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मनचंदा केस में नया मोड़ कोर्ट ने फोरेंसिक और डिजिटल सबूत मांगे

Ratna Netam
20 Sept 2026 6:22 PM IST
मनचंदा केस में नया मोड़ कोर्ट ने फोरेंसिक और डिजिटल सबूत मांगे
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नई दिल्ली। युवराज सिंह मनचंदा हत्याकांड मामले में दिल्ली की साकेत कोर्ट ने जांच प्रक्रिया से जुड़ी कथित कमियों को लेकर सख्त रुख अपनाया है। कोर्ट ने गुरुग्राम पुलिस को निर्देश दिया है कि वह शव की बरामदगी, पहचान और उसके बाद किए गए अंतिम संस्कार से जुड़े सभी रिकॉर्ड, फोरेंसिक साक्ष्य और संबंधित दस्तावेज अदालत के सामने पेश करे।अदालत ने गुरुग्राम पुलिस को यह जानकारी 22 सितंबर को दोपहर 12:30 बजे तक उपलब्ध कराने का आदेश दिया है। कोर्ट का यह निर्देश युवराज सिंह मनचंदा की बहन की ओर से दाखिल की गई याचिका पर आया है, जिसमें पुलिस की कार्रवाई और शव को संभालने के तरीके को लेकर गंभीर सवाल उठाए गए थे।
बहन ने उठाए पुलिस कार्रवाई पर सवाल
मनचंदा की बहन ने अपनी अर्जी में आरोप लगाया था कि शव की बरामदगी के बाद पुलिस ने अंतिम संस्कार की प्रक्रिया में जल्दबाजी की। उन्होंने दावा किया कि इस दौरान जरूरी फोरेंसिक साक्ष्य और निजी सामानों के साथ सही तरीके से व्यवहार नहीं किया गया।याचिका में यह भी चिंता जताई गई कि यदि जांच प्रक्रिया में किसी तरह की लापरवाही हुई है तो इससे मामले की सच्चाई सामने लाने में परेशानी हो सकती है। इसी आधार पर उन्होंने अदालत से पूरे मामले की जांच और रिकॉर्ड सुरक्षित रखने की मांग की थी।
कोर्ट ने मांगे सभी आधिकारिक रिकॉर्ड
साकेत कोर्ट ने गुरुग्राम पुलिस को निर्देश दिया है कि वह मामले से जुड़े सभी आधिकारिक दस्तावेज पेश करे। इसमें पुलिस लॉग, स्टेशन रिकॉर्ड और कार्रवाई से संबंधित अन्य दस्तावेज शामिल हैं।अदालत ने यह भी कहा है कि जांच से जुड़े फोरेंसिक रिकॉर्ड को पेश किया जाए, ताकि यह स्पष्ट हो सके कि शव की पहचान और अन्य प्रक्रियाएं किस तरह पूरी की गईं।
फोरेंसिक रिपोर्ट और DNA सैंपल भी होंगे पेश
कोर्ट के निर्देश के अनुसार, गुरुग्राम पुलिस को फोरेंसिक जांच से जुड़े दस्तावेज भी जमा करने होंगे। इनमें DNA सैंपल, सुरक्षित रखे गए बायोलॉजिकल मटीरियल और अन्य वैज्ञानिक जांच रिपोर्ट शामिल हैं।फोरेंसिक सबूत किसी भी आपराधिक मामले में बेहद महत्वपूर्ण माने जाते हैं। इनके जरिए घटना से जुड़े तथ्यों की पुष्टि करने में मदद मिलती है।
डिजिटल सबूतों की भी होगी जांच
अदालत ने पुलिस से डिजिटल सबूत भी पेश करने को कहा है। इसमें सर्विलांस फुटेज और कॉल डेटा रिकॉर्ड (CDR) जैसे महत्वपूर्ण साक्ष्य शामिल हैं।डिजिटल रिकॉर्ड के जरिए जांच एजेंसियां अक्सर घटना से पहले और बाद की गतिविधियों को समझने का प्रयास करती हैं। इससे यह पता लगाने में मदद मिल सकती है कि घटना के समय कौन-कौन लोग संपर्क में थे और घटनाक्रम किस दिशा में आगे बढ़ा।
शव की पहचान और अंतिम संस्कार प्रक्रिया पर फोकस
इस मामले में अदालत का मुख्य फोकस शव की बरामदगी, उसकी पहचान और अंतिम संस्कार की प्रक्रिया पर है। कोर्ट यह जानना चाहता है कि पुलिस ने सभी कानूनी और जांच संबंधी प्रक्रियाओं का पालन किया या नहीं।परिवार की ओर से उठाई गई चिंताओं के बाद अदालत ने रिकॉर्ड तलब कर जांच प्रक्रिया की पारदर्शिता सुनिश्चित करने की कोशिश की है।
जांच में पारदर्शिता पर जोर
आपराधिक मामलों में जांच की निष्पक्षता और सबूतों की सुरक्षा बेहद महत्वपूर्ण होती है। अदालतें समय-समय पर यह सुनिश्चित करती हैं कि जांच एजेंसियां सभी आवश्यक प्रक्रियाओं का पालन करें और महत्वपूर्ण साक्ष्यों को सुरक्षित रखें।इस मामले में भी कोर्ट के निर्देश का उद्देश्य जांच से जुड़े सभी तथ्यों को सामने लाना है।
पुलिस को अब देना होगा जवाब
गुरुग्राम पुलिस को अब अदालत के सामने सभी रिकॉर्ड और दस्तावेज पेश करने होंगे। इसके बाद कोर्ट इन दस्तावेजों की समीक्षा करेगा और आगे की कार्रवाई पर विचार कर सकता है।फिलहाल पुलिस की ओर से कोर्ट के निर्देश पर विस्तृत प्रतिक्रिया सामने नहीं आई है। जांच एजेंसी द्वारा पेश किए जाने वाले दस्तावेजों के बाद ही आगे की स्थिति स्पष्ट होगी।
मामले पर बनी हुई है नजर
युवराज सिंह मनचंदा मर्डर केस में अब अदालत की निगरानी में जांच से जुड़े पहलुओं की समीक्षा की जा रही है। परिवार की शिकायतों और पुलिस रिकॉर्ड के बीच तालमेल की जांच महत्वपूर्ण मानी जा रही है।
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