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स्टारलिंक विवाद में नया मोड़, मस्क ने शेयर किए स्क्रीनशॉट
nidhi
11 Oct 2026 6:36 AM IST

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भाजपा से कनेक्शन पर सवाल
नई दिल्ली: अमेरिकी उद्योगपति और टेस्ला तथा स्पेसएक्स के प्रमुख एलन मस्क ने भारत में अपनी सैटेलाइट इंटरनेट सेवा स्टारलिंक को अंतिम मंजूरी मिलने में हो रही देरी को लेकर एक बार फिर सवाल उठाए हैं। इस बार उन्होंने देश के प्रमुख उद्योगपति मुकेश अंबानी और रिलायंस समूह से जुड़ी पुरानी मीडिया रिपोर्टों के दो स्क्रीनशॉट सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म एक्स पर साझा किए हैं। इन रिपोर्टों में रिलायंस से जुड़ी कंपनियों के भारतीय जनता पार्टी के चुनाव प्रचार और राजनीतिक चंदे से कथित संबंधों का उल्लेख है। मस्क के इस कदम के बाद स्टारलिंक की मंजूरी से जुड़ा विवाद कारोबारी प्रतिस्पर्धा के साथ राजनीतिक चर्चा का भी विषय बन गया है।
शनिवार, 10 अक्टूबर को साझा किए गए स्क्रीनशॉट में मस्क ने उन रिपोर्टों को सामने रखा, जिनमें रिलायंस से वित्तीय संबंध रखने वाली कंपनियों और भाजपा के बीच कथित संपर्कों की बात कही गई थी। हालांकि इन रिपोर्टों को साझा करना उनके आरोपों का स्वतंत्र प्रमाण नहीं है। भारत सरकार पहले ही स्पष्ट कर चुकी है कि दूरसंचार और सैटेलाइट सेवाओं की मंजूरी में किसी कंपनी के साथ भेदभाव नहीं किया जा रहा है।
मस्क ने दो स्क्रीनशॉट शेयर कर उठाए सवाल
एलन मस्क ने एक्स पर जिन दो रिपोर्टों के स्क्रीनशॉट साझा किए, उनमें से एक वर्ष 2022 की रिपोर्ट थी। इसमें दावा किया गया था कि रिलायंस से वित्तीय सहायता प्राप्त करने वाली एक कंपनी ने सोशल मीडिया पर भाजपा के चुनावी अभियान को बढ़ावा देने में भूमिका निभाई थी। दूसरी रिपोर्ट राजनीतिक चंदे से संबंधित थी। इसमें रिलायंस से जुड़ी कंपनी क्विक सप्लाई का उल्लेख था। रिपोर्ट के अनुसार, इस कंपनी ने चुनावी बॉन्ड के माध्यम से भाजपा को 385 करोड़ रुपये और शिवसेना को 25 करोड़ रुपये का चंदा दिया था। इन रिपोर्टों को साझा करके मस्क ने भारतीय राजनीति और बड़े कारोबारी समूहों के संबंधों पर सवाल उठाने की कोशिश की है। हालांकि रिपोर्टों में दर्ज राजनीतिक चंदे या कारोबारी संबंधों से यह स्वतः साबित नहीं होता कि स्टारलिंक की मंजूरी में किसी कंपनी ने हस्तक्षेप किया है।
स्टारलिंक को मंजूरी में देरी से बढ़ा विवाद
एलन मस्क की नाराजगी की मुख्य वजह भारत में स्टारलिंक की सैटेलाइट इंटरनेट सेवा शुरू करने की प्रक्रिया में हो रही देरी बताई जा रही है। स्टारलिंक स्पेसएक्स की उपग्रह आधारित इंटरनेट सेवा है, जिसके जरिए दूरदराज और ऐसे इलाकों में इंटरनेट पहुंचाने का लक्ष्य है, जहां सामान्य ब्रॉडबैंड या मोबाइल नेटवर्क की सुविधा सीमित है।
मस्क का कहना है कि उनकी कंपनी लंबे समय से भारत में कारोबार शुरू करने के लिए प्रयास कर रही है और पिछले पांच वर्षों के दौरान भारतीय नियमों का पालन करती रही है। इसके बावजूद सेवा शुरू करने की अंतिम अनुमति नहीं मिल सकी है। मस्क ने इस देरी को लेकर भारतीय दूरसंचार क्षेत्र में बड़े कारोबारी समूहों के प्रभाव पर सवाल उठाए हैं। उनका आरोप है कि कुछ प्रभावशाली उद्योगपति बाजार में अपना दबदबा बनाए रखने के लिए स्टारलिंक जैसी कंपनियों की प्रतिस्पर्धा में बाधा पैदा कर रहे हैं। हालांकि भारत सरकार ने इन आरोपों को खारिज किया है। सरकार के मुताबिक, स्टारलिंक सहित अन्य सैटेलाइट इंटरनेट कंपनियों की मंजूरी से जुड़ी प्रक्रिया निर्धारित नियमों और सुरक्षा संबंधी आवश्यकताओं के अनुसार आगे बढ़ रही है।
मुकेश अंबानी को लेकर पहले भी की थी टिप्पणी
