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वन नेशन, वन इलेक्शन बिल: JPC को मिला अतिरिक्त समय

Kavita2
29 July 2026 3:20 PM IST
वन नेशन, वन इलेक्शन बिल: JPC को मिला अतिरिक्त समय
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नई दिल्ली। लोकसभा और राज्य विधानसभाओं के चुनाव एक साथ कराने से जुड़े महत्वपूर्ण विधेयक की जांच कर रही संसद की संयुक्त समिति (ज्वाइंट पार्लियामेंट्री कमेटी- JPC) को बुधवार को अतिरिक्त समय दे दिया गया है। समिति अब अपनी रिपोर्ट शीतकालीन सत्र के आखिरी हफ्ते के पहले दिन तक पेश कर सकेगी।

समिति के अध्यक्ष पीपी चौधरी ने सदन में एक प्रस्ताव पेश किया, जिसमें रिपोर्ट सौंपने की समय-सीमा बढ़ाने की मांग की गई थी। प्रस्ताव को मंजूरी मिलने के बाद समिति को विधेयक पर विस्तृत अध्ययन और विचार-विमर्श के लिए अतिरिक्त समय मिल गया है।

'एक देश, एक चुनाव' बिल की कर रही है समीक्षा

संसद की संयुक्त समिति लोकसभा और राज्य विधानसभाओं के चुनाव एक साथ कराने के प्रस्ताव से जुड़े विधेयक की जांच कर रही है। इस प्रस्ताव को केंद्र सरकार की महत्वाकांक्षी चुनाव सुधार पहल के रूप में देखा जा रहा है।

एक साथ चुनाव कराने के विचार का उद्देश्य देश में बार-बार होने वाले चुनावों से होने वाले खर्च और प्रशासनिक व्यवधान को कम करना बताया गया है। सरकार का तर्क है कि बार-बार चुनाव होने से विकास कार्यों पर असर पड़ता है और सरकारी मशीनरी का बड़ा हिस्सा चुनावी प्रक्रिया में लग जाता है।

वहीं, विपक्ष और कुछ अन्य दलों ने इस प्रस्ताव को लेकर कई संवैधानिक और व्यावहारिक सवाल उठाए हैं। इन्हीं मुद्दों पर विचार करने के लिए विधेयक को संसद की संयुक्त समिति के पास भेजा गया है।

समिति में हो रही है विस्तृत चर्चा

JPC में विभिन्न राजनीतिक दलों के सांसद शामिल हैं। समिति विधेयक के सभी पहलुओं का अध्ययन कर रही है और इससे जुड़े विशेषज्ञों, हितधारकों तथा विभिन्न पक्षों की राय भी ले रही है।

समिति के सामने सबसे बड़ी चुनौती यह है कि एक साथ चुनाव कराने की व्यवस्था को लागू करने के लिए संविधान और चुनावी कानूनों में किन बदलावों की जरूरत होगी। इसके अलावा, राज्यों की विधानसभा अवधि, चुनाव कार्यक्रम और राजनीतिक सहमति जैसे मुद्दों पर भी चर्चा की जा रही है।

रिपोर्ट तैयार करने के लिए बढ़ाया गया समय

समिति के अध्यक्ष पीपी चौधरी ने बुधवार को रिपोर्ट जमा करने की समय सीमा बढ़ाने का प्रस्ताव रखा। इसमें समिति की रिपोर्ट को शीतकालीन सत्र के आखिरी हफ्ते के पहले दिन तक पेश करने का अनुरोध किया गया था।

समिति को अतिरिक्त समय मिलने से अब सदस्य विधेयक के विभिन्न पहलुओं पर और गहराई से चर्चा कर सकेंगे। माना जा रहा है कि इस दौरान समिति विभिन्न पक्षों से प्राप्त सुझावों और विशेषज्ञों की राय का अध्ययन करेगी।

चुनाव सुधारों पर जारी है बहस

'एक देश, एक चुनाव' का मुद्दा लंबे समय से राजनीतिक बहस का विषय रहा है। समर्थकों का कहना है कि देश में एक साथ चुनाव होने से चुनावी खर्च में कमी आएगी और शासन व्यवस्था अधिक प्रभावी हो सकेगी।

इसके अलावा, उनका तर्क है कि बार-बार आचार संहिता लागू होने से विकास योजनाओं की गति प्रभावित होती है। एक साथ चुनाव होने पर सरकारें लंबे समय की नीतियों और योजनाओं पर अधिक ध्यान दे सकेंगी।

विपक्ष ने उठाए हैं कई सवाल

दूसरी ओर, कई विपक्षी दलों ने इस प्रस्ताव पर चिंता जताई है। उनका कहना है कि एक साथ चुनाव कराने से राज्यों के अधिकारों और संघीय व्यवस्था पर असर पड़ सकता है।

विपक्षी दलों ने यह भी सवाल उठाया है कि यदि किसी राज्य सरकार का कार्यकाल बीच में समाप्त हो जाता है या केंद्र सरकार के साथ विधानसभा चुनावों का समय अलग हो जाता है तो ऐसी स्थिति से कैसे निपटा जाएगा।

इन सभी संवैधानिक और राजनीतिक पहलुओं पर JPC विचार कर रही है।

आगे की प्रक्रिया पर नजर

समिति की रिपोर्ट आने के बाद ही विधेयक को आगे की संसदीय प्रक्रिया के लिए बढ़ाया जाएगा। रिपोर्ट में समिति अपनी सिफारिशें और सुझाव देगी, जिसके आधार पर सरकार आगे का निर्णय ले सकती है।

अतिरिक्त समय मिलने के बाद अब समिति के पास विधेयक से जुड़े जटिल मुद्दों पर विस्तार से विचार करने का अवसर होगा। रिपोर्ट में शामिल सिफारिशें आने वाले समय में देश की चुनाव व्यवस्था को लेकर महत्वपूर्ण भूमिका निभा सकती हैं।

चुनाव व्यवस्था में बड़े बदलाव की संभावना

यदि 'एक देश, एक चुनाव' प्रस्ताव को मंजूरी मिलती है और इसे लागू किया जाता है, तो यह देश की चुनावी व्यवस्था में बड़ा बदलाव होगा। हालांकि, इसके लिए व्यापक राजनीतिक सहमति और संवैधानिक संशोधनों की जरूरत होगी।

फिलहाल संसद की संयुक्त समिति इस विधेयक की समीक्षा में जुटी है और उसकी रिपोर्ट का इंतजार किया जा रहा है। शीतकालीन सत्र के अंत तक रिपोर्ट आने के बाद इस मुद्दे पर आगे की दिशा स्पष्ट होने की संभावना है।

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