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पटाखों पर पूर्ण बैन नहीं: सुप्रीम कोर्ट ने दिया संतुलित रुख का संकेत

Tara Tandi
12 Oct 2026 4:50 PM IST
पटाखों पर पूर्ण बैन नहीं: सुप्रीम कोर्ट ने दिया संतुलित रुख का संकेत
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दिल्ली: सुप्रीम कोर्ट ने सोमवार को कहा कि दिल्ली-NCR में पटाखों से होने वाले वायु प्रदूषण की समस्या से निपटने के लिए पाबंदी वाले आदेश लागू करने के बजाय, जो ज़मीनी स्तर पर लागू करना मुश्किल हो सकता है, लोगों में जागरूकता और उनकी स्वेच्छा से भागीदारी ज़्यादा असरदार होगी।
भारत के मुख्य न्यायाधीश (CJI) सूर्यकांत और जस्टिस जॉयमाल्य बागची और वी. मोहना की बेंच ने कहा कि सुप्रीम कोर्ट धार्मिक भावनाओं को ठेस नहीं पहुंचाएगा, लेकिन पटाखों के हानिकारक असर को कम करने के लिए संतुलित और व्यावहारिक नज़रिए की ज़रूरत पर ज़ोर दिया। "हम धार्मिक भावनाओं को ठेस नहीं पहुंचाएंगे, लेकिन साथ ही, लोगों को खुद आगे आना चाहिए।
इस पूरी प्रक्रिया में संतुलन बनाने वाला नज़रिया अपनाना चाहिए। अगर हम यह संतुलित नज़रिया अपनाते हैं, तो समाज खुद जागरूक होता है और लोग आगे आते हैं," CJI कांत की अगुवाई वाली बेंच ने कहा। सुप्रीम कोर्ट दिल्ली-NCR में वायु प्रदूषण से जुड़े मामलों पर स्वतः संज्ञान (suo motu) लेते हुए सुनवाई कर रहा था, जिसमें पटाखे जलाना, फसल के अवशेष जलाना और ठोस कचरा प्रबंधन शामिल हैं।
CJI कांत की अगुवाई वाली बेंच ने ऐसे पाबंदी वाले आदेश पारित करने के खिलाफ चेतावनी दी जिन्हें प्रभावी ढंग से लागू न किया जा सके, और कहा कि ऐसे निर्देशों को अक्सर ज़बरदस्ती की कार्रवाई के तौर पर देखा जाता है। "असली समस्या, और हम इसे दोहरा रहे हैं, यह है कि जैसे ही आप कोई आदेश, कोई पाबंदी वाला आदेश पारित करते हैं, लोग उसे ज़बरदस्ती की कार्रवाई के तौर पर देखते हैं।
यह इंसानी प्रतिक्रिया है। हमें इन मामलों में बहुत व्यावहारिक और यथार्थवादी होना चाहिए," सुप्रीम कोर्ट ने कहा। कोर्ट ने आगे कहा कि लोगों से दिवाली मनाने और पटाखे जलाने को तय घंटों तक सीमित रखने की ईमानदार अपील करने के लिए पर्याप्त समय है, जैसा कि पहले भी किया गया है। सुनवाई के दौरान, शीर्ष अदालत की मदद कर रहीं एमिकस क्यूरी (न्याय मित्र) और सीनियर एडवोकेट अपराजिता सिंह ने तर्क दिया कि पटाखे धार्मिक रीति-रिवाजों का ज़रूरी हिस्सा नहीं हैं और उन्होंने सार्वजनिक स्वास्थ्य, खासकर बच्चों, बुज़ुर्गों और बीमार लोगों पर इनके बुरे असर की ओर ध्यान दिलाया। "क्योंकि आतिशबाज़ी धर्म का हिस्सा नहीं है; पूजा-अर्चना है! पटाखे नहीं।
