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New Delhi: सवर्ण विरोधी नारों के बीच पिछड़े-दलित संगठनों की चुप्पी

Admindelhi1
28 Jan 2026 2:26 PM IST
New Delhi: सवर्ण विरोधी नारों के बीच पिछड़े-दलित संगठनों की चुप्पी
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"पिछड़े-दलित समुदाय में बनी निस्तब्धता"

नई दिल्ली: देश की राजनीति में एक बार फिर जातीय विमर्श तेज हो गया है। हालिया राजनीतिक बयानों, आंदोलनों और सोशल मीडिया अभियानों के चलते सवर्ण विरोध का मुद्दा सुर्खियों में है, जबकि इसी दौरान पिछड़े और दलित वर्गों से जुड़े प्रमुख संगठनों की अपेक्षाकृत शांत प्रतिक्रिया ने नई बहस को जन्म दे दिया है।

राजनीतिक विश्लेषकों का कहना है कि कुछ दल और समूह आरक्षण, प्रतिनिधित्व और सामाजिक न्याय से जुड़े मुद्दों को लेकर आक्रामक रुख अपना रहे हैं। वहीं, परंपरागत रूप से आंदोलनशील रहे पिछड़े और दलित संगठनों की सीमित सक्रियता को लेकर सवाल उठ रहे हैं कि क्या यह रणनीतिक चुप्पी है या राजनीतिक असमंजस।

विपक्षी दलों का आरोप है कि सरकार की नीतियों और हालिया विधायी प्रस्तावों ने सामाजिक संतुलन को प्रभावित किया है, जिससे समाज में असंतोष बढ़ा है। दूसरी ओर, सत्तापक्ष का कहना है कि सरकार सबका साथ, सबका विकास के सिद्धांत पर काम कर रही है और किसी भी वर्ग के खिलाफ भेदभाव का सवाल ही नहीं उठता। समाजशास्त्रियों के अनुसार, मौजूदा माहौल में जातीय मुद्दों का उभार चुनावी राजनीति और सोशल मीडिया नैरेटिव से भी जुड़ा है। उनका मानना है कि किसी भी तरह का ध्रुवीकरण सामाजिक सौहार्द के लिए नुकसानदेह हो सकता है।

फिलहाल, देशभर में इस मुद्दे पर राजनीतिक बयानबाज़ी तेज है और आने वाले दिनों में यह बहस और गहराने के आसार हैं।

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