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CEC ज्ञानेश कुमार के इस्तीफे की मांग पर विपक्ष का मार्च

Kavita2
6 Oct 2026 4:10 PM IST
CEC ज्ञानेश कुमार के इस्तीफे की मांग पर विपक्ष का मार्च
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मुख्य चुनाव आयुक्त ज्ञानेश कुमार के इस्तीफे की मांग को लेकर राजधानी दिल्ली में राजनीतिक माहौल गरमा गया है। राहुल गांधी, प्रियंका गांधी और कई विपक्षी दलों के नेताओं ने चुनाव आयोग मुख्यालय की ओर पैदल मार्च किया। दोपहर में शुरू हुआ यह मार्च संसद मार्ग क्षेत्र में पहुंचने के बाद हंगामेदार हो गया। विपक्षी नेता रिजर्व बैंक ऑफ इंडिया मुख्यालय के आसपास तक पहुंचे, जबकि कई नेता आकाशवाणी भवन के पास डटे रहे।

विपक्ष का आरोप है कि चुनाव प्रक्रिया और मतदाता सूची से जुड़े मुद्दों पर चुनाव आयोग ने निष्पक्ष तरीके से काम नहीं किया है। इसी को लेकर CEC ज्ञानेश कुमार के इस्तीफे की मांग की जा रही है। हालांकि विपक्ष के इन आरोपों की स्वतंत्र पुष्टि नहीं हुई है और चुनाव आयोग की ओर से इस पर क्या आधिकारिक प्रतिक्रिया दी गई है, यह अलग विषय है।

प्रदर्शन में कांग्रेस समेत कई विपक्षी दलों के नेता शामिल हुए। राहुल गांधी और प्रियंका गांधी की मौजूदगी के कारण मार्च ने राजनीतिक रूप से और अधिक ध्यान खींचा। बड़ी संख्या में नेताओं और कार्यकर्ताओं के संसद मार्ग क्षेत्र में पहुंचने के बाद सुरक्षा व्यवस्था कड़ी कर दी गई।

दिल्ली पुलिस और अर्धसैनिक बलों के जवानों को संवेदनशील स्थानों पर तैनात किया गया। पुलिस की कोशिश रही कि प्रदर्शनकारियों को निर्धारित क्षेत्र से आगे बढ़ने से रोका जाए और चुनाव आयोग मुख्यालय की सुरक्षा सुनिश्चित की जाए।

दोपहर से शुरू हुए मार्च के कारण संसद मार्ग और आसपास के इलाकों में राजनीतिक गतिविधियां तेज हो गईं। विपक्षी नेता नारेबाजी करते हुए चुनाव आयोग की ओर बढ़ने की कोशिश करते रहे।

मार्च के दौरान बैरिकेडिंग और सुरक्षा घेरे के कारण कई जगह प्रदर्शनकारी आगे नहीं बढ़ सके। इसके बाद कई नेता आकाशवाणी भवन और आसपास के इलाके में ही रुक गए।

राहुल गांधी और प्रियंका गांधी समेत कई वरिष्ठ नेताओं की मौजूदगी के कारण पुलिस प्रशासन अतिरिक्त सतर्क रहा। सुरक्षा एजेंसियों ने भीड़ की गतिविधियों पर लगातार नजर रखी।

विपक्ष की ओर से इस प्रदर्शन को चुनावी निष्पक्षता और मतदाता अधिकारों से जोड़ा जा रहा है। नेताओं का कहना है कि चुनाव आयोग जैसी संवैधानिक संस्था की विश्वसनीयता लोकतंत्र के लिए बेहद महत्वपूर्ण है और यदि उसके कामकाज को लेकर सवाल उठते हैं तो उनका जवाब दिया जाना चाहिए।

दूसरी ओर, इस तरह के आरोप राजनीतिक रूप से संवेदनशील होते हैं और उनका अंतिम मूल्यांकन आधिकारिक दस्तावेजों, चुनाव आयोग के जवाब और कानूनी प्रक्रिया के आधार पर ही किया जा सकता है।

प्रदर्शन के दौरान कानून-व्यवस्था बनाए रखना दिल्ली पुलिस के लिए बड़ी चुनौती बन गया। संसद मार्ग क्षेत्र पहले से ही उच्च सुरक्षा वाला इलाका है और यहां संसद भवन, सरकारी कार्यालय और कई महत्वपूर्ण संस्थान मौजूद हैं।