एलन मस्क ने इससे पहले भी मुकेश अंबानी को लेकर सोशल मीडिया पर विवादास्पद टिप्पणियां की थीं। उन्होंने सवाल उठाया था कि क्या भारत में वास्तविक निर्णय लेने की शक्ति अंबानी के पास है। शुक्रवार को मस्क ने एक पोस्ट में मुकेश अंबानी को व्यंग्यात्मक अंदाज में भारत का प्रधानमंत्री तक कह दिया था। उनकी इस टिप्पणी को भारतीय राजनीति और उद्योग जगत के संबंधों पर सीधा कटाक्ष माना गया। मस्क ने यह भी सवाल किया कि यदि उनकी कंपनी सभी आवश्यक नियमों का पालन कर रही है, तो उसे भारतीय बाजार में प्रतिस्पर्धा करने का अवसर क्यों नहीं मिल रहा है। इन टिप्पणियों के बाद सोशल मीडिया पर बहस तेज हो गई। कुछ लोगों ने मस्क की ओर से उठाए गए प्रतिस्पर्धा और कारोबारी पारदर्शिता के सवालों पर चर्चा की, जबकि अन्य ने भारतीय नियामकीय व्यवस्था को लेकर उनकी टिप्पणियों की आलोचना की। अब पुराने राजनीतिक चंदे और चुनाव प्रचार से जुड़ी रिपोर्टों के स्क्रीनशॉट साझा करके मस्क ने इस विवाद को एक नया मोड़ दे दिया है।
भारत सरकार ने आरोपों को किया खारिज
स्टारलिंक विवाद के बीच भारत सरकार ने स्पष्ट किया है कि देश में दूरसंचार और उपग्रह आधारित इंटरनेट सेवाओं के लिए मंजूरी की प्रक्रिया निष्पक्ष और भेदभावरहित है। सरकार का कहना है कि किसी भी कंपनी को विशेष लाभ देने या किसी दूसरी कंपनी के प्रवेश को रोकने की नीति नहीं अपनाई जा रही है। सभी आवेदकों को निर्धारित नियामकीय और सुरक्षा संबंधी प्रक्रियाओं से गुजरना पड़ता है। उपलब्ध जानकारी के अनुसार, स्टारलिंक, रिलायंस जियो और भारती एयरटेल से जुड़ी सैटेलाइट सेवाओं को शुरुआती स्तर की मंजूरियां मिल चुकी हैं। हालांकि स्पेक्ट्रम आवंटन और सुरक्षा संबंधी आवश्यक प्रक्रियाएं अभी पूरी होनी बाकी हैं। सरकार ने मस्क के उस दावे को भी खारिज किया है, जिसमें उन्होंने कुछ प्रभावशाली उद्योगपतियों के कारण स्टारलिंक का रास्ता रोके जाने की आशंका जताई थी। इस मामले में सरकार का पक्ष स्पष्ट है कि नियामकीय निर्णय निर्धारित प्रक्रिया के अनुसार लिए जाएंगे और किसी भी कंपनी को नियमों से अलग विशेष छूट नहीं दी जाएगी।
रिलायंस की प्रतिक्रिया और आगे की चुनौती
मस्क के ताजा आरोपों और स्क्रीनशॉट को लेकर रिलायंस की ओर से तत्काल कोई सार्वजनिक प्रतिक्रिया सामने नहीं आई है। दूसरी ओर, रिलायंस जियो इन्फोकॉम के चेयरमैन आकाश अंबानी ने सैटेलाइट संचार सेवाओं से जुड़े विवाद पर टिप्पणी करने से इनकार किया है। उन्होंने कहा कि कंपनी का ध्यान भारतीय उपभोक्ताओं को बेहतर सेवाएं देने पर केंद्रित है। भारत में सैटेलाइट इंटरनेट का क्षेत्र आने वाले वर्षों में महत्वपूर्ण हो सकता है। विशेष रूप से ग्रामीण, पहाड़ी और दूरदराज के इलाकों में इंटरनेट सुविधाओं के विस्तार के लिए इस तकनीक को उपयोगी माना जा रहा है।
स्टारलिंक के अलावा रिलायंस जियो और भारती एयरटेल से जुड़ी कंपनियां भी इस क्षेत्र में अपनी उपस्थिति बढ़ाने की दिशा में काम कर रही हैं। ऐसे में बाजार में प्रतिस्पर्धा के साथ सुरक्षा, स्पेक्ट्रम आवंटन और नियामकीय मंजूरी जैसे विषय भी महत्वपूर्ण हैं। मस्क की लगातार टिप्पणियों से यह विवाद अब केवल एक कंपनी को मंजूरी मिलने या नहीं मिलने तक सीमित नहीं रहा है। इसमें राजनीतिक चंदे, कारोबारी प्रभाव और सरकारी फैसलों की पारदर्शिता जैसे सवाल भी शामिल हो गए हैं।
हालांकि मस्क द्वारा साझा की गई पुरानी रिपोर्टों और स्टारलिंक की मंजूरी में देरी के बीच किसी प्रत्यक्ष संबंध की पुष्टि नहीं हुई है। फिलहाल भारत सरकार अपने निष्पक्ष नियामकीय रुख पर कायम है। अब इस मामले में सबसे महत्वपूर्ण सवाल यह है कि स्टारलिंक की लंबित प्रक्रियाएं कब पूरी होंगी और कंपनी भारत में अपनी व्यावसायिक इंटरनेट सेवाएं कब शुरू कर पाएगी। अंतिम निर्णय नियामकीय और सुरक्षा संबंधी आवश्यकताओं के पूरा होने पर निर्भर करेगा।
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