दिल्ली-एनसीआर

राष्ट्रीय एकता पर ओम बिरला का बड़ा संदेश, युवाओं से की खास अपील

Ratna Netam
31 Oct 2026 8:39 PM IST
राष्ट्रीय एकता पर ओम बिरला का बड़ा संदेश, युवाओं से की खास अपील
x
नई दिल्ली। लोकसभा अध्यक्ष ओम बिरला ने देश के युवाओं से राष्ट्रीय एकता, अखंडता और सामाजिक सद्भाव बनाए रखने का आह्वान किया है। उन्होंने कहा कि भारत की सबसे बड़ी ताकत उसकी विविधता में एकता है और इस विरासत को आगे बढ़ाने की जिम्मेदारी युवा पीढ़ी के कंधों पर है। देश के विकास, लोकतांत्रिक मूल्यों की रक्षा और सामाजिक समरसता को मजबूत बनाने में युवाओं की सक्रिय भागीदारी बेहद महत्वपूर्ण है।सरदार वल्लभभाई पटेल की जयंती के अवसर पर मनाए जाने वाले राष्ट्रीय एकता दिवस के संदर्भ में लोकसभा अध्यक्ष का यह संदेश विशेष महत्व रखता है। उन्होंने युवाओं को देश के महान स्वतंत्रता सेनानियों और राष्ट्रनिर्माताओं के आदर्शों से प्रेरणा लेने तथा राष्ट्रहित को सर्वोपरि रखने का संदेश दिया।
ओम बिरला ने राष्ट्रीय एकता के महत्व पर जोर देते हुए कहा कि भारत विभिन्न भाषाओं, धर्मों, संस्कृतियों और परंपराओं वाला देश है। इतनी विविधताओं के बावजूद देश की एकता और अखंडता उसकी सबसे बड़ी पहचान है। इस पहचान को बनाए रखने के लिए प्रत्येक नागरिक को अपनी जिम्मेदारियों का निर्वहन करना चाहिए। विशेष रूप से युवाओं को समाज में भाईचारे, आपसी सम्मान और सहयोग की भावना को बढ़ावा देने के लिए आगे आना चाहिए।भारत के स्वतंत्रता संग्राम और राष्ट्र निर्माण में सरदार वल्लभभाई पटेल का योगदान ऐतिहासिक रहा है। आजादी के बाद देश की विभिन्न रियासतों के एकीकरण में उनकी भूमिका ने आधुनिक भारत की राजनीतिक और प्रशासनिक संरचना को मजबूत आधार प्रदान किया। इसी कारण उन्हें लौह पुरुष के नाम से जाना जाता है। उनकी जयंती 31 अक्टूबर को देशभर में राष्ट्रीय एकता दिवस के रूप में मनाई जाती है। इस अवसर पर विभिन्न शिक्षण संस्थानों, सरकारी कार्यालयों और सामाजिक संगठनों की ओर से राष्ट्रीय एकता से जुड़े कार्यक्रम आयोजित किए जाते हैं।
लोकसभा अध्यक्ष ओम बिरला इससे पहले भी युवाओं से राष्ट्र निर्माण में सक्रिय भागीदारी निभाने का आग्रह कर चुके हैं। उन्होंने अपने विभिन्न संबोधनों में कहा है कि युवा केवल देश का भविष्य नहीं हैं, बल्कि वर्तमान विकास यात्रा के महत्वपूर्ण भागीदार भी हैं। शिक्षा, विज्ञान, अनुसंधान, तकनीक और नवाचार जैसे क्षेत्रों में युवाओं की उपलब्धियां भारत को नई पहचान दिला रही हैं। उन्होंने युवाओं से अपनी प्रतिभा का उपयोग व्यक्तिगत सफलता के साथ-साथ समाज और देश की प्रगति के लिए करने की अपील की है।लोकसभा अध्यक्ष ने लोकतांत्रिक व्यवस्था में युवाओं की भूमिका को भी महत्वपूर्ण बताया है। उनका मानना है कि लोकतंत्र की मजबूती केवल मतदान तक सीमित नहीं है, बल्कि इसमें नागरिकों की जागरूकता, जिम्मेदारी और सक्रिय भागीदारी भी आवश्यक है। युवाओं को संविधान के मूल्यों को समझना चाहिए और लोकतांत्रिक संस्थाओं के प्रति सम्मान बनाए रखना चाहिए।