ऐसे में बड़ी संख्या में राजनीतिक नेताओं और कार्यकर्ताओं के एक साथ पहुंचने के कारण अतिरिक्त पुलिस बल लगाया गया।

अर्धसैनिक बलों की तैनाती भी सुरक्षा व्यवस्था को मजबूत करने के लिए की गई। पुलिस अधिकारियों ने प्रदर्शनकारियों की गतिविधियों को नियंत्रित रखने और किसी अप्रिय स्थिति से बचने की कोशिश की।

मार्च के चलते आसपास के मार्गों पर यातायात भी प्रभावित हुआ। सुरक्षा कारणों से कुछ रास्तों पर वाहनों की आवाजाही नियंत्रित की गई और बैरिकेड लगाए गए।

प्रदर्शनकारियों का कहना था कि उनकी मांग CEC ज्ञानेश कुमार के इस्तीफे तक सीमित नहीं है, बल्कि चुनावी व्यवस्था में पारदर्शिता और जवाबदेही भी जरूरी है।

विपक्षी नेताओं ने आरोप लगाया कि मतदाता सूची और चुनाव प्रक्रिया से जुड़े सवालों को गंभीरता से नहीं लिया गया। इसी कारण उन्होंने चुनाव आयोग मुख्यालय तक पैदल मार्च का फैसला किया।

राहुल गांधी की मौजूदगी ने पूरे प्रदर्शन को राष्ट्रीय राजनीतिक मुद्दा बना दिया। कांग्रेस कार्यकर्ताओं के साथ अन्य विपक्षी दलों के समर्थक भी मार्च में दिखाई दिए।

प्रियंका गांधी भी प्रदर्शन में शामिल रहीं और विपक्षी नेताओं के साथ संसद मार्ग क्षेत्र में मौजूद रहीं।

आकाशवाणी भवन के आसपास नेताओं के रुकने के बाद पुलिस ने सुरक्षा घेरा और मजबूत कर दिया। अधिकारियों की कोशिश रही कि भीड़ चुनाव आयोग मुख्यालय या अन्य संवेदनशील परिसरों तक न पहुंच सके।

प्रदर्शन लंबा खिंचने के कारण पुलिस और अर्धसैनिक बलों को लगातार सतर्क रहना पड़ा।

इस दौरान विपक्ष की ओर से सरकार और चुनाव आयोग को लेकर नारेबाजी भी की गई। नेताओं ने कहा कि लोकतांत्रिक संस्थाओं पर लोगों का भरोसा बनाए रखने के लिए निष्पक्षता जरूरी है।

हालांकि सरकार या चुनाव आयोग की ओर से विपक्ष की हर मांग को स्वीकार करने का कोई संकेत नहीं दिया गया है। ऐसे में यह मुद्दा आने वाले दिनों में भी राजनीतिक बहस का केंद्र बना रह सकता है।

CEC के इस्तीफे की मांग को लेकर विपक्ष का यह मार्च संसद के बाहर राजनीतिक टकराव को और तेज करने वाला माना जा रहा है।

अब नजर इस बात पर रहेगी कि चुनाव आयोग विपक्ष के आरोपों पर किस तरह जवाब देता है और क्या विपक्ष इस मुद्दे को लेकर आगे भी प्रदर्शन जारी रखता है।

दिल्ली पुलिस के लिए फिलहाल पहली प्राथमिकता संसद मार्ग और आसपास के संवेदनशील इलाकों में कानून-व्यवस्था बनाए रखना है।

विपक्षी नेताओं के आकाशवाणी भवन के आसपास डटे रहने और चुनाव आयोग मुख्यालय तक पहुंचने की कोशिश के कारण सुरक्षा बलों की तैनाती जारी है।

कुल मिलाकर CEC ज्ञानेश कुमार के इस्तीफे की मांग अब सड़क पर बड़े राजनीतिक प्रदर्शन का रूप ले चुकी है। राहुल गांधी, प्रियंका गांधी और विपक्षी नेताओं के मार्च के बाद यह मुद्दा और ज्यादा गरमा गया है।

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