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ओम बिरला ने संसदीय समिति का किया गठन, कानूनों के नियमों की होगी समीक्षा

Kavita2
19 Aug 2026 5:18 PM IST
ओम बिरला ने संसदीय समिति का किया गठन, कानूनों के नियमों की होगी समीक्षा
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नई दिल्ली। लोकसभा अध्यक्ष ओम बिरला ने संसद की एक महत्वपूर्ण संसदीय समिति का पुनर्गठन किया है। यह समिति संसद द्वारा बनाए गए कानूनों को लागू करने के लिए विभिन्न मंत्रालयों और विभागों की ओर से बनाए जाने वाले नियमों और उप-नियमों की समीक्षा करती है।

लोकसभा बुलेटिन के अनुसार, ‘सबऑर्डिनेट लेजिस्लेशन’ यानी अधीनस्थ विधान समिति का पुनर्गठन किया गया है। इस समिति की अध्यक्षता अब जनसेना पार्टी के सांसद बालाशोवरी वल्लभनेनी करेंगे।

अधीनस्थ विधान समिति संसद की निगरानी व्यवस्था का एक महत्वपूर्ण हिस्सा मानी जाती है। इसका मुख्य उद्देश्य यह सुनिश्चित करना होता है कि सरकार और उसके मंत्रालय संसद द्वारा पारित कानूनों के तहत बनाए गए नियमों का सही तरीके से पालन कर रहे हैं या नहीं।

जब संसद किसी कानून को मंजूरी देती है तो उसे लागू करने के लिए कई बार सरकार को विस्तृत नियम और प्रक्रियाएं तैयार करनी पड़ती हैं। इन्हीं नियमों को अधीनस्थ विधान कहा जाता है। यह समिति इन नियमों की जांच करती है और देखती है कि कहीं सरकार द्वारा बनाए गए नियम मूल कानून की भावना से अलग तो नहीं हैं।

लोकसभा अध्यक्ष ओम बिरला द्वारा समिति के पुनर्गठन के बाद अब नई टीम इन जिम्मेदारियों को संभालेगी। समिति मंत्रालयों द्वारा तैयार किए गए नियमों, विनियमों और अधिसूचनाओं की समीक्षा करेगी।

संसदीय समितियां संसद की कार्यप्रणाली को प्रभावी बनाने में महत्वपूर्ण भूमिका निभाती हैं। ये समितियां विस्तृत जांच और समीक्षा के जरिए सरकार के कामकाज पर नजर रखती हैं। अधीनस्थ विधान समिति भी इसी व्यवस्था का हिस्सा है।

बालाशोवरी वल्लभनेनी जनसेना पार्टी के सांसद हैं। उन्हें इस महत्वपूर्ण समिति की जिम्मेदारी दिए जाने के बाद अब वे समिति की बैठकों और समीक्षा प्रक्रिया का नेतृत्व करेंगे।

समिति के सामने सबसे बड़ी जिम्मेदारी यह होगी कि वह यह सुनिश्चित करे कि मंत्रालयों द्वारा बनाए गए नियम संसद के कानूनों के अनुरूप हों। यदि किसी नियम में विसंगति या जरूरत से ज्यादा अधिकारों का इस्तेमाल पाया जाता है तो समिति अपनी सिफारिशें संसद के सामने रख सकती है।

अधीनस्थ विधान समिति समय-समय पर मंत्रालयों से जानकारी मांगती है और संबंधित अधिकारियों को बैठकों में बुलाकर नियमों की जानकारी लेती है। समिति की रिपोर्ट संसद में पेश की जाती है, जिसके आधार पर आगे की कार्रवाई की जा सकती है।

संसदीय व्यवस्था में ऐसी समितियों को कानूनों की गुणवत्ता और पारदर्शिता बनाए रखने का महत्वपूर्ण माध्यम माना जाता है। संसद द्वारा बनाए गए कानूनों के सही क्रियान्वयन के लिए यह जरूरी होता है कि उनके तहत बनाए गए नियम भी स्पष्ट और प्रभावी हों।

नई समिति के गठन के साथ अब मंत्रालयों के नियमों और प्रक्रियाओं की समीक्षा का काम आगे बढ़ेगा। समिति विभिन्न विभागों से जुड़े अधीनस्थ कानूनों का अध्ययन करेगी और जरूरत पड़ने पर सुझाव देगी।

राजनीतिक दृष्टि से भी यह नियुक्ति महत्वपूर्ण मानी जा रही है, क्योंकि अलग-अलग दलों के सांसदों को संसदीय समितियों में जिम्मेदारियां दी जाती हैं। इससे संसद में विभिन्न दलों की भागीदारी सुनिश्चित होती है।

लोकसभा अध्यक्ष समय-समय पर संसदीय समितियों का पुनर्गठन करते हैं ताकि उनकी कार्यप्रणाली प्रभावी बनी रहे। नई समिति भी आने वाले समय में कानूनों के बेहतर क्रियान्वयन और प्रशासनिक पारदर्शिता में भूमिका निभाएगी।

विशेषज्ञों का मानना है कि अधीनस्थ विधान समिति जैसी संस्थाएं सरकार के निर्णयों और नियमों पर लोकतांत्रिक निगरानी बनाए रखने में अहम भूमिका निभाती हैं। इससे यह सुनिश्चित होता है कि कार्यपालिका द्वारा बनाए गए नियम संसद की मंशा के अनुरूप हों।

फिलहाल बालाशोवरी वल्लभनेनी के नेतृत्व में गठित नई समिति अपनी जिम्मेदारियों को संभालेगी और मंत्रालयों द्वारा बनाए गए नियमों की समीक्षा का काम करेगी।

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