दिल्ली-एनसीआर

राज्यसभा से पास हुआ नया कानून, बर्थ रजिस्ट्रेशन में देरी पर बढ़ी सख्ती

Ratna Netam
4 Aug 2026 5:13 PM IST
राज्यसभा से पास हुआ नया कानून, बर्थ रजिस्ट्रेशन में देरी पर बढ़ी सख्ती
x
नई दिल्ली : संसद के मानसून सत्र के दौरान मंगलवार को राज्यसभा ने **जन्म और मृत्यु का पंजीकरण (संशोधन) विधेयक, 2026** को ध्वनिमत से पारित कर दिया। इससे पहले यह विधेयक 31 जुलाई को लोकसभा से मंजूरी प्राप्त कर चुका था। अब दोनों सदनों से पारित होने के बाद यह विधेयक कानून बनने की दिशा में आगे बढ़ गया है। सरकार का कहना है कि नए प्रावधानों का उद्देश्य जन्म और मृत्यु पंजीकरण प्रक्रिया को अधिक पारदर्शी, विश्वसनीय और सख्त बनाना है, ताकि फर्जी या अत्यधिक विलंब से होने वाले पंजीकरण पर प्रभावी रोक लगाई जा सके।
राज्यसभा में गृह राज्य मंत्री नित्यानंद राय ने विपक्ष के हंगामे के बीच यह विधेयक पेश किया। उन्होंने कहा कि जन्म और मृत्यु का समय पर पंजीकरण किसी भी नागरिक के कानूनी अधिकारों और सरकारी सेवाओं तक पहुंच के लिए बेहद महत्वपूर्ण है। उन्होंने बताया कि संशोधन का मकसद रिकॉर्ड की शुद्धता बनाए रखना और यह सुनिश्चित करना है कि भविष्य में गलत दस्तावेजों के आधार पर फर्जी पंजीकरण न हो सके।
सरकार ने स्पष्ट किया कि एक वर्ष तक जन्म या मृत्यु के पंजीकरण की मौजूदा व्यवस्था में कोई बदलाव नहीं किया गया है। पहले की तरह यदि जन्म या मृत्यु की सूचना 21 दिनों के भीतर दी जाती है, तो सामान्य प्रक्रिया के तहत बिना किसी अतिरिक्त औपचारिकता के पंजीकरण किया जाएगा। यदि 21 दिन से लेकर एक वर्ष के भीतर पंजीकरण कराया जाता है, तो निर्धारित नियमों के अनुसार विलंब शुल्क जमा कर रजिस्ट्रेशन कराया जा सकेगा।
हालांकि, नए संशोधन में एक वर्ष से अधिक देरी से होने वाले पंजीकरण के लिए नियमों को और सख्त किया गया है। नए प्रावधानों के अनुसार यदि जन्म या मृत्यु का पंजीकरण एक वर्ष से अधिक और दो वर्ष के भीतर कराया जाता है, तो इसके लिए संबंधित जिला मजिस्ट्रेट (डीएम), उप-मंडल मजिस्ट्रेट (एसडीएम) या उनके द्वारा अधिकृत कार्यपालक दंडाधिकारी की अनुमति लेना अनिवार्य होगा।
इसके अलावा, यदि किसी जन्म या मृत्यु का पंजीकरण दो वर्ष से अधिक की देरी से कराया जाता है, तो अब केवल न्यायिक मजिस्ट्रेट के आदेश के आधार पर ही पंजीकरण संभव होगा। सरकार का कहना है कि इस व्यवस्था से लंबे समय बाद होने वाले पंजीकरण की पूरी जांच सुनिश्चित होगी और किसी भी प्रकार के फर्जी दस्तावेजों या गलत जानकारी के आधार पर रिकॉर्ड तैयार नहीं किए जा सकेंगे।
संशोधन के तहत संबंधित अधिकारी को अनुमति देने से पहले सभी दस्तावेजों, साक्ष्यों और प्रस्तुत जानकारी का विस्तृत सत्यापन करना होगा। इससे सरकारी रिकॉर्ड अधिक प्रमाणिक और विश्वसनीय बनेगा। सरकार का मानना है कि डिजिटल प्रशासन और नागरिक सेवाओं के विस्तार के दौर में सही जन्म और मृत्यु रिकॉर्ड बेहद आवश्यक हैं।
गृह राज्य मंत्री नित्यानंद राय ने सदन में कहा कि हर बच्चे का जन्म समय पर दर्ज होना जरूरी है, क्योंकि इसी रिकॉर्ड के आधार पर उसे जन्म प्रमाण पत्र, स्कूल में प्रवेश, पहचान संबंधी दस्तावेज, सरकारी योजनाओं का लाभ और अन्य कानूनी अधिकार प्राप्त होते हैं। इसी प्रकार मृत्यु का सही पंजीकरण संपत्ति हस्तांतरण, बीमा दावों, पेंशन, बैंकिंग और अन्य प्रशासनिक प्रक्रियाओं के लिए भी महत्वपूर्ण है।
विधेयक पर चर्चा के दौरान विपक्ष ने इसे महत्वपूर्ण बताते हुए कहा कि इस विषय पर चर्चा के समय केंद्रीय गृह मंत्री अमित शाह को सदन में उपस्थित रहना चाहिए था। विपक्षी सांसदों ने उनकी अनुपस्थिति पर आपत्ति जताई और नारेबाजी भी की। हालांकि हंगामे के बीच संक्षिप्त चर्चा के बाद सरकार ने विधेयक का पक्ष रखा और ध्वनिमत से इसे पारित कर दिया।
इस चर्चा में भारतीय जनता पार्टी, तृणमूल कांग्रेस, डीएमके, बीजू जनता दल, वाईएसआर कांग्रेस, अन्नाद्रमुक, भारत राष्ट्र समिति, मार्क्सवादी कम्युनिस्ट पार्टी, यूपीपी (एल) और शिवसेना सहित विभिन्न दलों के सांसदों ने भाग लिया। कई सदस्यों ने जन्म और मृत्यु पंजीकरण प्रणाली को अधिक प्रभावी बनाने की आवश्यकता पर सहमति जताई, जबकि कुछ विपक्षी सांसदों ने इसके क्रियान्वयन को लेकर सवाल भी उठाए।
सरकार का कहना है कि नए संशोधन से जन्म और मृत्यु से जुड़े रिकॉर्ड पहले की तुलना में अधिक सुरक्षित और विश्वसनीय बनेंगे। साथ ही फर्जी प्रमाणपत्र तैयार करने, गलत जानकारी देकर पंजीकरण कराने और वर्षों बाद संदिग्ध परिस्थितियों में रिकॉर्ड दर्ज कराने जैसी अनियमितताओं पर भी रोक लगेगी। सरकार को उम्मीद है कि यह कानून नागरिक पंजीकरण प्रणाली को और मजबूत करेगा तथा प्रशासनिक और कानूनी प्रक्रियाओं में पारदर्शिता बढ़ाने में महत्वपूर्ण भूमिका निभाएगा।
Next Story