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PNB घोटाले में नीरव मोदी का सहयोगी संदीप मिस्त्री UAE से प्रत्यर्पित, 6 अक्टूबर तक न्यायिक हिरासत

Kavita2
29 Sept 2026 4:40 PM IST
PNB घोटाले में नीरव मोदी का सहयोगी संदीप मिस्त्री UAE से प्रत्यर्पित, 6 अक्टूबर तक न्यायिक हिरासत
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नई दिल्ली। करोड़ों डॉलर के पंजाब नेशनल बैंक घोटाले से जुड़े मामले में केंद्रीय जांच ब्यूरो ने भगोड़े कारोबारी नीरव मोदी के सहयोगी संदीप मिस्त्री को संयुक्त अरब अमीरात से प्रत्यर्पण के बाद गिरफ्तार कर लिया है। संदीप मिस्त्री को सोमवार को भारत लाया गया, जिसके बाद मंगलवार को सीबीआई ने मुंबई में औपचारिक रूप से गिरफ्तार किया।

सीबीआई की कार्रवाई नवंबर 2025 में एक विशेष अदालत की ओर से जारी गैर-जमानती वारंट के अनुपालन में की गई। गिरफ्तारी के बाद एजेंसी ने संदीप मिस्त्री को विशेष सीबीआई अदालत के समक्ष पेश किया। सुनवाई के दौरान सीबीआई ने उसकी पुलिस रिमांड के लिए जोर नहीं दिया, जिसके बाद अदालत ने उसे 6 अक्टूबर तक न्यायिक हिरासत में भेज दिया।

मामला पंजाब नेशनल बैंक में हुए बहुचर्चित कथित बैंकिंग घोटाले से जुड़ा है, जिसमें नीरव मोदी और उससे जुड़े लोगों पर बैंकिंग व्यवस्था का दुरुपयोग कर बड़े पैमाने पर वित्तीय धोखाधड़ी करने के आरोप हैं। सीबीआई लंबे समय से इस मामले से जुड़े विभिन्न लोगों और वित्तीय लेन-देन की जांच कर रही है।

संदीप मिस्त्री का नाम भी इसी जांच के दौरान सामने आया था। एजेंसी के मुताबिक वह नीरव मोदी से जुड़े नेटवर्क का हिस्सा था और मामले में उसकी भूमिका की जांच की जा रही थी। उसके खिलाफ अदालत से गैर-जमानती वारंट जारी होने के बाद भारतीय एजेंसियां उसे वापस लाने की प्रक्रिया में जुटी थीं।

संयुक्त अरब अमीरात से प्रत्यर्पण की प्रक्रिया पूरी होने के बाद उसे भारत लाया गया। इसके बाद सीबीआई ने अपने लंबित मामले में उसे औपचारिक रूप से गिरफ्तार कर लिया।

अदालत में पेशी के दौरान एजेंसी ने तत्काल हिरासत में पूछताछ की मांग नहीं की। इसके बाद विशेष अदालत ने संदीप मिस्त्री को न्यायिक हिरासत में भेजने का आदेश दिया।

अब 6 अक्टूबर तक वह न्यायिक हिरासत में रहेगा। इस अवधि के दौरान जांच एजेंसी मामले से जुड़े दस्तावेजों और अन्य साक्ष्यों के आधार पर आगे की रणनीति तय कर सकती है।

सीबीआई की जांच का फोकस इस बात पर है कि संदीप मिस्त्री की कथित भूमिका नीरव मोदी के नेटवर्क में कितनी महत्वपूर्ण थी और वह वित्तीय लेन-देन या अन्य गतिविधियों में किस स्तर तक शामिल था।

मामले से जुड़े दस्तावेजों, बैंकिंग रिकॉर्ड और अन्य साक्ष्यों के आधार पर जांच एजेंसी उसकी भूमिका की पड़ताल कर रही है। आवश्यकता पड़ने पर अदालत से आगे पूछताछ या अन्य जांच प्रक्रिया के लिए अनुमति मांगी जा सकती है।

नीरव मोदी से जुड़ा पीएनबी घोटाला देश के सबसे बड़े बैंकिंग घोटालों में से एक माना गया है। मामले में कई कंपनियों, बैंकिंग लेन-देन और कथित फर्जी गारंटी से जुड़े आरोप सामने आए थे।

