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दिल्ली-एनसीआर
NIPER और एस्ट्राजेनेका ने मिलाया हाथ 25 केंद्रों पर काम
Ratna Netam
14 Oct 2026 7:06 PM IST

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नई दिल्ली। भारत में चिकित्सा अनुसंधान और नई दवाओं के विकास से जुड़ी क्षमताओं को मजबूत करने के लिए एक महत्वपूर्ण पहल की गई है। राष्ट्रीय औषधीय शिक्षा एवं अनुसंधान संस्थान (NIPER), रायबरेली और एस्ट्राजेनेका इंडिया ने देश में क्लिनिकल रिसर्च का विस्तार करने के लिए समझौता किया है। इस साझेदारी के तहत महानगरों से बाहर 25 उभरते अनुसंधान क्षेत्रों में क्लिनिकल ट्रायल सुविधाओं को मजबूत किया जाएगा। इसके साथ ही प्रशिक्षित कर्मचारियों की उपलब्धता बढ़ाने और अनुसंधान केंद्रों को निरीक्षण के लिए तैयार करने पर विशेष ध्यान दिया जाएगा।केंद्रीय रसायन एवं उर्वरक मंत्रालय के अनुसार, बुधवार, 14 अक्टूबर 2026 को नई दिल्ली में इस समझौता ज्ञापन (MoU) पर हस्ताक्षर किए गए। इस अवसर पर फार्मास्युटिकल्स विभाग के सचिव मनोज जोशी मौजूद रहे। यह साझेदारी केंद्र सरकार की बायोफार्मा शक्ति पहल के उद्देश्यों को आगे बढ़ाने के लिए की गई है।
देशभर में 1,000 क्लिनिकल ट्रायल साइट्स बनाने का लक्ष्य
केंद्र सरकार की बायोफार्मा शक्ति योजना के तहत भारत में बायोफार्मास्युटिकल अनुसंधान और विकास को मजबूत करने की रणनीति तैयार की गई है।इस पहल का एक महत्वपूर्ण लक्ष्य देशभर में 1,000 मान्यता प्राप्त क्लिनिकल ट्रायल साइट्स का नेटवर्क विकसित करना है। इसका उद्देश्य भारत में दवाओं के अनुसंधान और परीक्षण की क्षमता बढ़ाना तथा अंतरराष्ट्रीय स्तर पर देश की भागीदारी को मजबूत करना है।सरकार ने बायोफार्मा शक्ति योजना के लिए पांच वर्षों में 10,000 करोड़ रुपये के परिव्यय की घोषणा की थी।
पहले चरण में 25 क्लिनिकल ट्रायल साइट्स पर काम
NIPER रायबरेली और एस्ट्राजेनेका इंडिया के बीच हुए समझौते के तहत शुरुआती चरण में 25 क्लिनिकल ट्रायल साइट्स को सहयोग प्रदान किया जाएगा।सबसे पहले इन केंद्रों की मौजूदा क्षमताओं का आकलन किया जाएगा। इसके बाद उनकी आवश्यकताओं के अनुसार प्रशिक्षण और तकनीकी मार्गदर्शन उपलब्ध कराया जाएगा।कार्यक्रम में अनुसंधान संबंधी दस्तावेजी प्रक्रियाओं, नैतिक मानकों, सुरक्षा और क्लिनिकल ट्रायल की व्यवहार्यता को बेहतर बनाने पर विशेष ध्यान दिया जाएगा।इसका उद्देश्य संबंधित अनुसंधान केंद्रों को निर्धारित मानकों के अनुरूप विकसित करना है, ताकि वे भविष्य में उच्च गुणवत्ता वाले क्लिनिकल ट्रायल में भागीदारी कर सकें।
महानगरों से बाहर भी बढ़ेंगी रिसर्च सुविधाएं
भारत में क्लिनिकल रिसर्च की बड़ी सुविधाएं मुख्य रूप से महानगरों और प्रमुख चिकित्सा संस्थानों में केंद्रित रही हैं।नई साझेदारी का उद्देश्य इन सुविधाओं को अन्य उभरते अनुसंधान क्षेत्रों तक पहुंचाना है।इससे विभिन्न स्थानों पर चिकित्सा अनुसंधान के लिए प्रशिक्षित कर्मचारियों और जरूरी व्यवस्थाओं की उपलब्धता बढ़ाने में मदद मिल सकती है।सरकार का मानना है कि देश में मौजूद चिकित्सा विशेषज्ञता और प्रतिभा का बेहतर उपयोग करके वैश्विक क्लिनिकल ट्रायल में भारत की भागीदारी बढ़ाई जा सकती है।