भगवान भी हैरान रह जाएंगे अगर उन्हें पता चले कि उनके नाम पर बच्चे तकलीफ़ झेल रहे हैं और बीमार पड़ रहे हैं," उन्होंने कहा। सिंह ने सुप्रीम कोर्ट से आग्रह किया कि इस मामले को 'एयर क्वालिटी मैनेजमेंट कमीशन' (CAQM) के पास भेजा जाए, जो दिल्ली-NCR में वायु प्रदूषण को नियंत्रित करने के उपायों में तालमेल बिठाने के लिए जिम्मेदार है, ताकि उपलब्ध वैज्ञानिक जानकारी और स्वास्थ्य संबंधी चिंताओं की जांच की जा सके। उन्होंने पटाखे जलाने के समय को एक या दो घंटे तक सीमित करने पर भी संदेह जताया और कहा कि ऐसी पाबंदियों को शायद ठीक से लागू न किया जा सके।
हालांकि, सुप्रीम कोर्ट ने नागरिकों को पटाखों से होने वाले स्वास्थ्य खतरों के बारे में जागरूक करने और उन्हें स्वेच्छा से कम प्रदूषण फैलाने वाले तरीकों को अपनाने के लिए प्रोत्साहित करने पर जोर दिया। CJI कांत की अध्यक्षता वाली बेंच ने कहा, "हमें लोगों को समझदार बनाना होगा, उनमें जागरूकता लानी होगी और उन्हें बताना होगा कि कौन से पटाखे नुकसानदायक हैं और कौन से कम नुकसानदायक। हमें ऐसी संस्कृति को बढ़ावा देना चाहिए और लोगों को हमारी मूल संस्कृति की ओर लौटने के लिए प्रेरित करना चाहिए, जिसमें केवल फुलझड़ियां और दीये जलाए जाते थे।" बेंच ने पटाखे जलाने के नुकसानदायक परिणामों के बारे में जानकारी देने वाली शैक्षिक सामग्री प्रकाशित करने और लोगों को पटाखे कम जलाने तथा वायु और ध्वनि प्रदूषण को रोकने के लिए उन्हें कुछ खास घंटों तक ही सीमित रखने के लिए प्रोत्साहित करने का सुझाव भी दिया।
बेंच ने यह भी कहा कि अधिकारी बाजार में पटाखों की उपलब्धता को नियंत्रित करने पर विचार कर सकते हैं, जिसमें कम नुकसानदायक किस्मों की अनुमति दी जाए और अधिक प्रदूषण फैलाने वाले पटाखों की बिक्री पर रोक लगाई जाए। मामले की अगली सुनवाई 15 अक्टूबर को होगी। इससे पहले, 30 सितंबर को सुप्रीम कोर्ट ने दिवाली से पहले पटाखों पर पूरी तरह से रोक लगाने से इनकार कर दिया था, साथ ही यह भी संकेत दिया था कि दिन भर बिना किसी रोक-टोक के पटाखे जलाने की अनुमति नहीं दी जाएगी।
जस्टिस एम.एम. सुंदरेश और पी.बी. वराले की बेंच ने कहा था कि शीर्ष अदालत को दिवाली से जुड़ी धार्मिक भावनाओं और वायु प्रदूषण तथा बच्चों, बुजुर्गों और बीमार लोगों पर इसके असर को लेकर जताई जा रही चिंताओं के बीच संतुलन बनाना होगा।
शीर्ष अदालत ने कुछ खास तरह के 'नेक्स्ट-जेनरेशन जॉइंट ग्रीन क्रैकर्स' (पर्यावरण के अनुकूल पटाखे) की अनुमति देने के प्रस्ताव पर भी विचार किया था, बशर्ते उनके निर्माण, शोर के स्तर, पटाखों की संख्या और आकार, तथा लगातार पटाखे फोड़ने के बीच के अंतराल से जुड़ी सुरक्षा शर्तें पूरी की जाएं। अदालत ने बेरियम-आधारित पटाखों के बारे में विशेषज्ञ संस्थाओं से और अधिक मूल्यांकन करने को भी कहा था।
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