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वोटर लिस्ट विवाद पर विपक्ष का चुनाव आयोग मार्च, राहुल-प्रियंका हिरासत में

Kavita2
6 Oct 2026 12:22 PM IST
वोटर लिस्ट विवाद पर विपक्ष का चुनाव आयोग मार्च, राहुल-प्रियंका हिरासत में
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नई दिल्ली : मंगलवार को वोटर लिस्ट में कथित हेरफेर और स्पेशल इंटेंसिव रिवीजन यानी SIR को लेकर विपक्षी दलों ने मुख्य चुनाव आयुक्त ज्ञानेश कुमार के खिलाफ बड़ा प्रदर्शन किया। INDIA ब्लॉक के सांसद संसद से चुनाव आयोग के मुख्यालय की ओर मार्च के लिए निकले, लेकिन सुरक्षा बलों ने उन्हें नीति आयोग कार्यालय के पास रोक दिया। इसके बाद कई विपक्षी नेता सड़क पर धरने पर बैठ गए। कांग्रेस सांसद राहुल गांधी और प्रियंका गांधी भी प्रदर्शन में शामिल हुए और बाद में पुलिस ने उन्हें हिरासत में लेकर वैन में बैठा दिया।

विपक्षी दल मुख्य चुनाव आयुक्त ज्ञानेश कुमार के इस्तीफे की मांग कर रहे हैं। उनका आरोप है कि मतदाता सूची में किए गए बदलाव और SIR की प्रक्रिया निष्पक्ष नहीं रही तथा इसमें गंभीर अनियमितताएं हुई हैं। विपक्ष का कहना है कि मतदाता सूची से जुड़े विवादों ने चुनाव आयोग की निष्पक्षता और विश्वसनीयता पर सवाल खड़े किए हैं। हालांकि चुनाव आयोग और BJP इन आरोपों से इनकार करते रहे हैं।

मंगलवार सुबह विपक्षी सांसद संसद भवन के मकर द्वार के पास जुटे और करीब 11 बजे चुनाव आयोग कार्यालय की ओर मार्च शुरू किया। प्रदर्शन में कांग्रेस के अलावा समाजवादी पार्टी, NCP-SP और INDIA गठबंधन के अन्य दलों के सांसद शामिल हुए। कई नेताओं के हाथों में पोस्टर, बैनर और मुख्य चुनाव आयुक्त से जुड़े कटआउट दिखाई दिए।

जैसे ही मार्च नीति आयोग कार्यालय के पास पहुंचा, पुलिस और सुरक्षा बलों ने बैरिकेडिंग लगाकर आगे बढ़ने से रोक दिया। इसके बाद विपक्षी सांसद वहीं नारेबाजी करने लगे और कई नेता धरने पर बैठ गए। राहुल गांधी और प्रियंका गांधी भी सड़क पर बैठकर विरोध जताने लगे। कुछ देर बाद पुलिस ने दोनों नेताओं समेत कई प्रदर्शनकारियों को हिरासत में लिया।

राहुल गांधी ने प्रदर्शन के दौरान मुख्य चुनाव आयुक्त पर तीखा हमला बोला और उनके इस्तीफे की मांग दोहराई। विपक्षी सांसदों ने चुनाव आयोग के खिलाफ नारे लगाए और कहा कि मतदाता सूची में किसी भी तरह की कथित गड़बड़ी लोकतांत्रिक व्यवस्था के लिए गंभीर खतरा है। प्रदर्शनकारियों ने चुनाव आयोग से SIR प्रक्रिया और मतदाता सूची में बदलावों पर जवाब देने की मांग की।

प्रदर्शन को देखते हुए मध्य दिल्ली में सुरक्षा के कड़े इंतजाम किए गए थे। संसद मार्ग, जंतर-मंतर और चुनाव आयोग कार्यालय के आसपास बड़ी संख्या में पुलिसकर्मियों और सुरक्षा बलों की तैनाती की गई। कई स्थानों पर बैरिकेड लगाए गए और आने-जाने वाले वाहनों तथा लोगों पर निगरानी बढ़ाई गई।

विपक्ष का यह प्रदर्शन पिछले कई दिनों से चल रहे विरोध अभियान की अगली कड़ी माना जा रहा है। कांग्रेस और अन्य विपक्षी दल SIR और मतदाता सूची में कथित अनियमितताओं को लगातार मुद्दा बना रहे हैं। उनका आरोप है कि मतदाता सूचियों में संशोधन के दौरान ऐसे कदम उठाए गए हैं, जिनसे वास्तविक मतदाताओं के नाम प्रभावित हुए हैं।

विपक्षी दलों का कहना है कि मतदाता सूची चुनावी प्रक्रिया की सबसे महत्वपूर्ण बुनियाद है। यदि इसमें गलत तरीके से नाम हटाए या जोड़े जाते हैं तो इसका सीधा असर मतदान के अधिकार और चुनाव नतीजों पर पड़ सकता है। इसी वजह से विपक्ष इस मुद्दे को लोकतंत्र और संवैधानिक संस्थाओं की स्वतंत्रता से जोड़कर उठा रहा है।

मुख्य चुनाव आयुक्त ज्ञानेश कुमार के इस्तीफे की मांग को लेकर विपक्ष का रुख लगातार सख्त होता जा रहा है। अलग-अलग राज्यों में भी इस मुद्दे पर प्रदर्शन किए गए हैं। दिल्ली में मंगलवार का मार्च इसी व्यापक राजनीतिक अभियान का हिस्सा है।

वहीं, प्रदर्शन के दौरान पुलिस का कहना रहा कि कानून-व्यवस्था बनाए रखने के लिए सुरक्षा व्यवस्था की गई थी। चुनाव आयोग की ओर जाने वाले मार्गों पर रोक इसलिए लगाई गई ताकि संवेदनशील सरकारी इलाके में भीड़ को नियंत्रित किया जा सके।

इस पूरे विवाद के बीच चुनाव आयोग और सत्तारूढ़ BJP ने विपक्ष के आरोपों को खारिज किया है। उनका कहना है कि मतदाता सूची संशोधन निर्धारित प्रक्रिया और नियमों के तहत किया जा रहा है। हालांकि विपक्ष इन दलीलों से संतुष्ट नहीं है और स्वतंत्र जांच तथा जवाबदेही की मांग कर रहा है।

वोटर लिस्ट और SIR का विवाद अब केवल चुनावी प्रक्रिया का तकनीकी मुद्दा नहीं रह गया है, बल्कि यह सरकार और विपक्ष के बीच बड़े राजनीतिक टकराव का रूप ले चुका है। राहुल गांधी, प्रियंका गांधी और अन्य विपक्षी नेताओं की हिरासत के बाद यह विवाद और तेज होने की संभावना है।

अब नजर इस बात पर रहेगी कि विपक्ष आगे अपने आंदोलन को किस रूप में जारी रखता है और चुनाव आयोग इन आरोपों पर कोई विस्तृत प्रतिक्रिया देता है या नहीं। फिलहाल मुख्य चुनाव आयुक्त ज्ञानेश कुमार के इस्तीफे की मांग को लेकर विपक्ष ने दबाव बढ़ा दिया है और मतदाता सूची का मुद्दा राष्ट्रीय राजनीति के केंद्र में आ गया है।

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