- Home
- /
- दिल्ली-एनसीआर
- /
- नो इंश्योरेंस, नो...
दिल्ली-एनसीआर
नो इंश्योरेंस, नो पेट्रोल! सुप्रीम कोर्ट सख्त, बिना बीमा वाहनों पर कसेगा शिकंजा
Ratna Netam
4 Aug 2026 9:41 PM IST

x
नई दिल्ली : सुप्रीम कोर्ट ने देश में बिना वैध थर्ड-पार्टी बीमा के चल रहे वाहनों पर सख्त रुख अपनाते हुए केंद्र सरकार, बीमा नियामक और संबंधित एजेंसियों को महत्वपूर्ण निर्देश जारी किए हैं। अदालत ने कहा कि बड़ी संख्या में वाहन बिना अनिवार्य बीमा के सड़कों पर दौड़ रहे हैं, जिससे सड़क दुर्घटनाओं के पीड़ितों को समय पर मुआवजा मिलने में गंभीर कठिनाइयों का सामना करना पड़ता है। इस स्थिति को देखते हुए सर्वोच्च अदालत ने केंद्र सरकार को एक पायलट प्रोजेक्ट शुरू करने का निर्देश दिया है, जिसके तहत जिन वाहनों का वैध थर्ड-पार्टी बीमा नहीं होगा, उन्हें पेट्रोल पंपों पर ईंधन उपलब्ध नहीं कराया जाएगा।
न्यायमूर्ति संजय करोल और न्यायमूर्ति प्रशांत कुमार मिश्रा की पीठ ने सुनवाई के दौरान कहा कि मोटर वाहन अधिनियम के तहत प्रत्येक वाहन के लिए थर्ड-पार्टी बीमा अनिवार्य है, लेकिन इसके बावजूद बड़ी संख्या में वाहन मालिक इस नियम का पालन नहीं कर रहे हैं। अदालत ने कहा कि इस लापरवाही का सबसे बड़ा नुकसान सड़क दुर्घटनाओं के पीड़ितों और उनके परिवारों को उठाना पड़ता है, जिन्हें मुआवजा प्राप्त करने में वर्षों तक इंतजार करना पड़ता है।
सुप्रीम कोर्ट ने सड़क परिवहन एवं राजमार्ग मंत्रालय तथा बीमा नियामक एवं विकास प्राधिकरण (आईआरडीएआई) को मिलकर ऐसी तकनीकी व्यवस्था विकसित करने का निर्देश दिया है, जिसके माध्यम से वाहन के बीमा की स्थिति की पुष्टि होने के बाद ही पेट्रोल या डीजल उपलब्ध कराया जा सके। अदालत ने सुझाव दिया कि इस व्यवस्था में ऑटोमैटिक नंबर प्लेट रिकग्निशन (ANPR) कैमरों का उपयोग किया जा सकता है। ये कैमरे वाहन की नंबर प्लेट पढ़कर उसकी बीमा स्थिति का तत्काल सत्यापन कर सकेंगे।
अदालत ने अपने आदेश में संसद की वित्त संबंधी स्थायी समिति की वर्ष 2024-25 की रिपोर्ट का भी उल्लेख किया। रिपोर्ट के अनुसार देश में लगभग 56 प्रतिशत वाहन बिना वैध बीमा के संचालित हो रहे हैं। यह संख्या करीब 16.54 करोड़ वाहनों की है, जबकि देश में कुल पंजीकृत वाहनों की संख्या लगभग 30.48 करोड़ बताई गई है। अदालत ने इसे बेहद चिंताजनक स्थिति बताते हुए कहा कि कानून होने के बावजूद उसका प्रभावी अनुपालन नहीं हो रहा है।
सुप्रीम कोर्ट ने यह भी स्पष्ट किया कि यदि बिना बीमा वाले वाहनों को पेट्रोल पंपों पर ईंधन नहीं मिलेगा, तो ऐसे वाहनों की पहचान करना आसान होगा और वाहन मालिक समय रहते अपना बीमा नवीनीकरण कराने के लिए प्रेरित होंगे। अदालत ने यह भी नोट किया कि पेट्रोलियम एवं प्राकृतिक गैस मंत्रालय ने इस प्रस्ताव पर किसी प्रकार की आपत्ति नहीं जताई है, जिससे इस दिशा में आगे बढ़ने का रास्ता साफ होता दिखाई दे रहा है।
