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गांधी जयंती पर पीएम मोदी ने राजघाट पहुंचकर दी श्रद्धांजलि, विजय घाट पर शास्त्री को किया नमन

Kavita2
2 Oct 2026 10:42 AM IST
गांधी जयंती पर पीएम मोदी ने राजघाट पहुंचकर दी श्रद्धांजलि, विजय घाट पर शास्त्री को किया नमन
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नई दिल्ली। प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने शुक्रवार, 2 अक्टूबर को राष्ट्रपिता महात्मा गांधी की 157वीं जयंती पर नई दिल्ली स्थित राजघाट पहुंचकर उन्हें श्रद्धांजलि अर्पित की। गांधी जयंती के अवसर पर देशभर में शांति, अहिंसा, सत्य और स्वच्छता के उनके संदेश को याद किया जा रहा है। प्रधानमंत्री मोदी ने राजघाट पर आयोजित सर्वधर्म प्रार्थना सभा में हिस्सा लिया और गांधीजी की समाधि पर पुष्प अर्पित कर उन्हें नमन किया।

सुबह से ही राजघाट पर विशेष कार्यक्रमों का आयोजन किया गया। प्रधानमंत्री मोदी ने गांधीजी की समाधि पर पहुंचकर कुछ समय मौन रखा और उनके विचारों तथा स्वतंत्रता संग्राम में योगदान को याद किया। इस दौरान सर्वधर्म प्रार्थना सभा भी आयोजित की गई, जिसमें अलग-अलग धर्मों की प्रार्थनाओं के माध्यम से शांति और सद्भाव का संदेश दिया गया।

महात्मा गांधी का जन्म 2 अक्टूबर 1869 को गुजरात के पोरबंदर में हुआ था। वर्ष 2026 में उनकी 157वीं जयंती मनाई जा रही है। गांधीजी ने सत्य और अहिंसा के सिद्धांतों को आधार बनाकर स्वतंत्रता आंदोलन को जनांदोलन में बदल दिया था। उनके विचारों का प्रभाव केवल भारत तक सीमित नहीं रहा, बल्कि दुनिया के कई देशों में नागरिक अधिकारों और शांतिपूर्ण आंदोलनों को भी प्रेरणा मिली।

गांधी जयंती के मौके पर राष्ट्रपति द्रौपदी मुर्मू ने भी देशवासियों को संदेश दिया। उन्होंने कहा कि वर्तमान समय में दुनिया के कई हिस्सों में युद्ध और संघर्ष की स्थिति को देखते हुए गांधीजी का शांति और अहिंसा का संदेश पहले से अधिक प्रासंगिक है। राष्ट्रपति ने लोगों से गांधीजी के आदर्शों को अपने व्यवहार और जीवन में अपनाने की अपील की।

प्रधानमंत्री मोदी ने भी गांधीजी के योगदान को याद करते हुए उनके आदर्शों को विकसित भारत के निर्माण के लिए प्रेरणास्रोत बताया। गांधीजी स्वच्छता, आत्मनिर्भरता, ग्राम विकास और सामाजिक समानता के समर्थक थे। उनके इन्हीं विचारों को याद करते हुए देशभर में गांधी जयंती के अवसर पर कई कार्यक्रम आयोजित किए गए।

राजघाट पर श्रद्धांजलि देने के बाद प्रधानमंत्री मोदी पूर्व प्रधानमंत्री लाल बहादुर शास्त्री की जयंती पर उन्हें नमन करने विजय घाट पहुंचे। शास्त्री की 122वीं जयंती पर प्रधानमंत्री ने उनकी समाधि पर पुष्प अर्पित किए और देश के प्रति उनके योगदान को याद किया।

लाल बहादुर शास्त्री का जन्म 2 अक्टूबर 1904 को उत्तर प्रदेश के मुगलसराय में हुआ था, जिसे अब पंडित दीनदयाल उपाध्याय नगर के नाम से जाना जाता है। वह भारत के दूसरे प्रधानमंत्री बने और अपनी सादगी, ईमानदारी तथा दृढ़ नेतृत्व के लिए जाने गए। उनके ‘जय जवान, जय किसान’ के नारे ने देश के सैनिकों और किसानों को सम्मान देने का संदेश दिया।

