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नई दिल्ली। भारत की राजधानी नई दिल्ली में 12 और 13 सितंबर 2026 को आयोजित 18वें BRICS शिखर सम्मेलन के दौरान सुरक्षा व्यवस्था बेहद कड़ी रही। दुनिया के कई बड़े नेताओं की मौजूदगी के बीच सोशल मीडिया पर भी सम्मेलन से जुड़ी तस्वीरों और वीडियो की बाढ़ आ गई। इसी दौरान कुछ पुराने और असंबंधित वीडियो को BRICS सम्मेलन से जोड़कर सनसनीखेज दावे किए जाने लगे। ऐसे दावों को लेकर सबसे जरूरी बात यही है कि सोशल मीडिया पर दिखाई देने वाली हर तस्वीर या वीडियो को मौजूदा BRICS सम्मेलन का मान लेना सही नहीं है।
भारत सरकार के आधिकारिक दस्तावेज के मुताबिक 18वां BRICS शिखर सम्मेलन 12 से 13 सितंबर 2026 तक नई दिल्ली में आयोजित हुआ। सम्मेलन के बाद जारी नई दिल्ली घोषणा में वैश्विक सुरक्षा से लेकर आतंकवाद तक कई मुद्दों पर सदस्य देशों ने अपना साझा रुख सामने रखा।
BRICS के बीच वायरल दावों ने खींचा ध्यान
सम्मेलन के दौरान सोशल मीडिया पर अलग-अलग वीडियो शेयर किए गए। कुछ पोस्ट में ऐसी घटनाओं को BRICS से जोड़ने की कोशिश की गई जिनका सम्मेलन से वास्तविक संबंध नहीं था। इससे यह सवाल खड़ा हुआ कि क्या दिल्ली में सम्मेलन के दौरान वास्तव में कोई बड़ी हिंसक घटना या धमाका हुआ था या पुराने वीडियो को नए संदर्भ में पेश किया जा रहा था।
फैक्ट-चेक संस्था CyberPeace ने BRICS सम्मेलन से जोड़कर वायरल किए गए एक वीडियो की जांच में पाया कि वह मौजूदा सम्मेलन का नहीं था। जांच के मुताबिक वीडियो जुलाई 2026 से इंटरनेट पर मौजूद था और उसे सितंबर में आयोजित BRICS सम्मेलन से जोड़कर शेयर करना भ्रामक था।
इससे एक महत्वपूर्ण बात सामने आती है—किसी वीडियो के साथ BRICS या दिल्ली लिख देने भर से यह साबित नहीं होता कि वीडियो उसी सम्मेलन के दौरान रिकॉर्ड किया गया था।
क्या BRICS सम्मेलन के दौरान हुआ था धमाका?
इस दावे पर सावधानी बेहद जरूरी है। उपलब्ध विश्वसनीय रिपोर्टों और BRICS सम्मेलन के आधिकारिक दस्तावेजों में सम्मेलन स्थल पर किसी ऐसे धमाके की पुष्टि नहीं मिलती जिसे वायरल दावों के आधार पर तथ्य मान लिया जाए।
इसलिए 'BRICS सम्मेलन के दौरान धमाका' जैसी लाइन को सीधे पुष्ट खबर की तरह प्रकाशित करना भ्रामक हो सकता है। ज्यादा सटीक तरीका यह होगा कि इसे वायरल दावा बताते हुए लिखा जाए और साथ में स्पष्ट किया जाए कि इसकी स्वतंत्र या आधिकारिक पुष्टि उपलब्ध नहीं है।