सुनवाई के दौरान सुप्रीम कोर्ट ने वर्ष 2018 में दिए गए अपने एक महत्वपूर्ण आदेश का भी उल्लेख किया, जिसमें नई कारों के लिए तीन वर्ष तथा नए दोपहिया वाहनों के लिए पांच वर्ष का थर्ड-पार्टी बीमा अनिवार्य किया गया था। अब अदालत ने इस अवधि को और बढ़ाने का निर्देश दिया है। नए आदेश के अनुसार अब नई कारों के लिए चार वर्ष तथा नए दोपहिया वाहनों के लिए छह वर्ष का थर्ड-पार्टी बीमा अनिवार्य होगा। अदालत ने आईआरडीएआई को इस संबंध में आवश्यक दिशा-निर्देश शीघ्र जारी करने के निर्देश दिए हैं।
इसके अलावा अदालत ने राज्य पुलिस और यातायात प्रवर्तन एजेंसियों को आधुनिक तकनीक से लैस करने पर भी जोर दिया। सुप्रीम कोर्ट ने निर्देश दिया कि पुलिस अधिकारियों को ऐसे मोबाइल उपकरण या विशेष एप उपलब्ध कराए जाएं, जिनकी सहायता से वे मौके पर ही किसी भी वाहन की बीमा स्थिति की जांच कर सकें। यदि वाहन बिना वैध बीमा के पाया जाता है तो उसी समय ई-चालान जारी किया जा सके।
सुप्रीम कोर्ट ने राष्ट्रीय राजमार्गों पर बढ़ती दुर्घटनाओं और टोल प्लाजा पर लगने वाली लंबी कतारों का भी उल्लेख किया। अदालत ने सुझाव दिया कि चुनिंदा राष्ट्रीय राजमार्गों पर पायलट प्रोजेक्ट के तहत ऐसी तकनीक विकसित की जाए, जिसमें वाहनों को टोल पर रोके बिना उनकी पहचान कर टोल टैक्स की वसूली और बीमा सत्यापन दोनों कार्य एक साथ किए जा सकें। इसके लिए एएनपीआर कैमरों को वाहन पोर्टल और बीमा सूचना ब्यूरो के डेटाबेस से जोड़ने की भी सिफारिश की गई है, ताकि बिना बीमा वाले वाहनों की स्वतः पहचान कर ई-चालान जारी किया जा सके।
अदालत ने अपने आदेश में कहा कि अनिवार्य थर्ड-पार्टी बीमा केवल कानूनी औपचारिकता नहीं है, बल्कि इसका उद्देश्य सड़क दुर्घटना में घायल या मृतकों के परिजनों को समय पर आर्थिक सहायता और मुआवजा उपलब्ध कराना है। यदि प्रत्येक वाहन का बीमा सुनिश्चित हो जाता है, तो दुर्घटना पीड़ितों को न्याय पाने के लिए वर्षों तक अदालतों के चक्कर नहीं लगाने पड़ेंगे। सुप्रीम कोर्ट के इस निर्देश को सड़क सुरक्षा और बीमा अनुपालन को मजबूत करने की दिशा में एक महत्वपूर्ण कदम माना जा रहा है।
TagsSupreme Courtstrictinsurancevehiclesscrewsसुप्रीम कोर्टसख्तबीमावाहनोंशिकंजाजनता से रिश्ता न्यूज़जनता से रिश्ताजनता से रिश्ता.कॉमआज की ताजा न्यूज़हिंन्दी न्यूज़भारत न्यूज़खबरों का सिलसिलाआज की ब्रेंकिग न्यूज़आज की बड़ी खबरमिड डे अख़बारJanta Se Rishta NewsJanta Se RishtaToday's Latest NewsHindi NewsIndia NewsKhabron Ka SilsilaToday's Breaking NewsToday's Big NewsMid Day Newspaperजनताjantasamachar newssamacharहिंन्दी समाचार
Next Story