उन्होंने पूर्व में शिक्षण संस्थानों में आयोजित कार्यक्रमों के दौरान विद्यार्थियों से संविधान के निर्माण की प्रक्रिया और उसके मूल सिद्धांतों का अध्ययन करने का आग्रह किया था। उनके अनुसार, संविधान देश की लोकतांत्रिक व्यवस्था की आधारशिला है और इसके आदर्शों को समझकर युवा एक जिम्मेदार नागरिक की भूमिका निभा सकते हैं।राष्ट्रीय एकता को मजबूत बनाने में शिक्षा की भूमिका भी अत्यंत महत्वपूर्ण मानी जाती है। देश के विभिन्न हिस्सों से आने वाले विद्यार्थी जब एक-दूसरे की भाषा, संस्कृति और परंपराओं को समझते हैं, तो आपसी सम्मान और सहयोग की भावना विकसित होती है। शैक्षणिक संस्थान इस दिशा में महत्वपूर्ण भूमिका निभा सकते हैं। सांस्कृतिक कार्यक्रमों, संवाद, राष्ट्रीय सेवा योजनाओं और सामाजिक गतिविधियों के माध्यम से युवाओं को देश की विविधता से परिचित कराया जा सकता है।
आज के डिजिटल युग में युवाओं के सामने नई चुनौतियां भी मौजूद हैं। सोशल मीडिया के माध्यम से सूचनाओं का तेजी से प्रसार होता है। ऐसे में गलत जानकारी, अफवाहों और भ्रामक सामग्री से सावधान रहना आवश्यक है। राष्ट्रीय एकता और सामाजिक सद्भाव बनाए रखने के लिए डिजिटल माध्यमों का जिम्मेदारी से इस्तेमाल करना भी महत्वपूर्ण है। किसी भी सूचना को साझा करने से पहले उसकी सत्यता की जांच करना जागरूक नागरिकता का हिस्सा है।लोकसभा अध्यक्ष ने अपने हालिया संबोधनों में युवाओं की रचनात्मक क्षमता, तकनीकी दक्षता और नवाचार को देश की प्रमुख शक्तियों में शामिल बताया है। अक्टूबर में आयोजित ब्रिक्स संसदीय मंच के दौरान भी उन्होंने संसदों से युवाओं की आकांक्षाओं को समझने और उन्हें राष्ट्र निर्माण में योगदान देने के सार्थक अवसर उपलब्ध कराने की आवश्यकता जताई थी।
भारत सरकार ने वर्ष 2047 तक देश को विकसित राष्ट्र बनाने का लक्ष्य निर्धारित किया है। इस लक्ष्य को हासिल करने में युवाओं की शिक्षा, कौशल विकास, रोजगार, उद्यमिता और सामाजिक भागीदारी महत्वपूर्ण होगी। लोकसभा अध्यक्ष ने भी विकसित भारत के संकल्प को पूरा करने के लिए युवाओं की सक्रिय भूमिका पर लगातार जोर दिया है।राष्ट्रीय एकता दिवस का उद्देश्य केवल सरदार पटेल के योगदान को याद करना नहीं, बल्कि देश की अखंडता, भाईचारे और सामूहिक जिम्मेदारी के प्रति प्रतिबद्धता को मजबूत करना भी है। इस अवसर पर युवाओं से राष्ट्रीय हित, सामाजिक समरसता और संवैधानिक मूल्यों को अपने जीवन में अपनाने की अपेक्षा की जाती है।लोकसभा अध्यक्ष का संदेश इसी व्यापक सोच से जुड़ा है कि देश की प्रगति के लिए आर्थिक और तकनीकी विकास के साथ सामाजिक एकता भी आवश्यक है। युवा पीढ़ी जब अपनी ऊर्जा, प्रतिभा और रचनात्मक सोच को सकारात्मक दिशा में लगाएगी, तब एक मजबूत, समावेशी और विकसित भारत के निर्माण में उसका योगदान और अधिक प्रभावी हो सकेगा।
Next Story