सम्मेलन के दौरान वास्तविक सुरक्षा संबंधी घटनाएं जरूर सामने आईं। उदाहरण के तौर पर BRICS ड्यूटी से जुड़े दिल्ली पुलिस के एक कांस्टेबल का हथियार के साथ बनाया गया सोशल मीडिया वीडियो वायरल होने के बाद उसे निलंबित किया गया और विभागीय जांच शुरू हुई। यह घटना विश्वसनीय मीडिया में रिपोर्ट हुई है।
पुराना वीडियो नई घटना बताकर फैलाना आसान
सोशल मीडिया पर गलत सूचना फैलाने का एक सामान्य तरीका पुरानी तस्वीर या वीडियो को नई घटना से जोड़ देना है। वीडियो असली होता है लेकिन उसके साथ दिया गया दावा गलत होता है। ऐसे मामलों में सामान्य यूजर के लिए भ्रम पैदा होना आसान है क्योंकि वीडियो देखने में वास्तविक लगता है।
BRICS सम्मेलन से जुड़े वायरल वीडियो के मामले में भी CyberPeace की जांच में एक वीडियो पुराना पाया गया। उसके मुताबिक वीडियो कम से कम 20 जुलाई 2026 से ऑनलाइन उपलब्ध था जबकि BRICS सम्मेलन सितंबर में हुआ। यानी वीडियो के समय और उसके साथ किए जा रहे दावे के बीच स्पष्ट अंतर था।
इसीलिए किसी वायरल वीडियो की पुष्टि करने के लिए उसकी सबसे पुरानी उपलब्ध कॉपी तलाशना महत्वपूर्ण होता है। इसके अलावा वीडियो में दिखाई देने वाले स्थान, वाहन, मौसम, इमारत, कपड़े और दूसरे विजुअल संकेतों की भी जांच की जाती है।
पाकिस्तान वाला एंगल भी जांचना जरूरी
हेडलाइन में 'पाकिस्तान की फर्जी कहानी' लिखने के लिए यह स्थापित होना चाहिए कि संबंधित गलत दावा वास्तव में किसी पाकिस्तानी सरकारी संस्था, मीडिया संगठन या पहचाने गए पाकिस्तान-आधारित अकाउंट से आया था। केवल किसी अज्ञात सोशल मीडिया अकाउंट के दावे को पूरे पाकिस्तान की 'कहानी' बताना तथ्यात्मक रूप से कमजोर और जरूरत से ज्यादा व्यापक निष्कर्ष हो सकता है।
इसलिए खबर प्रकाशित करते समय ज्यादा सुरक्षित शब्दावली 'पाकिस्तान से जुड़े सोशल मीडिया अकाउंट्स का दावा' या 'सोशल मीडिया पर वायरल दावा' हो सकती है—लेकिन वह भी तभी जब संबंधित अकाउंट और उसके स्रोत की पुष्टि हो।
यह सावधानी खास तौर पर भारत-पाकिस्तान जैसे संवेदनशील मामलों में जरूरी है क्योंकि गलत एट्रिब्यूशन खबर की विश्वसनीयता को नुकसान पहुंचा सकता है।
BRICS में आतंकवाद पर क्या हुआ?
