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अब सिर्फ दूध से बने उत्पाद पर ही लिखा जा सकेगा ‘पनीर’, FSSAI ने तैयार किया नया नियम

Kavita2
25 Sept 2026 10:30 AM IST
अब सिर्फ दूध से बने उत्पाद पर ही लिखा जा सकेगा ‘पनीर’, FSSAI ने तैयार किया नया नियम
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नई दिल्ली। बाजार में पनीर के नाम पर बेचे जाने वाले गैर-दुग्ध उत्पादों को लेकर खाद्य सुरक्षा एवं मानक प्राधिकरण (FSSAI) नियमों में बदलाव की तैयारी कर रहा है। प्रस्तावित व्यवस्था लागू होने के बाद केवल दूध से तैयार उत्पाद को ही ‘पनीर’ नाम से बेचा जा सकेगा। दूध के अलावा दूसरे स्रोतों, खासकर वनस्पति वसा या तेल का इस्तेमाल कर तैयार किए गए उत्पाद के नाम, पैकेजिंग या लेबल पर पनीर शब्द का इस्तेमाल नहीं किया जा सकेगा।

FSSAI ने खाद्य सुरक्षा से जुड़े मौजूदा नियमों में संशोधन के लिए मसौदा जारी किया है। प्रस्ताव का उद्देश्य उपभोक्ताओं के सामने किसी खाद्य उत्पाद की वास्तविक प्रकृति स्पष्ट करना और पनीर जैसे डेयरी उत्पादों के नाम का इस्तेमाल गैर-दुग्ध उत्पादों के लिए रोकना है। मसौदे पर संबंधित पक्षों से सुझाव और आपत्तियां मांगी गई हैं। निर्धारित प्रक्रिया पूरी होने के बाद अंतिम नियम अधिसूचित किए जा सकते हैं।

पनीर भारतीय खानपान का एक प्रमुख हिस्सा है। घरों से लेकर होटल, रेस्तरां, ढाबों और कैटरिंग कारोबार तक इसका बड़े पैमाने पर इस्तेमाल होता है। बाजार में इसकी मांग अधिक होने के कारण ऐसे उत्पाद भी बिकते रहे हैं जिनमें दूध की जगह या उसके साथ वनस्पति वसा और दूसरे तत्वों का इस्तेमाल किया जाता है। ऐसे उत्पादों को कई बार पनीर जैसा नाम या प्रस्तुति दिए जाने से उपभोक्ता के लिए असली डेयरी पनीर और उसके विकल्प के बीच अंतर करना मुश्किल हो सकता है।

प्रस्तावित नियम इसी स्थिति को अधिक स्पष्ट बनाने पर केंद्रित हैं। नए प्रावधान लागू होने के बाद किसी गैर-दुग्ध उत्पाद को सीधे पनीर बताकर नहीं बेचा जा सकेगा। यानी केवल रंग, आकार, स्वाद या इस्तेमाल में पनीर जैसा होने के कारण किसी उत्पाद के लिए पनीर शब्द इस्तेमाल करने की अनुमति नहीं होगी। उत्पाद की संरचना और उसमें इस्तेमाल सामग्री के आधार पर उसका सही नाम और श्रेणी निर्धारित करनी होगी।

FSSAI की मौजूदा मानक व्यवस्था में पनीर को दुग्ध उत्पाद के रूप में परिभाषित किया गया है। इसे दूध को खाद्य अम्लों या अन्य अनुमत तरीकों से जमाकर तैयार किया जाता है। प्रस्तावित संशोधन से इस पहचान को लेबलिंग और बाजार में उत्पाद के नाम के स्तर पर और स्पष्ट किए जाने की तैयारी है।

इस बदलाव का असर विशेष रूप से उन कंपनियों और विक्रेताओं पर पड़ सकता है जो वनस्पति तेल या दूसरे गैर-दुग्ध घटकों से बने उत्पादों को पनीर से मिलता-जुलता नाम देकर बेचते हैं। नियम लागू होने के बाद उन्हें उत्पाद के नाम, पैकेजिंग और प्रचार सामग्री में बदलाव करना पड़ सकता है। उपभोक्ता को यह साफ बताना होगा कि वह वास्तविक डेयरी पनीर खरीद रहा है या कोई वैकल्पिक खाद्य उत्पाद।

