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सीएपीएफ विधेयक को लेकर विपक्ष ने राज्यसभा से किया वॉकआउट
SHIDDHANT
1 April 2026 10:48 PM IST

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Delhi दिल्ली। राज्यसभा ने बुधवार को ध्वनि मत से केंद्रीय सशस्त्र पुलिस बल (सामान्य प्रशासन) विधेयक, 2026 पारित कर दिया। इस दौरान विपक्ष ने वॉकआउट कर दिया। विपक्ष चाहता था कि विधेयक को आगे विचार-विमर्श के लिए चयन समिति को भेजा जाए। राज्यसभा से वॉकआउट करने के बाद संसद परिसर में मीडिया से बात करते हुए विपक्ष के सांसदों ने सरकार पर मनमानी करने का आरोप लगाया।
राज्यसभा से वॉकआउट करने के बाद संसद परिसर में आईएएनएस से बातचीत में कांग्रेस सांसद प्रमोद तिवारी ने कहा कि सर्वोच्च न्यायालय ने सोच-विचारकर जो निर्णय लिया था, आज ये मोदी सरकार बहुमत के बल में उसे रौंद रही है।
सुरक्षा बल और जवान हमारे देश की सीमाओं की सुरक्षा करते हैं। संसद की हिफाजत करते हैं, अब उनके हक पर सरकार डकैती डाल रही है। दुखद बात ये है कि जब इससे जुड़ी कमिटी बनी तो सीएपीएफ के लोगों को अपनी बात रखने का मौका तक नहीं दिया गया। विरोधी दलों और हमारे सहयोगियों ने इसलिए बहिष्कार कर दिया है।
आप सांसद संजय सिंह ने कहा कि देश की 15 हजार किमी सीमा की सुरक्षा करने वाले हमारे जवानों और सीएपीएफ के अधिकारियों का हक मारने के लिए सरकार नया कानून लेकर आई है। सुप्रीम कोर्ट का आदेश होने के बाद सरकार ये लेकर आई है। 6 समितियां समेत तमाम अधिकारियों की कमेटियों ने कहा कि सीएपीएफ के अधिकारियों को प्रमोशन मिलना चाहिए। उन्हें अधिकार मिलना चाहिए।
उन्होंने कहा कि सरकार ने आज काला कानून पास किया है। 11 लाख सीएपीएफ के जवान और अधिकारी इस सरकार की तानाशाही को देख रहे हैं। जब वक्त आएगा तो वे लोग जवाब जरूर देंगे।
वहीं राजद सांसद मनोज झा ने कहा कि पूरे विपक्ष ने कुछ सवाल उठाए थे, जो जवानों के मन में व्याप्त हताशा से जुड़े हुए थे। सरकार अब एक फोर्स को दूसरे फोर्स के खिलाफ खड़ा कर रही है। पहले ये समुदायों को लड़ाते थे और अब ये फोर्स को आमने-सामने खड़ा कर रहे हैं। विपक्ष की आपत्तियों का जवाब मंत्री के पास नहीं था। इसके बाद पूरे विपक्ष ने इसका बहिष्कार कर दिया। मैं जवानों से कहना चाहता हूं कि ये लड़ाई इस बिल के पास होने के बाद खत्म नहीं हो रही है।
बीजेडी सांसद सस्मित पात्रा ने कहा कि सीएपीएफ बिल के संदर्भ में हमने सदन का बहिष्कार कर दिया है। हमारे पास दो से तीन मुद्दे थे, जिन पर हम चर्चा चाहते थे। हम इसे सेलेक्ट कमिटी या स्टैंडिंग कमिटी के पास भेजना चाहते थे। विपक्ष द्वारा मुद्दे उठाए गए, लेकिन सरकार की तरफ से जवाब नहीं दिया गया। जवानों और सीएपीएफ के मुद्दे पर बीजू जनता दल हमेशा उनके साथ खड़ी है।
शिवसेना (यूबीटी) सांसद प्रियंका चतुर्वेदी ने कहा कि भाजपा देश में विभाजनकारी सोच लेकर आई है, उसी तरह सुरक्षा बलों में भी विभाजन करने की कोशिश की जा रही है। चर्चा के दौरान सभी का विश्वास जीतना जरूरी था, लेकिन उन्होंने आत्मविश्वास कम करने का काम किया है। जिस तरह बिल लाया गया है और सुप्रीम कोर्ट के फैसले के बाद भी यह किया जा रहा है, तो इससे साफ है कि सरकार मनमानी कर रही है।
वहीं रेणुका चौधरी ने कहा कि संसद में जब हम सवाल करते हैं तो हम उम्मीद करते हैं कि हमें जवाब मिले। जवानों के साथ जो नाइंसाफी हो रही है, ये लोगों को समझ आ रही है। इसके खिलाफ हम आवाज उठाते रहेंगे। हमें जब जवाब नहीं मिला तो हमने बहिष्कार कर दिया।
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