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शहरीकरण और जलवायु परिवर्तन के बीच शहरों में बढ़ रही रात की गर्मी

Kavita2
2 July 2026 12:25 PM IST
शहरीकरण और जलवायु परिवर्तन के बीच शहरों में बढ़ रही रात की गर्मी
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Delhi दिल्ली: जलवायु परिवर्तन और तेजी से बढ़ते शहरीकरण के कारण भारत के बड़े शहरों में रात के समय बढ़ती गर्मी एक गंभीर सार्वजनिक स्वास्थ्य समस्या के रूप में सामने आ रही है। विशेषज्ञों का कहना है कि अब शहरों में रातें दिन की तुलना में अधिक तेजी से गर्म हो रही हैं, जिससे लोगों की नींद प्रभावित हो रही है और स्वास्थ्य संबंधी जोखिम लगातार बढ़ते जा रहे हैं।

एक हालिया अध्ययन में यह सामने आया है कि शहरों में बढ़ते कंक्रीट के ढांचे, लगातार घटते हरित क्षेत्र और शहरी हीट आइलैंड प्रभाव इस समस्या के प्रमुख कारण हैं। शहरों में बनी इमारतें और सड़कें दिनभर सूरज की गर्मी को अवशोषित कर लेती हैं और रात के समय धीरे-धीरे उसे वातावरण में छोड़ती हैं, जिससे तापमान रात में भी ऊंचा बना रहता है।

विशेषज्ञों के अनुसार, शहरी क्षेत्रों में पेड़ों और खुले मैदानों की कमी के कारण प्राकृतिक रूप से तापमान को संतुलित करने की क्षमता घट गई है। पहले जहां रात में तापमान तेजी से गिर जाता था, अब वहीं शहरों में गर्मी लंबे समय तक बनी रहती है।

इस बढ़ती गर्मी का सीधा असर लोगों के स्वास्थ्य पर पड़ रहा है। रात के समय पर्याप्त ठंडक न मिलने के कारण नींद की गुणवत्ता प्रभावित हो रही है। इससे थकान, तनाव, चिड़चिड़ापन और एकाग्रता में कमी जैसी समस्याएं बढ़ रही हैं। डॉक्टरों का कहना है कि लगातार खराब नींद से हृदय रोग, मधुमेह और अन्य पुरानी बीमारियों का खतरा भी बढ़ सकता है।

शहरी स्वास्थ्य विशेषज्ञों का मानना है कि यह समस्या केवल मौसम की नहीं, बल्कि शहरों की संरचना और विकास मॉडल से भी जुड़ी है। अनियोजित शहरीकरण और हरित क्षेत्रों की अनदेखी ने स्थिति को और गंभीर बना दिया है।

अध्ययन में यह भी बताया गया है कि रात के समय बढ़ता तापमान विशेष रूप से बुजुर्गों, बच्चों और पहले से बीमार लोगों के लिए अधिक खतरनाक साबित हो सकता है। लगातार गर्म वातावरण शरीर की प्राकृतिक रिकवरी प्रक्रिया को बाधित करता है, जिससे स्वास्थ्य जोखिम बढ़ जाते हैं।

विशेषज्ञों ने सुझाव दिया है कि शहरों में अधिक से अधिक हरित क्षेत्र विकसित किए जाएं, छतों और दीवारों पर हरियाली बढ़ाई जाए और शहरी योजनाओं में तापमान नियंत्रण को प्राथमिकता दी जाए। साथ ही, ऊर्जा दक्ष इमारतों और कूलिंग तकनीकों के उपयोग को भी बढ़ावा देने की जरूरत है।

जलवायु वैज्ञानिकों का कहना है कि यदि समय रहते इस समस्या पर ध्यान नहीं दिया गया, तो आने वाले वर्षों में भारतीय शहरों में रात का तापमान और अधिक बढ़ सकता है, जिससे शहरी जीवन की गुणवत्ता पर गंभीर असर पड़ेगा।

फिलहाल विशेषज्ञों ने इस मुद्दे को एक उभरते हुए सार्वजनिक स्वास्थ्य संकट के रूप में चिह्नित किया है और इसके समाधान के लिए तत्काल नीति-स्तरीय हस्तक्षेप की आवश्यकता पर जोर दिया है।

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