खाद्य उत्पादों के नाम और लेबलिंग का मामला इसलिए महत्वपूर्ण है क्योंकि ग्राहक अक्सर पैकेट के सामने लिखे बड़े नाम को देखकर खरीदारी का फैसला करता है। सामग्री की पूरी सूची पढ़ने वाले उपभोक्ताओं की संख्या अपेक्षाकृत कम हो सकती है। ऐसे में यदि किसी गैर-दुग्ध उत्पाद पर पनीर शब्द प्रमुखता से लिखा हो तो ग्राहक उसके वास्तविक स्वरूप को लेकर भ्रमित हो सकता है। प्रस्तावित नियम इस तरह के भ्रम को कम करने की दिशा में कदम माना जा रहा है।

हालांकि इसका अर्थ यह नहीं है कि गैर-दुग्ध या पौधों से तैयार विकल्पों की बिक्री पर रोक लग जाएगी। ऐसे उत्पाद बाजार में बेचे जा सकेंगे, लेकिन उनके लिए ऐसा नाम इस्तेमाल करना होगा जिससे उनकी वास्तविक प्रकृति स्पष्ट हो। अंतिम नियमों में यह निर्धारित किया जाएगा कि ऐसे उत्पादों के लिए कौन-सी लेबलिंग और नामकरण व्यवस्था लागू होगी।

नए नियम होटल और रेस्तरां क्षेत्र के लिए भी महत्वपूर्ण हो सकते हैं। यदि खाद्य कारोबार में किसी व्यंजन को पनीर के नाम से बेचा जाता है तो उसमें इस्तेमाल किए जाने वाले मुख्य उत्पाद की पहचान को लेकर अधिक स्पष्टता की जरूरत पड़ सकती है। हालांकि रेस्तरां मेन्यू और तैयार व्यंजनों पर प्रस्तावित नियमों का सटीक प्रभाव अंतिम अधिसूचना और उसके अनुपालन संबंधी दिशा-निर्देशों के बाद ही पूरी तरह स्पष्ट होगा।

खाद्य सुरक्षा के साथ यह मामला उपभोक्ता अधिकारों से भी जुड़ा है। कोई ग्राहक यदि पनीर खरीद रहा है तो सामान्य रूप से उसकी अपेक्षा होती है कि उसे दूध से तैयार डेयरी उत्पाद मिले। यदि उसकी जगह वनस्पति तेल या अन्य सामग्री से तैयार विकल्प दिया जाता है और उसकी पहचान स्पष्ट नहीं है तो ग्राहक उत्पाद की गुणवत्ता और पोषण संबंधी विशेषताओं को लेकर भ्रमित हो सकता है।

बाजार में असली पनीर और सस्ते विकल्पों की कीमत में अंतर भी इस मुद्दे को महत्वपूर्ण बनाता है। दूध से पनीर तैयार करने की लागत दूध की कीमत और उत्पादन प्रक्रिया पर निर्भर करती है। इसके मुकाबले कुछ गैर-दुग्ध विकल्प कम लागत में तैयार हो सकते हैं। यदि दोनों को एक ही नाम से बेचा जाए तो कीमत के साथ-साथ प्रतिस्पर्धा और उपभोक्ता के चयन पर भी असर पड़ सकता है।

FSSAI का प्रस्ताव अंतिम नियम नहीं है। नियामकीय प्रक्रिया के तहत जारी मसौदे पर उद्योग, उपभोक्ता समूहों और अन्य संबंधित पक्षों से सुझाव तथा आपत्तियां ली जाती हैं। इन पर विचार करने के बाद प्राधिकरण अंतिम प्रावधान तय कर सकता है। इसलिए मसौदे में प्रस्तावित व्यवस्था और अंतिम अधिसूचना में कुछ अंतर भी हो सकता है।

यदि प्रस्तावित नियम अंतिम रूप में लागू होते हैं तो खाद्य कंपनियों को अपने उत्पादों की पैकेजिंग और लेबल की समीक्षा करनी होगी। गैर-दुग्ध उत्पादों पर पनीर शब्द के इस्तेमाल से बचना होगा और उनकी वास्तविक संरचना के अनुरूप नाम देना होगा। दुकानदारों और अन्य खाद्य कारोबारियों को भी नए मानकों के अनुसार उत्पाद बेचने होंगे।

इस बदलाव का सबसे सीधा फायदा ग्राहकों को उत्पाद की सही पहचान मिलने के रूप में हो सकता है। पैकेट पर ‘पनीर’ लिखा होने का अर्थ स्पष्ट रूप से दूध से बने उत्पाद से होगा, जबकि गैर-दुग्ध विकल्पों को अलग पहचान के साथ बाजार में रखना होगा। अंतिम नियम जारी होने के बाद ही इसके लागू होने की तारीख, संक्रमण अवधि और अनुपालन से संबंधित पूरी तस्वीर स्पष्ट होगी।

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