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FCRA बिल पर JPC बैठक टालने की मांग विपक्ष ने मांगे चार हफ्ते

Ratna Netam
29 Sept 2026 8:04 PM IST
FCRA बिल पर JPC बैठक टालने की मांग विपक्ष ने मांगे चार हफ्ते
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New दिल्ली : विदेशी अंशदान (विनियमन) संशोधन विधेयक 2026 यानी FCRA संशोधन बिल की जांच कर रही संयुक्त संसदीय समिति (JPC) में विपक्षी सदस्यों ने विस्तृत विचार-विमर्श के लिए अधिक समय देने की मांग उठाई है। विपक्षी सांसदों ने समिति के चेयरमैन और भाजपा सांसद संजय जायसवाल को पत्र लिखकर 12 अक्टूबर को प्रस्तावित बैठक कम से कम चार सप्ताह के लिए स्थगित करने की मांग की है। इसके साथ ही आम लोगों, विशेषज्ञों और संबंधित संगठनों से सुझाव लेने की समय-सीमा भी चार सप्ताह तक बढ़ाने का अनुरोध किया गया है।
विपक्षी सदस्यों का कहना है कि FCRA संशोधन विधेयक के प्रावधानों का देश में विदेशी योगदान प्राप्त करने वाले संगठनों और संस्थाओं पर व्यापक प्रभाव पड़ सकता है। इसलिए समिति को किसी निष्कर्ष तक पहुंचने से पहले विधेयक, उससे जुड़े दस्तावेजों और प्रस्तावित कानूनी बदलावों का विस्तार से अध्ययन करना चाहिए।
सांसदों ने अपने पत्र में कहा कि प्रस्तावित कानून के महत्व और संभावित प्रभाव को देखते हुए उन्हें अध्ययन के लिए पर्याप्त समय दिया जाना जरूरी है। उनका कहना है कि विधेयक से जुड़े कानूनी, प्रशासनिक और वित्तीय पहलुओं को समझे बिना जल्दबाजी में जांच पूरी करना उचित नहीं होगा।
विपक्षी सदस्यों ने मांग की है कि 12 अक्टूबर को प्रस्तावित JPC बैठक को कम से कम चार सप्ताह आगे बढ़ाया जाए। उनका तर्क है कि अतिरिक्त समय मिलने से समिति के सदस्य विधेयक के प्रत्येक प्रावधान का गहराई से अध्ययन कर सकेंगे और इससे जुड़े विभिन्न पक्षों की राय को भी बेहतर तरीके से समझ सकेंगे।
इसके साथ ही उन्होंने सार्वजनिक सुझाव और आपत्तियां प्राप्त करने की अवधि बढ़ाने की मांग भी की है। विपक्षी सांसद चाहते हैं कि संबंधित NGOs, सामाजिक संगठनों, कानूनी विशेषज्ञों, शिक्षाविदों और आम नागरिकों को अपनी राय रखने के लिए कम से कम चार सप्ताह का समय दिया जाए।
FCRA संशोधन विधेयक 2026 की जांच के लिए 31 सदस्यीय संयुक्त संसदीय समिति बनाई गई है। लोकसभा सांसद संजय जायसवाल को इसका चेयरमैन बनाया गया है। समिति में लोकसभा के 21 और राज्यसभा के 10 सदस्य शामिल हैं। संसद के दोनों सदनों ने अगस्त 2026 में विधेयक को विस्तृत जांच के लिए संयुक्त समिति के पास भेजने को मंजूरी दी थी।
JPC ने 18 सितंबर को अपनी पहली बैठक की थी। इस दौरान केंद्रीय गृह सचिव ने प्रस्तावित संशोधनों को लेकर समिति को जानकारी दी थी। इसके बाद विपक्षी सदस्यों सहित समिति के कई सांसदों ने विधेयक के विभिन्न प्रावधानों पर सवाल उठाए थे। सवालों की संख्या अधिक होने के कारण गृह मंत्रालय से विस्तृत जवाब देने के लिए समय मांगा गया था।
