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New Delhi : कमजोर मानसून के अनुमान से कावेरी जल विवाद फिर बढ़ा

Delhi दिल्ली: कमजोर मानसून और जलाशयों में पानी के स्तर में गिरावट के अनुमान के बीच कर्नाटक और तमिलनाडु के बीच कावेरी जल बंटवारे को लेकर एक बार फिर तनाव बढ़ने की आशंका जताई जा रही है। विशेषज्ञों का मानना है कि इस बार अगस्त-सितंबर के दौरान पानी की उपलब्धता में और कमी आ सकती है, जिससे दोनों राज्यों के बीच विवाद गहरा सकता है।
कावेरी वॉटर कंट्रोल कमिटी (CWRC) और कावेरी वॉटर मैनेजमेंट अथॉरिटी (CWMA) ने दोनों राज्यों को सलाह दी है कि वे अपने-अपने क्षेत्रों में धान की खेती के लिए निर्धारित क्षेत्रों को लेकर सावधानी बरतें। अधिकारियों ने कहा कि कावेरी बेसिन में पानी की कमी की स्थिति में जल-संवेदनशील फसलों, विशेषकर धान की बुआई को लेकर संतुलित निर्णय लेना जरूरी होगा।
कावेरी नदी कर्नाटक के पश्चिमी घाट से निकलकर तमिलनाडु में बहती है, और दोनों राज्यों के लिए कृषि और पेयजल का प्रमुख स्रोत मानी जाती है। ऐसे में नदी के जल बंटवारे को लेकर हर साल मानसून की स्थिति महत्वपूर्ण भूमिका निभाती है।
दोनों राज्यों के प्रतिनिधियों के साथ हुई बैठक में अधिकारियों ने स्पष्ट किया कि धान जैसी अधिक पानी मांगने वाली फसलों पर निर्भरता को लेकर सतर्कता जरूरी है, खासकर कावेरी के किनारे वाले क्षेत्रों में।
कावेरी वॉटर कंट्रोल कमिटी के अध्यक्ष विनीत गुप्ता ने बताया कि पिछले साल मानसून अपेक्षाकृत अच्छा रहा था, जिसके कारण जल बंटवारे की प्रक्रिया तय नियमों के अनुसार सुचारु रूप से चल पाई थी। लेकिन इस बार स्थिति अलग हो सकती है, क्योंकि भारतीय मौसम विभाग (IMD) ने कमजोर मानसून की संभावना जताई है।
उन्होंने कहा कि यदि वर्षा सामान्य से कम रहती है तो जलाशयों का स्तर प्रभावित होगा और इसका सीधा असर कृषि गतिविधियों पर पड़ेगा। इसी को ध्यान में रखते हुए दोनों राज्यों को पहले से योजना बनाने की सलाह दी गई है।
फिलहाल CWRC और CWMA स्थिति पर नजर बनाए हुए हैं और आने वाले महीनों में बारिश और जल भंडारण की स्थिति के आधार पर आगे की सिफारिशें की जाएंगी।