BRICS की नई दिल्ली घोषणा में आतंकवाद को लेकर महत्वपूर्ण बयान जरूर दिया गया। सदस्य देशों ने आतंकवाद के सभी स्वरूपों की कड़ी निंदा की और 22 अप्रैल 2025 को जम्मू-कश्मीर में हुए आतंकी हमले का स्पष्ट उल्लेख किया जिसमें 26 लोगों की मौत हुई थी।
घोषणा में आतंकियों की सीमा पार आवाजाही, आतंकवाद के वित्तपोषण और सुरक्षित ठिकानों का भी उल्लेख किया गया। साथ ही आतंकवाद के खिलाफ 'जीरो टॉलरेंस' और दोहरे मानदंडों को खारिज करने की बात कही गई।
इंडियन एक्सप्रेस की रिपोर्ट के मुताबिक BRICS देशों ने पहलगाम आतंकी हमले की कड़ी निंदा की। चीन भी इस साझा घोषणा का हिस्सा था। हालांकि घोषणा में पाकिस्तान का नाम नहीं लिया गया।
इसलिए BRICS सम्मेलन और आतंकवाद के मुद्दे को लेकर खबर लिखते समय आधिकारिक घोषणा और सोशल मीडिया दावों के बीच अंतर रखना जरूरी है।
दिल्ली में दुनिया के बड़े नेताओं का जमावड़ा
नई दिल्ली सम्मेलन वैश्विक राजनीति के लिहाज से बेहद महत्वपूर्ण रहा। BRICS नेताओं ने अंतरराष्ट्रीय संस्थाओं में सुधार, विकासशील देशों की भागीदारी, वैश्विक व्यापार, युद्ध और आर्थिक सहयोग जैसे मुद्दों पर चर्चा की।
सम्मेलन की संयुक्त घोषणा पर सदस्य देशों के बीच सहमति बनी। पश्चिम एशिया के तनाव जैसे संवेदनशील विषयों पर भी सदस्य देशों ने साझा भाषा तैयार की।
ऐसे हाई-प्रोफाइल आयोजन के दौरान गलत सूचना का प्रभाव सामान्य दिनों की तुलना में कहीं ज्यादा हो सकता है। एक पुराना धमाके का वीडियो अगर 'BRICS के दौरान दिल्ली में विस्फोट' बताकर शेयर किया जाए तो कुछ ही मिनटों में सुरक्षा को लेकर अनावश्यक डर पैदा हो सकता है।
वायरल वीडियो की ऐसे करें जांच
किसी बड़े आयोजन के दौरान धमाके या हमले का वीडियो सामने आए तो सबसे पहले आधिकारिक एजेंसियों और विश्वसनीय समाचार संस्थानों की रिपोर्ट देखें। वीडियो को तुरंत शेयर करने के बजाय यह जांचें कि वही फुटेज पहले इंटरनेट पर मौजूद तो नहीं था।
वीडियो के पुराने पोस्ट मिल जाएं तो उसके मौजूदा घटना से जुड़े होने का दावा संदिग्ध हो जाता है। केवल वीडियो के ऊपर लिखे कैप्शन या पोस्ट करने वाले अकाउंट की बात को प्रमाण नहीं माना जाना चाहिए।
BRICS जैसे सम्मेलन में किसी वास्तविक बड़े धमाके की स्थिति में दिल्ली पुलिस, केंद्र सरकार और प्रमुख राष्ट्रीय-अंतरराष्ट्रीय समाचार एजेंसियों से तेजी से पुष्ट जानकारी सामने आने की अपेक्षा होगी।
क्या है वायरल दावे की सच्चाई?
फिलहाल उपलब्ध विश्वसनीय और आधिकारिक जानकारी के आधार पर BRICS सम्मेलन से जोड़कर किसी अपुष्ट धमाके को वास्तविक घटना बताना उचित नहीं है। BRICS से जोड़कर पुराने वीडियो फैलाए जाने का कम से कम एक मामला फैक्ट-चेक में भ्रामक पाया गया है।
साथ ही 'पाकिस्तान की फर्जी कहानी' वाला दावा तभी इस्तेमाल किया जाना चाहिए जब उस खास वायरल पोस्ट का पाकिस्तानी स्रोत प्रमाणित हो। बिना स्रोत की पुष्टि के इसे पाकिस्तान से जोड़ना खबर को तथ्यात्मक रूप से कमजोर कर सकता है।
नई दिल्ली में BRICS सम्मेलन वास्तव में 12-13 सितंबर को आयोजित हुआ और आधिकारिक नई दिल्ली घोषणा भी जारी हुई। ऐसे में सम्मेलन से जुड़ी किसी भी सनसनीखेज तस्वीर या वीडियो को प्रकाशित करने से पहले तारीख, स्थान और मूल स्रोत की जांच जरूरी है। सोशल मीडिया के दौर में असली वीडियो के साथ गलत कहानी जोड़ना भी फेक न्यूज का प्रभावी तरीका बन चुका है।
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