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दिल्ली चिड़ियाघर का नया मेकओवर: उड़ने और रेंगने वाले जीवों के लिए नए पिंजरे तैयार

Saba Naaz
19 July 2026 9:41 PM IST
दिल्ली चिड़ियाघर का नया मेकओवर: उड़ने और रेंगने वाले जीवों के लिए नए पिंजरे तैयार
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नई दिल्ली: आमतौर पर किसी भी चिड़ियाघर की सैर का मतलब होता है— पिंजरे में दहाड़ते शेर को देखना, विशालकाय हाथी-गैंडे की अठखेलियां निहारना या फिर भालू और हिरण जैसे बड़े वन्यजीवों को देखना। लेकिन देश की राजधानी दिल्ली में स्थित राष्ट्रीय प्राणी उद्यान (दिल्ली चिड़ियाघर) ने प्रकृति प्रेमियों और पर्यटकों के लिए एक बिल्कुल अनूठी और अनजानी दुनिया के दरवाजे खोले हैं। चिड़ियाघर प्रशासन ने एक बेहद खास पहल करते हुए 'स्पाइडर एंड इंसेक्ट वाक' (मकड़ी और कीड़े-मकोड़ों की सैर) का आयोजन किया। इस अनूठी यात्रा का मुख्य उद्देश्य बच्चों, युवाओं और शोधकर्ताओं को उन नन्हे व सूक्ष्म जीवों की रहस्यमयी दुनिया से रूबरू कराना है, जो आमतौर पर बड़े और भारी-भरकम वन्यजीवों की चकाचौंध के बीच पूरी तरह से नजरअंदाज हो जाते हैं।

रविवार की सुबह दिल्ली चिड़ियाघर परिसर से इस विशेष व अनूठी यात्रा की पहली खेप रवाना हुई। सुबह 7:00 बजे से लेकर 10:00 बजे तक आयोजित की गई इस बेहद ज्ञानवर्धक सैर में प्रकृति के प्रति गहरा लगाव रखने वाले युवाओं, स्कूली व कॉलेज के छात्रों, वाइल्डलाइफ फोटोग्राफरों और शोधकर्ताओं सहित लगभग 30 लोगों ने उत्साहपूर्वक भाग लिया। इस यात्रा का नेतृत्व और मार्गदर्शन देश के प्रसिद्ध वन्यजीव विशेषज्ञ और फोटोग्राफर आशीर कुमार ने किया। उनके कुशल मार्गदर्शन में प्रतिभागियों ने चिड़ियाघर की विभिन्न हरी-भरी सड़कों और रास्तों से गुजरते हुए जमीन पर रेंगने वाले और हवा में उड़ने वाले कई तरह के नन्हे व सूक्ष्म जीवों को बेहद करीब से देखा और पारिस्थितिक तंत्र (इकोसिस्टम) में उनकी अहम भूमिका को विस्तार से समझा।

इस अनोखे अभियान के दौरान प्रतिभागी चिड़ियाघर परिसर में मौजूद 1,000 से अधिक सूक्ष्म जीवों की विशाल दुनिया को देखकर न केवल अचंभित हुए, बल्कि उन्होंने काफी नई जानकारियां भी जुटाईं। वन्यजीव विशेषज्ञ आशीर कुमार के नेतृत्व में पर्यटकों ने विशेष रूप से मकड़ियों की सात और कीड़ों की आठ अलग-अलग दुर्लभ प्रजातियों के बारे में गहन अध्ययन किया। इस वाक के दौरान प्रकृति प्रेमियों ने मुख्य रूप से 'ट्विन-टेल्ड स्पाइडर' (दो पूंछ वाली मकड़ी), 'लेडीबर्ड बीटल' और 'कारपेंटर बी' (बढ़ई मधुमक्खी) जैसे कई नन्हे जीवों को उनके प्राकृतिक आवास में देखा और उनकी अनूठी जीवनशैली को समझा।

इस बेहद ज्ञानवर्धक सत्र के दौरान विशेषज्ञों ने प्रतिभागियों को पर्यावरण संतुलन में इन सूक्ष्म जीवों के अमूल्य योगदान के बारे में विस्तार से समझाया। विशेषज्ञों ने बताया कि भले ही ये जीव आकार में बहुत छोटे और नगण्य दिखाई देते हों, लेकिन वे प्राकृतिक कीट नियंत्रक (नेचुरल पेस्ट कंट्रोलर) और परागणक (पॉलिनेटर्स) के रूप में काम करते हैं। यदि ये नन्हे जीव न हों, तो पेड़-पौधों में परागण की प्रक्रिया रुक जाएगी और पर्यावरण का पूरा चक्र ही पूरी तरह से ध्वस्त हो जाएगा। इसलिए, धरती पर जीवन और पर्यावरण का संतुलन बनाए रखने के लिए इन सूक्ष्म जीवों का संरक्षण भी उतना ही जरूरी है जितना कि बड़े वन्यजीवों का।

राष्ट्रीय प्राणी उद्यान (दिल्ली चिड़ियाघर) में शुरू की गई यह अनूठी श्रृंखला इसलिए भी बेहद खास है क्योंकि यहाँ हर हफ्ते प्रकृति और वन्यजीवों को अलग नजरिए से देखने के लिए नए-नए अभिनव प्रयोग किए जा रहे हैं। चिड़ियाघर प्रशासन 'चिड़ियाघर एक, पर यात्रा अनेक' की तर्ज पर काम कर रहा है। इससे पिछले रविवार को ही चिड़ियाघर में 'बर्ड वाक' (पक्षियों की सैर) का आयोजन किया गया था, जिसमें पर्यटकों ने पक्षियों की 46 से अधिक विभिन्न प्रजातियों के बारे में जाना था। इस सफल प्रयोग को आगे बढ़ाते हुए चिड़ियाघर प्रशासन ने अपने आगामी रोमांचक कार्यक्रमों की घोषणा भी कर दी है।

प्रशासन की योजना के अनुसार, आगामी शनिवार यानी 25 जुलाई को शाम 7:00 बजे 'माथ वाच' (रात के पतंगों की निगरानी) का आयोजन किया जाएगा, जिसमें लोग रात के समय सक्रिय होने वाले पतंगों की दुनिया को देख सकेंगे। इसके ठीक अगले दिन यानी रविवार, 26 जुलाई को सुबह 7:30 बजे 'पेड़ यात्रा' (ट्री वाक) का आयोजन होगा, जहाँ चिड़ियाघर के प्राचीन और औषधीय पेड़ों की जानकारी दी जाएगी। इन सभी आगामी यात्राओं में भाग लेने के लिए 18 वर्ष से अधिक आयु के कोई भी नागरिक 'पहले आओ, पहले पाओ' के आधार पर चिड़ियाघर की आधिकारिक वेबसाइट या एनजेडपी (NZP) मोबाइल ऐप के जरिए अपना ऑनलाइन पंजीकरण करा सकते हैं।

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