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दिल्ली विकास को नई रफ्तार, केंद्र ने शहरी कार्य मंत्रालय में किया बड़ा बदलाव

नई दिल्ली: केंद्र सरकार ने राजधानी दिल्ली के बेहतर प्रबंधन और विकास कार्यों में तेजी लाने के उद्देश्य से बड़ा प्रशासनिक फैसला लिया है। सरकार ने आवासन और शहरी कार्य मंत्रालय को दो अलग-अलग विभागों में विभाजित कर दिया है। अब दिल्ली से जुड़े सभी विकास कार्यों और योजनाओं की निगरानी के लिए अलग से राजधानी विकास विभाग बनाया गया है, जबकि देश के अन्य शहरों से जुड़े मामलों की जिम्मेदारी शहरी विकास विभाग संभालेगा।
राष्ट्रपति की मंजूरी के बाद केंद्र सरकार ने गुरुवार को इस संबंध में अधिसूचना जारी कर दी। यह बदलाव भारत सरकार (कार्य आवंटन) नियम, 1961 के तहत किया गया है। सरकार का उद्देश्य दिल्ली से जुड़े मामलों को तेजी से निपटाना और विकास योजनाओं के क्रियान्वयन में आने वाली प्रशासनिक बाधाओं को कम करना है।
अब तक दिल्ली से जुड़े कई महत्वपूर्ण मामले आवासन और शहरी कार्य मंत्रालय के अंतर्गत आते थे। अलग-अलग विभागों के बीच समन्वय के कारण कई बार फैसलों में देरी होती थी। नए बदलाव के बाद राजधानी विकास विभाग विशेष रूप से दिल्ली के मामलों पर ध्यान केंद्रित करेगा। इससे दिल्ली की सड़कों, आवास, सफाई व्यवस्था, शहरी योजनाओं और अन्य बुनियादी सुविधाओं से जुड़े कार्यों में तेजी आने की उम्मीद है।
नए राजधानी विकास विभाग के अंतर्गत दिल्ली से संबंधित कई महत्वपूर्ण संस्थाएं और योजनाएं शामिल की गई हैं। इनमें दिल्ली विकास प्राधिकरण (डीडीए), दिल्ली मास्टर प्लान, दिल्ली की सफाई व्यवस्था, सरकारी कॉलोनियां, दिल्ली मेट्रो रेल कॉरपोरेशन (डीएमआरसी), दिल्ली होटल प्रशासन और राजघाट समाधि समिति जैसे विषय शामिल होंगे।
इसके अलावा दिल्ली में मौजूद भूमि और भवनों से जुड़े मामलों की जिम्मेदारी भी राजधानी विकास विभाग के पास होगी। हालांकि रक्षा मंत्रालय, रेल मंत्रालय, परमाणु ऊर्जा विभाग और अंतरिक्ष विभाग के नियंत्रण वाली भूमि और भवन इसके दायरे में नहीं आएंगे। ऐसी संपत्तियां संबंधित मंत्रालयों के अधीन ही रहेंगी।
सरकार के इस फैसले को दिल्ली के विकास कार्यों को अधिक प्रभावी बनाने की दिशा में अहम कदम माना जा रहा है। राजधानी में बढ़ती आबादी, यातायात, आवास, प्रदूषण और बुनियादी सुविधाओं से जुड़ी चुनौतियों को देखते हुए एक अलग विभाग बनने से योजनाओं की निगरानी और क्रियान्वयन बेहतर तरीके से हो सकेगा।
वहीं, शहरी विकास विभाग देश के अन्य शहरों से जुड़े कार्यों को देखेगा। इसके अंतर्गत दिल्ली के बाहर की मेट्रो परियोजनाएं, शहरी विकास योजनाएं और अन्य शहरों के इंफ्रास्ट्रक्चर से जुड़े काम शामिल होंगे। इससे देशभर के शहरी विकास कार्यक्रमों पर भी बेहतर तरीके से ध्यान दिया जा सकेगा।
केंद्र सरकार का मानना है कि विभागों के पुनर्गठन से प्रशासनिक जिम्मेदारियां स्पष्ट होंगी और विकास योजनाओं में देरी कम होगी। दिल्ली से जुड़े मामलों के लिए अब अलग विभाग होने से केंद्र सरकार, दिल्ली सरकार और संबंधित एजेंसियों के बीच बेहतर तालमेल स्थापित होने की संभावना है।
विशेषज्ञों के अनुसार, दिल्ली जैसे बड़े महानगर के लिए अलग प्रशासनिक ढांचा विकास कार्यों को गति देने में मदद कर सकता है। राजधानी में लगातार बढ़ रही शहरी चुनौतियों के समाधान के लिए तेज निर्णय और बेहतर समन्वय की जरूरत है। नए विभाग के गठन से उम्मीद है कि दिल्ली की विकास परियोजनाएं अधिक व्यवस्थित तरीके से आगे बढ़ेंगी।
केंद्र सरकार की इस पहल को राजधानी के भविष्य के विकास की दिशा में महत्वपूर्ण कदम माना जा रहा है। अब दिल्ली से जुड़े सभी प्रमुख मुद्दों पर एक समर्पित विभाग नजर रखेगा, जिससे योजनाओं को मंजूरी देने, लागू करने और उनकी निगरानी की प्रक्रिया अधिक आसान और तेज हो सकेगी।