फार्मास्युटिकल्स सचिव मनोज जोशी ने बताई अहम पहल
समझौते के अवसर पर फार्मास्युटिकल्स विभाग के सचिव मनोज जोशी ने कहा कि भारत के पास वैश्विक क्लिनिकल ट्रायल में बड़ी भूमिका निभाने के लिए आवश्यक प्रतिभा और विशेषज्ञता मौजूद है।उन्होंने महानगरों से बाहर अनुसंधान क्षमताओं को मजबूत करने की आवश्यकता पर जोर दिया।मनोज जोशी के अनुसार, सरकार, शिक्षण संस्थानों और उद्योग जगत के बीच यह सहयोग क्लिनिकल रिसर्च के क्षेत्र में प्रशिक्षित पेशेवरों की संख्या बढ़ाने और अनुसंधान केंद्रों को तैयार करने में मदद करेगा।उन्होंने इस पहल को बायोफार्मा शक्ति के उद्देश्यों से जुड़ा महत्वपूर्ण प्रयास बताया।
NIPER रायबरेली में मिलेगा विशेष प्रशिक्षण
NIPER रायबरेली की निदेशक डॉ. शुभिनी सराफ ने बताया कि संस्थान का सेंटर ऑफ एक्सीलेंस क्लिनिकल रिसर्च में व्यवस्थित प्रशिक्षण और प्रमाणन के लिए विशेष मंच उपलब्ध कराएगा।इसके माध्यम से शैक्षणिक विशेषज्ञता और औद्योगिक अनुभव को एक साथ लाकर कुशल कर्मचारियों को तैयार किया जाएगा।इस प्रशिक्षण व्यवस्था का उद्देश्य ऐसा मॉडल विकसित करना है, जिसे भविष्य में अन्य अनुसंधान क्षेत्रों और चिकित्सा संबंधी विषयों में भी लागू किया जा सके।
एस्ट्राजेनेका इंडिया देगी तकनीकी सहयोग
एस्ट्राजेनेका इंडिया इस साझेदारी में क्लिनिकल डेवलपमेंट से जुड़ी विशेषज्ञता उपलब्ध कराएगी।कंपनी भारतीय और अंतरराष्ट्रीय विशेषज्ञों को जोड़ने, प्रशिक्षण कार्यक्रम आयोजित करने और अनुसंधान केंद्रों को आवश्यक मार्गदर्शन प्रदान करने में सहयोग करेगी।एस्ट्राजेनेका फार्मा इंडिया लिमिटेड के कंट्री प्रेसिडेंट एवं प्रबंध निदेशक प्रवीण राव अक्किनेपल्ली ने कहा कि नई दवाओं को मरीजों तक पहुंचाने में क्लिनिकल रिसर्च की महत्वपूर्ण भूमिका होती है।उन्होंने कहा कि इस सहयोग का उद्देश्य भारत में उच्च गुणवत्ता वाला और टिकाऊ क्लिनिकल रिसर्च तंत्र विकसित करना है।
कैंसर अनुसंधान के बाद अन्य क्षेत्रों में विस्तार की संभावना
इस साझेदारी को भविष्य में राष्ट्रीय स्तर पर विस्तार देने योग्य मॉडल के रूप में विकसित किया जा रहा है।प्रारंभिक चरण में कैंसर संबंधी अनुसंधान पर ध्यान दिया जाएगा। इसके बाद कार्यक्रम के परिणामों के आधार पर अन्य चिकित्सा क्षेत्रों और नए अनुसंधान स्थानों में विस्तार की संभावना पर विचार किया जाएगा।फिलहाल समझौते के तहत 25 केंद्रों की क्षमताओं का आकलन और उन्हें मजबूत करने का काम शुरू करने की योजना है।इस पहल से भारत में क्लिनिकल ट्रायल की गुणवत्ता, प्रशिक्षित मानव संसाधन और अनुसंधान संबंधी बुनियादी सुविधाओं को बेहतर बनाने की दिशा में सहयोग मिलने की उम्मीद है।
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