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New Delhi: इतिहास पाठ्यक्रम में मनुस्मृति और बाबरनामा को शामिल करने की कोई योजना नहीं: कुलपति योगेश सिंह

Admindelhi1
5 March 2025 8:38 AM IST
New Delhi: इतिहास पाठ्यक्रम में मनुस्मृति और बाबरनामा को शामिल करने की कोई योजना नहीं: कुलपति योगेश सिंह
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"कुलपति योगेश सिंह ने कहा कि मुगल सम्राट बाबर की आत्मकथा बाबरनामा का वर्तमान समय में कोई खास महत्व नहीं"

नई दिल्ली: दिल्ली विश्वविद्यालय (DU) के कुलपति योगेश सिंह ने मंगलवार को यह स्पष्ट किया कि विश्वविद्यालय के इतिहास पाठ्यक्रम में मनुस्मृति और बाबरनामा को शामिल करने की कोई योजना नहीं है। यह बयान उन खबरों के बीच आया है, जिनमें कहा जा रहा था कि विश्वविद्यालय की आगामी अकादमिक और कार्यकारी परिषद बैठकों में इन ग्रंथों को पाठ्यक्रम में शामिल करने पर चर्चा की जा सकती है।

सिंह ने कहा, "डीयू में मनुस्मृति और बाबरनामा जैसे विषयों को पढ़ाने की कोई योजना नहीं है।" उन्होंने यह भी स्पष्ट किया कि न तो इस पर कोई विचार किया गया है और न ही भविष्य में ऐसा कोई कदम उठाया जाएगा।

विश्वविद्यालय की ओर से कोई औपचारिक स्वीकृति नहीं

हाल ही में इतिहास विभाग की पाठ्यक्रम समिति ने इन दोनों ग्रंथों को अपने सिलेबस में शामिल करने को मंजूरी दी थी। हालांकि, इसे अभी तक विश्वविद्यालय की ओर से कोई औपचारिक स्वीकृति नहीं मिली है।

कुलपति योगेश सिंह ने कहा कि मुगल सम्राट बाबर की आत्मकथा बाबरनामा का वर्तमान समय में कोई खास महत्व नहीं है। उन्होंने कहा, "बाबरनामा तो वैसे भी एक तानाशाह की आत्मकथा है, इसे पढ़ाने की कोई आवश्यकता नहीं है।"

उन्होंने यह भी बताया कि नई शिक्षा नीति (NEP 2020) के तहत दिल्ली विश्वविद्यालय भारतीय परंपराओं को बढ़ावा देने वाले और राष्ट्रीय विकास में सहायक कोर्स शुरू करने पर ध्यान केंद्रित कर रहा है। उन्होंने कहा, "हम विकसित भारत की ओर बढ़ रहे हैं। हमारा अध्ययन सामग्री इस लक्ष्य को प्राप्त करने में सहायक होगी ताकि 2047 तक भारत एक विकसित राष्ट्र बन सके।"

गौरतलब है कि पिछले साल भी मनुस्मृति को विधि पाठ्यक्रम में शामिल करने का प्रस्ताव रखा गया था, लेकिन इसका कड़ा विरोध हुआ था। इसके चलते इसे कार्यकारी परिषद की मंजूरी से पहले ही हटा लिया गया था।

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