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Delhi दिल्ली: भारतीय जनता पार्टी (बीजेपी) के वरिष्ठ नेता मुख्तार अब्बास नकवी ने गुरुवार को कांग्रेस पर तीखा हमला करते हुए कहा कि आपातकाल के दौरान “संविधान की आपराधिक हत्या” की घटना को स्कूली पाठ्यक्रम में शामिल किया जाना चाहिए, ताकि नई पीढ़ी को लोकतंत्र के उस दौर की सच्चाई के बारे में जानकारी मिल सके।
नकवी ने कहा कि आपातकाल का समय भारतीय लोकतंत्र के इतिहास का सबसे काला अध्याय था, जिसमें लोकतांत्रिक अधिकारों का दमन किया गया और लोगों की स्वतंत्रता पर गंभीर प्रतिबंध लगाए गए। उन्होंने आरोप लगाया कि उस दौरान हजारों युवाओं को प्रताड़ित किया गया और जेल में डाला गया।
बीजेपी नेता ने कहा कि कांग्रेस आज “छात्रों की गूंज” नाम से एक नया अभियान चलाकर अपने अतीत के इन फैसलों पर पर्दा डालने की कोशिश कर रही है। उनके अनुसार, यह प्रयास जनता के बीच सच्चाई को कमजोर करने और राजनीतिक छवि सुधारने का एक प्रयास है।
उन्होंने जोर देकर कहा कि आपातकाल जैसी घटनाओं को इतिहास में उचित स्थान मिलना चाहिए और इसे शिक्षा व्यवस्था का हिस्सा बनाया जाना चाहिए, ताकि छात्र लोकतंत्र की कीमत और उसके संरक्षण के महत्व को समझ सकें।
इसी बीच, कांग्रेस पार्टी ने गुरुवार को देशभर में 28 स्थानों पर एक साथ 40 दिनों का व्यापक अभियान शुरू किया है। पार्टी का कहना है कि इस अभियान का उद्देश्य छात्रों और युवाओं से सीधे संवाद स्थापित करना है।
कांग्रेस के अनुसार, यह अभियान शिक्षा क्षेत्र से जुड़े मुद्दों पर केंद्रित है, जिसमें परीक्षा पेपर लीक, भर्ती प्रक्रियाओं में देरी और शिक्षा व्यवस्था से जुड़ी अन्य समस्याओं पर युवाओं की राय ली जाएगी। पार्टी का दावा है कि यह पहल छात्रों की वास्तविक समस्याओं को समझने और उनके समाधान की दिशा में कदम उठाने के लिए की गई है।
हालांकि, बीजेपी नेताओं ने इस अभियान को राजनीतिक रूप से प्रेरित बताया है और कहा है कि कांग्रेस अपने पिछले रिकॉर्ड से ध्यान हटाने के लिए नए मुद्दे उठा रही है। नकवी ने कहा कि जनता को इतिहास की सच्चाई से अवगत कराना जरूरी है ताकि भविष्य में लोकतांत्रिक संस्थाओं की रक्षा की जा सके।
राजनीतिक विश्लेषकों का मानना है कि आपातकाल का मुद्दा भारतीय राजनीति में आज भी संवेदनशील बना हुआ है और चुनावी व राजनीतिक बहसों में समय-समय पर उठता रहता है। दोनों दलों के बीच इस मुद्दे पर बयानबाजी से राजनीतिक माहौल और गर्म होने की संभावना है।
कांग्रेस की ओर से शुरू किए गए इस 40 दिवसीय अभियान में छात्रों, शिक्षकों और शिक्षा क्षेत्र से जुड़े लोगों से संवाद करने की योजना है। पार्टी का कहना है कि इससे नीति निर्माण में युवाओं की भागीदारी बढ़ेगी।
फिलहाल, दोनों दलों के बीच इस मुद्दे पर आरोप-प्रत्यारोप का दौर जारी है और राजनीतिक बहस तेज होती दिख रही है।





