मक राजनीतिक कार्यवाही था।अब सभी की निगाहें 1 नवंबर की रामलीला मैदान रैली पर टिकी हैं। यह देखना महत्वपूर्ण होगा कि विपक्ष अपने इस अभियान को कितना व्यापक बनाता है और चुनाव आयोग तथा केंद्र सरकार की ओर से इन आरोपों पर आगे क्या प्रतिक्रिया सामने आती है।
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