विधेयक में विदेशी अंशदान के उपयोग और उससे बनाई गई संपत्तियों के प्रबंधन से संबंधित कई बदलाव प्रस्तावित हैं। एक प्रमुख प्रस्ताव के तहत किसी संगठन का FCRA पंजीकरण रद्द होने, सरेंडर होने या उसका नवीनीकरण न होने जैसी स्थितियों में विदेशी अंशदान और उससे बनाई गई संपत्तियों के प्रबंधन के लिए एक नामित प्राधिकरण की व्यवस्था करने का प्रस्ताव है।
सरकार का कहना है कि प्रस्तावित संशोधनों का उद्देश्य विदेशी योगदान के इस्तेमाल में अधिक पारदर्शिता और जवाबदेही सुनिश्चित करना है। गृह मंत्रालय FCRA का प्रशासन करता है और विदेशी स्रोतों से धन प्राप्त करने वाले व्यक्तियों तथा संगठनों के लिए इससे जुड़े नियम लागू करता है।
दूसरी ओर, विपक्ष के कुछ दलों और नागरिक संगठनों ने प्रस्तावित प्रावधानों के संभावित प्रभाव को लेकर सवाल उठाए हैं। विपक्षी सांसदों ने विशेष रूप से उस व्यवस्था पर स्पष्टीकरण मांगा है जिसके तहत किसी संस्था का FCRA लाइसेंस खत्म होने की स्थिति में उससे जुड़ी संपत्तियों के प्रबंधन की जिम्मेदारी नामित प्राधिकरण को दी जा सकती है। सरकार इन चिंताओं से असहमति जता चुकी है और उसका कहना है कि विधेयक का उद्देश्य विदेशी फंड के इस्तेमाल की निगरानी मजबूत करना है।
JPC को विधेयक पर विभिन्न पक्षों की राय लेकर अपनी रिपोर्ट तैयार करनी है। मौजूदा कार्यक्रम के अनुसार समिति की रिपोर्ट 2026 के शीतकालीन सत्र के पहले सप्ताह के अंतिम दिन तक लोकसभा में पेश की जानी है। इसी समय-सीमा के बीच समिति को विधेयक के प्रावधानों, सरकारी पक्ष, विशेषज्ञों और दूसरे हितधारकों की राय का अध्ययन करना है।
विपक्षी सदस्यों का कहना है कि सार्वजनिक परामर्श किसी भी व्यापक असर वाले कानून की संसदीय समीक्षा का महत्वपूर्ण हिस्सा है। इसलिए लोगों को अपनी आपत्तियां और सुझाव तैयार करने के लिए पर्याप्त अवसर मिलना चाहिए। उनके मुताबिक कम अवधि में विभिन्न संगठनों के लिए कानूनी प्रावधानों का अध्ययन कर विस्तृत प्रतिक्रिया देना मुश्किल हो सकता है।
अब नजर JPC चेयरमैन संजय जायसवाल के फैसले पर रहेगी कि 12 अक्टूबर की प्रस्तावित बैठक को आगे बढ़ाने और सार्वजनिक सुझाव की अवधि बढ़ाने की विपक्ष की मांग स्वीकार की जाती है या नहीं। जायसवाल पहले कह चुके हैं कि समिति में आए सुझावों पर विचार किया जाएगा और फैसले सदस्यों को विश्वास में लेकर किए जाएंगे।
FCRA संशोधन बिल की संसदीय जांच आगे बढ़ने के साथ सरकार और विपक्ष के बीच बहस का केंद्र फिलहाल दो मुद्दे हैं—प्रस्तावित प्रावधानों का दायरा और समीक्षा के लिए उपलब्ध समय। समिति की आने वाली बैठकों में इन दोनों विषयों पर चर्चा जारी रहने की संभावना है।
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