प्रधानमंत्री मोदी ने शास्त्री के जीवन को सरलता और देशसेवा का उदाहरण बताया। शास्त्री ने कठिन परिस्थितियों में देश का नेतृत्व किया और राष्ट्रीय सुरक्षा के साथ कृषि उत्पादन को मजबूत करने पर जोर दिया। आज भी उनकी सादगी और प्रशासनिक शैली को राजनीतिक जीवन में एक आदर्श के रूप में याद किया जाता है।

दिल्ली की मुख्यमंत्री रेखा गुप्ता ने भी राजघाट पहुंचकर महात्मा गांधी को श्रद्धांजलि दी और सर्वधर्म प्रार्थना सभा में हिस्सा लिया। इसके बाद उन्होंने विजय घाट जाकर पूर्व प्रधानमंत्री लाल बहादुर शास्त्री को भी नमन किया। गांधी और शास्त्री दोनों की जयंती एक ही दिन होने के कारण राजधानी दिल्ली में सुबह से ही कई स्मृति कार्यक्रम आयोजित किए गए।

राजघाट और विजय घाट पर नेताओं और आम नागरिकों के पहुंचने के कारण सुरक्षा और यातायात के विशेष इंतजाम भी किए गए थे। दिल्ली ट्रैफिक पुलिस ने सुबह पांच बजे से 11 बजे तक आसपास के इलाकों में विशेष यातायात व्यवस्था लागू की थी, ताकि श्रद्धांजलि कार्यक्रमों के दौरान लोगों की आवाजाही सुचारू बनी रहे।

गांधी जयंती के अवसर पर केवल दिल्ली ही नहीं, बल्कि देश के अलग-अलग राज्यों और विदेशों में भारतीय मिशनों में भी कार्यक्रम आयोजित किए गए। स्कूलों, कॉलेजों, सरकारी कार्यालयों और सामाजिक संस्थाओं में गांधीजी के जीवन, सत्याग्रह, अहिंसा और स्वच्छता के संदेश को याद किया गया।

महात्मा गांधी ने स्वतंत्रता आंदोलन के दौरान सत्याग्रह और अहिंसक प्रतिरोध को प्रमुख हथियार बनाया था। उन्होंने असहयोग आंदोलन, नमक सत्याग्रह और भारत छोड़ो आंदोलन जैसे बड़े अभियानों में महत्वपूर्ण भूमिका निभाई। गांधीजी का मानना था कि सामाजिक और राजनीतिक परिवर्तन के लिए हिंसा के बजाय जनभागीदारी और नैतिक शक्ति अधिक प्रभावी हो सकती है।

स्वच्छता को लेकर भी गांधीजी के विचार काफी स्पष्ट थे। वह व्यक्तिगत और सार्वजनिक स्वच्छता को समाज के विकास का जरूरी हिस्सा मानते थे। इसी कारण गांधी जयंती के मौके पर देशभर में स्वच्छता अभियान और जनजागरूकता कार्यक्रम भी आयोजित किए जाते हैं।

दूसरी ओर लाल बहादुर शास्त्री को किसानों और जवानों के मनोबल को मजबूत करने के लिए विशेष रूप से याद किया जाता है। 1965 के भारत-पाकिस्तान युद्ध के दौरान उनके नेतृत्व और ‘जय जवान, जय किसान’ के संदेश ने देश को एकजुट करने में बड़ी भूमिका निभाई।

2 अक्टूबर का दिन इस तरह भारत के इतिहास में दो महान नेताओं की याद से जुड़ा है। एक तरफ महात्मा गांधी के सत्य और अहिंसा के आदर्श हैं, तो दूसरी ओर लाल बहादुर शास्त्री की सादगी, ईमानदारी और राष्ट्रसेवा की विरासत है।

शुक्रवार को प्रधानमंत्री मोदी ने राजघाट और विजय घाट पहुंचकर दोनों नेताओं को नमन किया। देशभर में आयोजित कार्यक्रमों के माध्यम से भी लोगों ने उनके योगदान को याद किया और उनके आदर्शों को आगे बढ़ाने का संकल्प लिया।

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