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NCPI आई मुद्दे पर विपक्ष का वॉकआउट, संसद सत्र से पहले बढ़ी हलचल

Ratna Netam
19 July 2026 6:47 PM IST
NCPI आई मुद्दे पर विपक्ष का वॉकआउट, संसद सत्र से पहले बढ़ी हलचल
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New Delhi नई दिल्ली : संसद के आगामी मानसून सत्र 2026 को सुचारू रूप से संचालित करने और विभिन्न विधायी कार्यों पर राजनीतिक दलों के बीच सहमति बनाने के उद्देश्य से रविवार को संसद भवन परिसर में सर्वदलीय बैठक आयोजित की गई। केंद्रीय रक्षा मंत्री राजनाथ सिंह की अध्यक्षता में हुई इस महत्वपूर्ण बैठक में सत्ता पक्ष और विपक्ष के नेताओं ने भाग लिया। बैठक का आयोजन केंद्रीय संसदीय कार्य एवं अल्पसंख्यक कार्य मंत्री कीरेन रीजीजू ने किया। इस दौरान सरकार ने सभी दलों से सदन की कार्यवाही को सुचारू रूप से चलाने में सहयोग देने की अपील की, जबकि विपक्षी दलों ने भी अपने-अपने मुद्दे बैठक में उठाए। हालांकि बैठक के दौरान कुछ विपक्षी दलों ने एक मुद्दे पर असहमति जताते हुए सांकेतिक वॉकआउट भी किया।

बैठक में मंत्रियों सहित 40 राजनीतिक दलों के 58 वरिष्ठ नेताओं ने हिस्सा लिया। इसमें कांग्रेस, समाजवादी पार्टी (सपा), तृणमूल कांग्रेस (टीएमसी), द्रविड़ मुनेत्र कड़गम (DMK) सहित कई प्रमुख राजनीतिक दलों के प्रतिनिधि मौजूद रहे। बैठक की शुरुआत में रक्षा मंत्री राजनाथ सिंह ने सभी नेताओं का स्वागत किया और लोकतांत्रिक परंपराओं के अनुरूप सकारात्मक सहयोग की अपेक्षा जताई।

इसके बाद संसदीय कार्य मंत्री कीरेन रीजीजू ने मानसून सत्र की रूपरेखा प्रस्तुत करते हुए बताया कि संसद का मानसून सत्र 20 जुलाई 2026 से शुरू होगा और सरकारी कार्यों की आवश्यकता के अनुसार 13 अगस्त 2026 तक चलेगा। उन्होंने कहा कि इस दौरान 25 दिनों की अवधि में कुल 19 बैठकें आयोजित की जाएंगी, जिनमें कई महत्वपूर्ण विधेयकों और अन्य संसदीय कार्यों पर चर्चा होने की संभावना है।

रीजीजू ने सभी दलों से आग्रह किया कि वे जनहित से जुड़े मुद्दों पर सार्थक चर्चा करें और सदन की कार्यवाही को बाधित करने के बजाय रचनात्मक सहयोग दें। उन्होंने कहा कि सरकार विपक्ष द्वारा उठाए जाने वाले महत्वपूर्ण विषयों पर चर्चा के लिए तैयार है और लोकतांत्रिक परंपराओं का पूरा सम्मान करती है।

बैठक के दौरान विभिन्न विपक्षी दलों के नेताओं ने भी अपने सुझाव और मांगें सरकार के सामने रखीं। कुछ दलों ने आगामी सत्र में महंगाई, बेरोजगारी, कृषि, राष्ट्रीय सुरक्षा, राज्यों से जुड़े मुद्दों और अन्य जनहित के विषयों पर विस्तृत चर्चा कराने की मांग की। हालांकि बैठक के बीच कुछ विपक्षी दलों ने एक मुद्दे पर आपत्ति जताते हुए सांकेतिक वॉकआउट किया। बाद में वे पुनः बैठक में शामिल हो गए।

संसदीय कार्य मंत्री ने बैठक के बाद कहा कि सरकार का उद्देश्य सभी दलों के सहयोग से संसद का सत्र शांतिपूर्ण और प्रभावी ढंग से चलाना है। उन्होंने उम्मीद जताई कि पक्ष और विपक्ष दोनों लोकतांत्रिक परंपराओं का पालन करते हुए सदन में सकारात्मक बहस करेंगे, जिससे महत्वपूर्ण विधायी कार्य समय पर पूरे हो सकें।

राजनीतिक विश्लेषकों का मानना है कि मानसून सत्र के दौरान कई अहम विधेयकों और राष्ट्रीय महत्व के मुद्दों पर चर्चा होने की संभावना है। ऐसे में सरकार और विपक्ष के बीच समन्वय बनाए रखना आवश्यक होगा। वहीं विपक्ष भी अपने प्रमुख राजनीतिक और जनहित के मुद्दों को संसद में जोरदार तरीके से उठाने की तैयारी में है।

अब सभी की निगाहें सोमवार, 20 जुलाई से शुरू होने वाले संसद के मानसून सत्र पर टिकी हैं। यह देखना महत्वपूर्ण होगा कि सरकार और विपक्ष के बीच सहयोग का माहौल बनता है या विभिन्न मुद्दों पर टकराव के कारण सदन की कार्यवाही प्रभावित होती है।

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