सीबीआई के साथ अन्य केंद्रीय एजेंसियों ने भी इस मामले में अलग-अलग स्तर पर कार्रवाई की है। वर्षों से चल रही जांच के दौरान कई आरोपियों की संपत्तियों, वित्तीय लेन-देन और विदेशी संपर्कों की जांच की गई है।

संदीप मिस्त्री का भारत प्रत्यर्पण इसलिए महत्वपूर्ण माना जा रहा है क्योंकि वह लंबे समय से देश से बाहर था और उसके खिलाफ अदालत ने गैर-जमानती वारंट जारी किया हुआ था।

प्रत्यर्पण की प्रक्रिया में संबंधित देश की कानूनी व्यवस्था और भारत की जांच एजेंसियों के बीच समन्वय जरूरी होता है। सभी आवश्यक कानूनी औपचारिकताएं पूरी होने के बाद ही किसी आरोपी को भारत लाया जा सकता है।

सीबीआई अब उससे जुड़े पुराने रिकॉर्ड भी खंगाल रही है। यह देखा जा रहा है कि वह नीरव मोदी के साथ किस भूमिका में जुड़ा था और किन-किन संस्थाओं या व्यक्तियों से उसका संपर्क था।

यदि उसके नाम से कोई बैंक खाता, कंपनी, वित्तीय दस्तावेज या कारोबारी लेन-देन जुड़ा हुआ पाया जाता है तो उसकी भी जांच की जा सकती है।

मामले में अदालत के सामने पेश किए गए दस्तावेजों और सीबीआई की केस डायरी का भी महत्वपूर्ण स्थान रहेगा। एजेंसी को आगे यह साबित करना होगा कि संदीप मिस्त्री की कथित भूमिका किस प्रकार पूरे घोटाले से जुड़ती है।

फिलहाल अदालत ने उसे 6 अक्टूबर तक न्यायिक हिरासत में भेजा है। इसका अर्थ है कि वह इस अवधि तक जेल में रहेगा और आगे की तारीख पर अदालत मामले की अगली सुनवाई करेगी।

सीबीआई उसके खिलाफ जारी गैर-जमानती वारंट के अनुपालन को भी अदालत के समक्ष दर्ज कर चुकी है। नवंबर 2025 में जारी यह वारंट उसकी गिरफ्तारी और प्रत्यर्पण की प्रक्रिया का महत्वपूर्ण आधार बना।

नीरव मोदी से जुड़े मामलों में भारतीय एजेंसियां लंबे समय से विदेशों में मौजूद आरोपियों और सहयोगियों को वापस लाने की कोशिश करती रही हैं। संदीप मिस्त्री का प्रत्यर्पण इसी क्रम की एक महत्वपूर्ण कार्रवाई है।

जांच एजेंसी अब यह पता लगाने की कोशिश कर रही है कि उसके पास पीएनबी घोटाले से जुड़े ऐसे कौन से दस्तावेज या जानकारी हो सकती है, जो मामले की आगे की जांच में मदद करे।

इसके अलावा यह भी देखा जा सकता है कि कथित घोटाले के दौरान वह किन लोगों के संपर्क में था और उसका कामकाज किस प्रकार संचालित होता था।

फिलहाल संदीप मिस्त्री के खिलाफ आरोप सिद्ध नहीं हुए हैं और मामले में अंतिम निर्णय अदालत की प्रक्रिया के बाद ही होगा।

सीबीआई की ओर से उसकी गिरफ्तारी के बाद अब कानूनी प्रक्रिया का अगला चरण शुरू हो गया है। एजेंसी दस्तावेजी और डिजिटल साक्ष्यों के आधार पर मामले को आगे बढ़ाएगी।

विशेष सीबीआई अदालत में अगली सुनवाई के दौरान जांच की प्रगति और हिरासत की स्थिति को लेकर आगे आदेश दिया जा सकता है।

संदीप मिस्त्री के प्रत्यर्पण और गिरफ्तारी को नीरव मोदी से जुड़े पीएनबी घोटाला मामले की जांच में महत्वपूर्ण घटनाक्रम माना जा रहा है।

फिलहाल वह 6 अक्टूबर तक न्यायिक हिरासत में रहेगा। इसके बाद अदालत आगे की कानूनी प्रक्रिया और जांच एजेंसी की मांगों के आधार पर अगला आदेश जारी करेगी।

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