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प्रदर्शन और FIR विवाद में नया मोड़ केंद्र सरकार ने SC में खटखटाया दरवाजा
Ratna Netam
31 Aug 2026 4:12 PM IST

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नई दिल्ली : कॉकरोच जनता पार्टी (CJP) से जुड़े प्रदर्शनकारियों के खिलाफ दर्ज मामलों को लेकर केंद्र सरकार सुप्रीम कोर्ट पहुंच गई है। केंद्र ने शीर्ष अदालत में याचिका दाखिल कर प्रदर्शनकारियों पर दर्ज एफआईआर को रद्द कराने की मांग की है। इस मामले ने राजनीतिक और कानूनी गलियारों में हलचल बढ़ा दी है। सरकार के इस कदम को लेकर विपक्ष भी सवाल उठा रहा है और इसे आंदोलन के दबाव का असर बता रहा है।
मामला उस विरोध प्रदर्शन से जुड़ा है, जिसमें CJP कार्यकर्ताओं ने अपनी मांगों को लेकर प्रदर्शन किया था। प्रदर्शन के दौरान कई लोगों के खिलाफ पुलिस ने अलग-अलग धाराओं में मामले दर्ज किए थे। अब केंद्र सरकार की ओर से इन एफआईआर को खत्म कराने के लिए सुप्रीम कोर्ट का रुख किया गया है।
प्रदर्शन और FIR का पूरा मामला
CJP की ओर से किए गए प्रदर्शन के दौरान बड़ी संख्या में लोग सड़कों पर उतरे थे। पुलिस के अनुसार, प्रदर्शन के दौरान कुछ स्थानों पर नियमों के उल्लंघन और प्रशासनिक व्यवस्था प्रभावित होने के मामले सामने आए थे। इसके बाद कई प्रदर्शनकारियों के खिलाफ एफआईआर दर्ज की गई थी।
प्रदर्शनकारियों का कहना था कि वे लोकतांत्रिक तरीके से अपनी मांगों को लेकर आवाज उठा रहे थे। उनका आरोप था कि आंदोलन को दबाने के लिए उनके खिलाफ कानूनी कार्रवाई की गई।
अब केंद्र सरकार की ओर से सुप्रीम कोर्ट में याचिका दाखिल किए जाने के बाद यह मामला फिर से चर्चा में आ गया है।
सुप्रीम कोर्ट में केंद्र की दलील
केंद्र सरकार ने अदालत के सामने अपना पक्ष रखते हुए एफआईआर को रद्द करने की मांग की है। सरकार का कहना है कि मामले को व्यापक नजरिए से देखने की जरूरत है और अनावश्यक मुकदमों से लोगों को राहत मिलनी चाहिए।
केंद्र की ओर से यह भी कहा गया कि लोकतांत्रिक व्यवस्था में शांतिपूर्ण विरोध प्रदर्शन का अधिकार महत्वपूर्ण है। ऐसे मामलों में कानून के प्रावधानों और परिस्थितियों को ध्यान में रखते हुए फैसला लिया जाना चाहिए।
अब सुप्रीम कोर्ट इस मामले में सुनवाई करेगा और यह तय करेगा कि दर्ज मामलों को खत्म किया जा सकता है या नहीं।
'कॉकरोच' आंदोलन बना चर्चा का विषय
CJP आंदोलन पिछले कुछ समय से राजनीतिक और सामाजिक चर्चा का विषय बना हुआ है। आंदोलन से जुड़े नेताओं ने सरकार पर युवाओं और आम लोगों की समस्याओं को नजरअंदाज करने का आरोप लगाया था।
आंदोलन के दौरान सोनम वांगचुक समेत कई लोगों की भूमिका भी चर्चा में रही। उनके समर्थन और बयानों के बाद यह मामला राष्ट्रीय स्तर पर सुर्खियों में आया।
CJP नेताओं का कहना है कि उनका आंदोलन व्यवस्था में सुधार और जनता की आवाज उठाने के लिए था।
विपक्ष ने साधा निशाना
केंद्र सरकार के सुप्रीम कोर्ट जाने के बाद विपक्ष ने सरकार पर हमला बोला है। विपक्षी नेताओं का कहना है कि अगर प्रदर्शनकारियों के खिलाफ दर्ज मामले गलत थे तो पहले ही वापस लिए जा सकते थे।
कुछ नेताओं ने इसे सरकार की मजबूरी बताते हुए कहा कि आंदोलन के दबाव में केंद्र को कदम उठाना पड़ा है।
हालांकि सरकार समर्थकों का कहना है कि यह फैसला राजनीतिक नहीं बल्कि कानूनी प्रक्रिया के तहत लिया गया है।
प्रदर्शन के अधिकार पर बहस
इस मामले ने एक बार फिर विरोध प्रदर्शन के अधिकार और कानून व्यवस्था के बीच संतुलन को लेकर बहस छेड़ दी है।
लोकतंत्र में नागरिकों को अपनी बात रखने का अधिकार दिया गया है, लेकिन प्रशासन यह भी सुनिश्चित करता है कि प्रदर्शन के दौरान सार्वजनिक व्यवस्था प्रभावित न हो।
कानूनी विशेषज्ञों का कहना है कि हर मामले की परिस्थितियों के आधार पर समीक्षा की जाती है और अदालतें इसी आधार पर निर्णय लेती हैं।
आगे की राह सुप्रीम कोर्ट के फैसले पर नजर
अब सभी की नजर सुप्रीम कोर्ट की सुनवाई पर है। अदालत का फैसला यह तय करेगा कि CJP प्रदर्शनकारियों के खिलाफ दर्ज मामलों का भविष्य क्या होगा।
अगर एफआईआर रद्द होती है तो प्रदर्शनकारियों को बड़ी राहत मिल सकती है। वहीं, अगर अदालत मामले को आगे बढ़ाने का फैसला करती है तो कानूनी प्रक्रिया जारी रहेगी।
फिलहाल केंद्र की याचिका के बाद यह मामला फिर से राजनीतिक बहस के केंद्र में आ गया है। CJP आंदोलन, सरकार की भूमिका और प्रदर्शनकारियों पर कार्रवाई को लेकर आने वाले दिनों में और बयान सामने आने की संभावना है।
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