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India-Pakistan संबंधों में नई हलचल देखने को मिली

Kanchan Paikara
26 Jun 2026 7:49 PM IST
India-Pakistan संबंधों में नई हलचल देखने को मिली
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New Delhi : भारत और पाकिस्तान के बीच आधिकारिक स्तर पर बातचीत लंबे समय से पूरी तरह ठप पड़ी हुई है। विशेष रूप से “ऑपरेशन सिंदूर” के बाद दोनों देशों के बीच औपचारिक कूटनीतिक संवाद और भी सीमित हो गया है। हालांकि इसके बावजूद पर्दे के पीछे अनौपचारिक स्तर पर बातचीत यानी ट्रैक-2 डिप्लोमेसी लगातार जारी है।
सूत्रों के अनुसार, पिछले एक वर्ष में भारत और पाकिस्तान के बीच कम से कम चार दौर की ट्रैक-2 वार्ताएं आयोजित की गई हैं। इन बैठकों में दोनों देशों के पूर्व कूटनीतिज्ञ, पूर्व सैन्य अधिकारी, रणनीतिक विशेषज्ञ और राजनीति से जुड़े कुछ लोग शामिल रहे हैं। इन वार्ताओं का उद्देश्य आधिकारिक चैनल बंद होने के बावजूद संवाद बनाए रखना और क्षेत्रीय स्थिरता के लिए संभावनाएं तलाशना बताया जा रहा है।
ट्रैक-2 डायलॉग को आमतौर पर अनौपचारिक कूटनीति का हिस्सा माना जाता है, जहां सरकारें सीधे शामिल नहीं होतीं, लेकिन अनुभवी विशेषज्ञ अपने-अपने विचार साझा करते हैं। इस तरह की बातचीत में सुरक्षा, सीमा तनाव, व्यापारिक संभावनाएं और आपसी भरोसे को लेकर चर्चा की जाती है।
जानकारों का कहना है कि भारत-पाक संबंधों में तनाव के बावजूद इस तरह के संवाद दोनों देशों के बीच न्यूनतम संपर्क बनाए रखने में मदद करते हैं। हालांकि इन बैठकों के कोई आधिकारिक परिणाम घोषित नहीं किए जाते, लेकिन इन्हें भविष्य की संभावित कूटनीतिक पहल के लिए एक आधार माना जाता है।
सूत्रों के मुताबिक, इन चार दौर की वार्ताओं में कई अहम मुद्दों पर विचार-विमर्श हुआ है, जिनमें सीमा पार तनाव, आतंकवाद से जुड़ी चिंताएं, क्षेत्रीय सुरक्षा और व्यापारिक संबंधों को लेकर संभावनाएं शामिल रही हैं। इसके अलावा दोनों पक्षों ने यह भी समझने की कोशिश की कि किन परिस्थितियों में आधिकारिक बातचीत दोबारा शुरू हो सकती है।
भारत और पाकिस्तान के बीच रिश्ते पिछले कुछ वर्षों से लगातार उतार-चढ़ाव से गुजर रहे हैं। कई बड़े घटनाक्रमों के बाद दोनों देशों के बीच विश्वास की कमी और बढ़ी है, जिसके कारण औपचारिक बातचीत लगभग बंद हो गई है। ऐसे में ट्रैक-2 डिप्लोमेसी को एक वैकल्पिक संवाद माध्यम के रूप में देखा जा रहा है।
हालांकि विशेषज्ञ यह भी मानते हैं कि ट्रैक-2 वार्ताएं किसी भी तरह से आधिकारिक कूटनीति का विकल्प नहीं हो सकतीं, लेकिन यह एक ऐसा मंच जरूर है जो तनाव के समय संवाद की संभावनाएं बनाए रखता है।
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