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राजनीतिक स्वार्थ के चलते विपक्ष ने महिला आरक्षण बिल पास नहीं होने दिया: जीतन राम मांझी
SHIDDHANT
18 April 2026 9:11 PM IST

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Delhi दिल्ली: केंद्रीय मंत्री जीतन राम मांझी ने महिला आरक्षण बिल के गिरने पर विपक्ष की आलोचना की। उन्होंने कहा कि यह बिल महिलाओं को राजनीतिक रूप से सशक्त बनाने का था, लेकिन विपक्ष ने राजनीतिक स्वार्थ के चलते इसे पास नहीं होने दिया।
पटना में मांझी ने मीडिया से बातचीत करते हुए कहा कि महिला आरक्षण बिल 2023 में पास हो गया था, लेकिन इसमें परिसीमन (डिलिमिटेशन) की प्रक्रिया को भी जोड़ा गया था। समस्या यह थी कि बिना परिसीमन के महिलाओं की भागीदारी सुनिश्चित नहीं की जा सकती थी।
मंत्री ने कहा कि इसी वजह से परिसीमन की जरूरत थी। उन्होंने दक्षिण भारत के राज्यों में विपक्ष द्वारा फैलाई गई गलत धारणा का भी खंडन किया।
उन्होंने कहा कि यह गलत प्रचार किया गया कि परिसीमन से दक्षिण भारत के राज्यों का दर्जा गिर जाएगा और उत्तर भारत को फायदा होगा। वास्तव में प्रतिशत के हिसाब से कोई फर्क नहीं पड़ता। जब सीटों की संख्या बढ़ेगी तो कर्नाटक, केरल में भी सीटें बढ़ेंगी और उत्तर प्रदेश में भी बढ़ेंगी।
जीतन राम मांझी ने इसे देश और महिलाओं के लिए दुर्भाग्यपूर्ण बताते हुए कहा कि महिलाएं आज हर क्षेत्र में पुरुषों से आगे हैं। सरस्वती शिक्षा की देवी हैं, लक्ष्मी धन की देवी हैं, और काली-दुर्गा शक्ति की देवी हैं। प्राचीन काल में भारत ‘जगतगुरु’ के नाम से जाना जाता था, लेकिन बाद के काल में महिलाओं को हाशिए पर धकेल दिया गया।
उन्होंने कहा कि पीएम नरेंद्र मोदी महिलाओं को आगे बढ़ाना चाहते थे, लेकिन विपक्ष को इसमें राजनीतिक फायदा नजर नहीं आया। इसी कारण दो-तिहाई बहुमत नहीं मिल सका और बिल गिर गया। यह विपक्ष के लिए शर्म की बात है, लेकिन वे जश्न मना रहे हैं।
मांझी ने आशा जताते हुए कहा कि हम इस मुद्दे को गांव-गांव तक ले जाएंगे। अगर देश की महिलाएं जागरूक हुईं तो दो-तिहाई बहुमत अवश्य मिलेगा। तब महिला आरक्षण बिल पास होगा और महिलाओं को राज्य व देश की राजनीति में सार्थक भूमिका मिलेगी।
उन्होंने विपक्ष पर आरोप लगाते हुए कहा कि बिल पास न होने की सारी जिम्मेदारी विपक्ष की है।
उन्होंने कहा कि परिसीमन के बाद 2029 के चुनाव में महिलाओं को बढ़ी हुई सीटों पर आरक्षण का लाभ मिल पाता, लेकिन विपक्ष ने राजनीति कर इसे रोक दिया।
शराबबंदी नीति पर उन्होंने कहा कि नीति तो सही है, लेकिन इसके क्रियान्वयन में कुछ चूक हुई है, जिससे गरीबों को नुकसान उठाना पड़ रहा है।
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